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चाँद बहुत उदास था....

Posted On: 14 May, 2013 में

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कल चाँद बहुत उदास था
तारे भी थे बुझे बुझे
हवा भी थी रुकी रुकी
रात के दामन में,
छुपा सा कोई राज था
कल चाँद बहुत उदास था ……
*******
पूछा तो कुछ बोला नहीं
भेद कुछ खोला नहीं
हंसी में उसकी दर्द था
आँखों में थी नमी बसी
दिल से दूर था कही
कहने को मेरे पास था
कल चाँद बहुत उदास था ….

*******
sad moon 3

रंगत जरा फीकी सी थी
नींदे  कही उडी सी थी
सपने खड़े थे देहलीज पे
आंखे मगर खुली सी थी
धडकन भी थी खामोश सी
बस कहने बार को श्वास था
कल चाँद बहुत उदास था ….
*******

डूबा हुआ था याद में ‘
टूटे किसी इक खवाब में
कोशिश तो थी संभलने की
पर दर्द था आवाज में
हवाओ की सरसराहट में
बस दर्द भरा राग था
कल चाँद बहुत उदास था ….
*******

खिडकी पे बैठे रही
बस उसे तकती रही
चाहा की उससे पूछ लू
एक राज तो बता दे तू
क्यों बेदाग़ सी थी रौशनी
क्यों चाँद दागदार था
कल चाँद बहुत उदास था ….
*******

(रौशनी धीर )

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1550 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ashutosh Shukla के द्वारा
April 6, 2014

‘वाह’…बहुत सुन्दर रचना रौशनी जी…..

yogi sarswat के द्वारा
June 17, 2013

नमस्कार रौशनी जी… काफी दिनों के बाद आपकी रचना पढ़ी और पढ़कर बहुत ख़ुशी हुई की आज भी आपके अलफ़ाज़ का जादू बदस्तूर जारी है …. बेहतरीन एहसासात से लबरेज उत्तम रचना पर हार्दिक बधाई आपको ! खिडकी पे बैठे रही बस उसे तकती रही चाहा की उससे पूछ लू एक राज तो बता दे तू क्यों बेदाग़ सी थी रौशनी क्यों चाँद दागदार था कल चाँद बहुत उदास था …. बहुत खूबसूरत शब्द , वाह !

    roshni के द्वारा
    June 17, 2013

    धनयवाद योगी जी … इसी तरह अपना प्रोत्सहान देते रहिएगा तहे दिल से शुक्रिया

nilesh patel के द्वारा
May 25, 2013

डूबा हुआ था याद में टूटे किसी एक ख्वाब में , कोशिश तो थी संभलने की पर दर्द था आवाज में हवाओ की सरसराहट में बस दर्द भरा राग था , कल चाँद बहोत उदास था …………….. ःःःःःःःःःःःःःःःःः क्या खूब रौशनी जी ………. आपकी रचना तो बहोत गहराई है । ( जल बिन मछली ) बधाई हो आपको

    roshni के द्वारा
    June 1, 2013

    निलेश जी तारीफ के लिए बहुत बहुत आभार

    roshni के द्वारा
    June 1, 2013

    दिव जी धनयवाद ब्लोग्प्रसरन में स्थान देने ke liye abhar

Shweta के द्वारा
May 23, 2013

हृदय स्पर्शी रचना …………..पढ़ कर बहुत अच्छा लगा

    roshni के द्वारा
    June 1, 2013

    तारीफ ke लिए तहे दिल से शुक्रिया श्वेत जी

    Lucas के द्वारा
    January 10, 2014

    You really saved my skin with this intromafion. Thanks!

sudhajaiswal के द्वारा
May 21, 2013

रौशनी जी, बहुत सुन्दर रचना और उतनी ही सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई |

    roshni के द्वारा
    June 1, 2013

    सुधा जी रचना की तारीफ के लिए आभार

AK Rajput के द्वारा
May 20, 2013

बहुत खुबसूरत , लाजवाब रचना

    roshni के द्वारा
    May 20, 2013

    धन्यवाद् ऐ के जी आभार

rekhafbd के द्वारा
May 19, 2013

खिडकी पे बैठे रही बस उसे तकती रही चाहा की उससे पूछ लू एक राज तो बता दे तू क्यों बेदाग़ सी थी रौशनी क्यों चाँद दागदार था कल चाँद बहुत उदास था,बहुत खूब रौशनी जी ,बधाई

    roshni के द्वारा
    May 20, 2013

    रेखा जी रचना को पसंद करने किये हार्दिक आभार धन्यवाद

    Chassidy के द्वारा
    July 12, 2016

    Knlweodge wants to be free, just like these articles!

chaatak के द्वारा
May 18, 2013

क्यों बेदाग़ सी थी रौशनी क्यों चाँद दागदार था ……. बहुत खूब ! एक और खूबसूरत रचना पर हार्दिक बधाई!

    roshni के द्वारा
    May 20, 2013

    तारीफ के लिए तहे दिल से शुक्रिया चातक जी आभार

aman kumar के द्वारा
May 17, 2013

खिडकी पे बैठे रही बस उसे तकती रही चाहा की उससे पूछ लू एक राज तो बता दे तू क्यों बेदाग़ सी थी रौशनी क्यों चाँद दागदार था कल चाँद बहुत उदास था बहुत अच्छी प्रस्तुति ! आभार ,,,,,,,,,,,

    roshni के द्वारा
    May 17, 2013

    अमन कुमार जी नमस्कार रचना की तारीफ के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

Madan Mohan Saxena के द्वारा
May 17, 2013

बहुत ही सुन्दर कविता ,बधाई.. Plz visit My blogs.

    roshni के द्वारा
    May 17, 2013

    धन्यवाद् मदन मोहन जी और आपके ब्लॉग पर आमंत्रण के लिए आभार और जरुर विजिट करेगे आपका ब्लॉग भी

bhagwanbabu के द्वारा
May 16, 2013
    roshni के द्वारा
    May 17, 2013

    भगवान् बाबु जी नमस्कार तारीफ के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार

priti के द्वारा
May 16, 2013

अति सुंदर! हार्दिक बधाई ! रौशनी ऐसे ही लिखती रहो……..

    roshni के द्वारा
    May 17, 2013

    प्रीति जी तारीफ के लिए शुक्रिया आभार

    Kaylee के द्वारा
    July 12, 2016

    ITS FAKE! GO TO THE OSCARS WEBSITE AND LOOK AT THE NOMINEES EVERYONE! Only Wreck It Ra2;p&#8l17hs nominee for Best Animated Film is not fake. NOBODY IN THE VIDEO IS IN THE ACTUAL NOMINEES!

shashi bhushan के द्वारा
May 16, 2013

आदरणीय रोशनी जी, सादर ! “”तारे भी थे बुझे बुझे हवा भी थी रुकी रुकी रात के दामन में, छुपा सा कोई राज था कल चाँद बहुत उदास था ……”" सम्पूर्ण वातावरण में फैली विषाक्तता से चाँद भला बेअसर कैसे रहेगा ? बहुत अर्थ भरी रचना !

    roshni के द्वारा
    May 16, 2013

    नमस्कार शशि भूषण जी सही कहा जब चारसू उदासी होती है तो सम्पुरण वातावरण उसकी चपेट में आ जाता है रचना की तारीफ के लिए शुक्रिया

ashishgonda के द्वारा
May 16, 2013

वाह वाह रौशनी दीदी! बहुत ही सुन्दर कविता पढकर बार-बार पढ़ने का मन होता है. “जब महबूब को चाँद की याद है. जब “रौशनी” चाँद के इतना पास है. और क्या चाहिए चाँद को जीने के लिए, क्या चाँद अब भी कल सा उदास है…?” बहुत ही सराहनिए और उन्दा रचना, इतनी अच्छी रचना पोस्टिंग के लिए हार्दिक धन्यवाद. प्रणाम.

    roshni के द्वारा
    May 16, 2013

    आशीष भाई मेरी कविता तो ठीक परन्तु अपने जो लिखा वोह बहुत खूब लिखा बहुत सुंदर शेर कहा अपने ऐसे ही लिखते रहो तुम आभार

    Cordelia के द्वारा
    July 12, 2016

    You could definitely see your expertise within the paintings you write. The world hopes for more passionate writers such as you who are not afraid to say how they believe. All the time go after your heart. &#r2i0;H2sto8y is the version of past events that people have decided to agree upon.” by Napoleon.

Aakash Tiwaari के द्वारा
May 16, 2013

रौशनी जी, जैसा की श्री शाही जी ने कहा,अब मुझे तो इसपर ज्यादा कुछ कहना बाकी नही बचता..बहुत खूबसूरती से रची है आपने ये रचना… आकाश तिवारी

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 16, 2013

    रौशनी जी एक लाइन कहूँगा.. ========================================== गर मालुम होता की क्या हकीकत है क्या फसाना ऐ आकाश, तो हुश्न के शहर में तू आज यूँ अकेला न होता.. ========================================== आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    May 16, 2013

    धन्यवाद आकाश जी काफी लम्बे समय बाद आपको देखा .. सवागत है आपका

    roshni के द्वारा
    May 16, 2013

    इतने अच्छे शेर के लिए भी बहुत बहुत शुक्रिया .. यु ही लिखते रहिये

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 17, 2013

    मैल लेखन से जरुर दूर था रौशनी जी मगर जागरण तो मेरे दिल में था… बहुत याद करता था आप लोगों को….आज भी .. आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    May 17, 2013

    मंच पर दुबारे आप आये अच्छा किया .. लेखन से ज्यदा दूर नहीं रहना चाइये.. आपका स्वागत है

आर.एन. शाही के द्वारा
May 15, 2013

बहुत मीनिंगफ़ुल कविता है रौशनी । दागदार चाँद की बेदाग़ चाँदनी (रोशनी) भी ज़माने से ही क़ायम रही है । चाँद और चाँदनी के बीच का यह फ़र्क़ शायद कभी नहीं मिटने वाला । वह अपनी जगह पर क़ैद अचल है, जबकि चाँदनी पूरी क़ायनात पर छाकर हर शू अपनी रौशनी बिखेरती है । अच्छी कविता के लिये बधाई !

    roshni के द्वारा
    May 15, 2013

    आ० शाही जी नमस्कार रचना की तारीफ के लिए आभार ऐसे ही आशीर्वाद बनाये रखिये ..

    Buck के द्वारा
    July 12, 2016

    Damn, I wish I could think of soinmhteg smart like that!

alkargupta1 के द्वारा
May 15, 2013

“खिडकी पे बैठे रही बस उसे तकती रही चाहा की उससे पूछ लू एक राज तो बता दे तू क्यों बेदाग़ सी थी रौशनी क्यों चाँद दागदार था कल चाँद बहुत उदास था ….” कल रोशनी का चाँद क्यों उदास था ?रोशनी जी अति उत्तम सुन्दर सी रचना के लिए बधाई

    roshni के द्वारा
    May 15, 2013

    नमस्कार अलका जी सबी यही पुछ रहे है की चाँद क्यों उदास था .. यही तो राज है जो वोह बताना नहीं चाहता आपके प्यार और स्नेह के लिए आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 15, 2013

तारों की कारोबारी जरा धीर धरो पीड़ा चाँद की पूंछो संग उसकी पीर हरो बधाई हो स्नेही रौशनी जी बहुत बढ़िया

    roshni के द्वारा
    May 15, 2013

    आ० चाचा जी नमस्कार बहुत सुंदर पंक्तियाँ कही अपने धन्यवाद आपके आशीर्वाद और स्नेह के लिए आभार

    Symona के द्वारा
    July 12, 2016

    Thanks for shriang. What a pleasure to read!

Himanshu Nirbhay के द्वारा
May 15, 2013

वो चाँद आज भी उदास है, फिर भी मेरे पास है…………… अच्छी रचना रौशनी जी.

    roshni के द्वारा
    May 15, 2013

    धन्यवाद हिमांशु जी प्रतिकिर्या के लिए आभार

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
May 15, 2013

कल चाँद बड़ा उदास था / वजह भी कुछ ख़ास था / रोशनी मलिन थी, धीर थी गंभीर थी / फिर चाँद क्यों नहीं उदास होता ? बहुत सुन्दर कविता / बधाई

    roshni के द्वारा
    May 15, 2013

    राजेश जी धनयवाद सुंदर पंक्तियों के साथ प्रशंसा के लिए आभार

    Roxy के द्वारा
    July 12, 2016

    Overall I loved this episode. The comedy, dragon ball parody, funny chihuahua, and of course the fanservice in the bathroom ^^VHuaaa, I ca;87&21#nt wait the next episode, because I see in the preview Ichiko becomes a little child.

jlsingh के द्वारा
May 15, 2013

आदरणीया रोशनी जी, सादर अभिवादन! आप इतनी अच्छी कविता जिसमे सुन्दर शब्द संयोजन के साथ सुन्दर भाव भी हो कैसे लिख लेती हैं! खिडकी पे बैठे रही बस उसे तकती रही चाहा की उससे पूछ लू एक राज तो बता दे तू क्यों बेदाग़ सी थी ‘रौशनी’ क्यों चाँद दागदार था कल चाँद बहुत उदास था ….

    roshni के द्वारा
    May 15, 2013

    जल सिंह जी नमस्कार प्रशंशा के लिए धन्यवाद .. बस थोड़ी सी लिखने की कोशिश है .. बाकि तो खुद मुझे भी नहीं पता आप सबका आशीर्वाद है आभार

    Destrie के द्वारा
    July 12, 2016

    GM was never really known for there cars. Does the Lumina still exist? did the Malibu ever mean as the big vehlice of Chevy? NO. Ford Taraus was huge from when it started till the mid 90s. I love the new Taraus.

AJAY KUMAR CHAUDHARY के द्वारा
May 14, 2013

हाँ ! कल चाँद उदास था. दूर से देखता और तरसता था कहता – रौशनी है मुझसे रूठी रूठी, मेरा महबूब क्यों न मेरे पास था.

    roshni के द्वारा
    May 15, 2013

    धन्यवाद अजय जी आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए आभार

    AMAR LATA के द्वारा
    May 15, 2013

    अच्छा ! तो इसलिए उदास था… उसका महबूब जो न उसके पास था…!

    Leatrix के द्वारा
    July 12, 2016

    You’ve really imersespd me with that answer!

nishamittal के द्वारा
May 14, 2013

रौशनी रचना तो तुम्हारी सदा ही दिल को छूने वाली होती है खिडकी पे बैठे रही बस उसे तकती रही चाहा की उससे पूछ लू एक राज तो बता दे तू क्यों बेदाग़ सी थी रौशनी क्यों चाँद दागदार था कल चाँद बहुत उदास था …. उत्तर मिला क्या?

    roshni के द्वारा
    May 15, 2013

    निशा जी नमस्कार जी नहीं अबी उत्तर नहीं मिला … मगर कारन पता है क्यों उदास था तारीफ के लिए शुक्रिया आभार

sumit के द्वारा
May 14, 2013

सुंदर कविता

    roshni के द्वारा
    May 15, 2013

    धन्यवाद सुमित जी

Kr. Vishal के द्वारा
May 14, 2013

बेहतरीन रचना रौशनी जी,  पर ये भी तो बता दो आप कि चाँद आखिर क्यूँ उदास है    कितनी रात ढलीं बिन चंदा ? कितने दिन बिन सूरज बीते ? कैसे तड़प-तड़प कर बिखरे, भरी आखँ में सपने रीते ..? कौन पिये और कैसे खाए ? मन को जब जोगी भा जाए, तुम को कौन सिखाये भा कर..? तुम से कौन कहेगा आकर….?

    roshni के द्वारा
    May 15, 2013

    विशाल जी जोगी से तुम प्रीत न करना ,, जोगी का न कोई ठिकाना, जोगी के तुम दीवाने , जोगी उस ख़ुदा का दीवाना.. आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार

ऋषभ शुक्ला के द्वारा
May 14, 2013

बहूत सुन्दर और भावपूर्ण रचना रोशनी जी , कृपया मेरी रचनाओ को भी पढ़े और सुझाव दे -http://rushabhshukla.jagranjunction.com/ धन्यवाद

    roshni के द्वारा
    May 14, 2013

    ऋषभ जी धन्यवाद रचना की तारीफ के लिए आभार

    Torn के द्वारा
    July 12, 2016

    I love these arltcies. How many words can a wordsmith smith?

allrounder के द्वारा
May 14, 2013

नमस्कार रौशनी जी… काफी दिनों के बाद आपकी रचना पढ़ी और पढ़कर बहुत ख़ुशी हुई की आज भी आपके अलफ़ाज़ का जादू बदस्तूर जारी है …. बेहतरीन एहसासात से लबरेज उत्तम रचना पर हार्दिक बधाई आपको !

    roshni के द्वारा
    May 14, 2013

    नमस्कार सचिन जी काफी समय बाद आपकी प्रतिक्रिया मिली … धन्यवाद कुछ समय निकालने के लिए .. रचना आपको पसंद आयी धन्यवाद इसी तरह अपने विचार देते रहिये आभार


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