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परछाईया बाकी है

Posted On: 29 Apr, 2013 में

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baki

न कोई आरजू बाकी
न कोई जुस्तुजू बाकी
न तेरी याद आती है
न कोई हसरत रही बाकी…
मै कितना भी बदल जाऊ मगर कुछ भी न बदलेगा
तेरी वो दिलकशी बाकी
तेरी वो बेरुखी बाकी

मै खाक हो गया फिर भी रही संगदिल
तेरी वो नाराजगी बाकी
तेरी वो झूठी जिद बाकी

बे पर्दा हो गयी शाखे,
हुए कुछ गुलशन भी वीराने
मगर लिपटे है शाखों से
कुछ सूखे पते अभी बाकी

तू कब आता है
कब जाता है कोई आहट नहीं होती
यु छुप के आने जाने की तेरी बुरी आदत अभी बाकी

तू न दे दिल में पनाह नहीं अफसोस अब मुझको
अभी मरघट में बची है बहुत
मेरे लिए जगह बाकी

अँधेरे में कही खोने को निकले है कदम मेरे
बची है रौशनी में फिर भी मेरी परछाईया बाकी

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1144 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

AMAR LATA के द्वारा
May 9, 2013

रोशनी जी बहुत अच्छे…! गम गलत करने को न हो कोई भले साकी, न मायूस हो अभी ऐ दोस्त इन अंधेरों में है कुछ रोशनी बाकी…! धन्यवाद..!

    roshni के द्वारा
    May 10, 2013

    अमर लता जी सराहना के लिए दिल से शुक्रिया आभार

seemakanwal के द्वारा
May 8, 2013

खुबसूरत गज़ल . आभार .

    roshni के द्वारा
    May 9, 2013

    धन्यवाद सीमा जी

aman kumar के द्वारा
May 6, 2013

मै कितना भी बदल जाऊ मगर कुछ भी न बदलेगा तेरी वो दिलकशी बाकी तेरी वो बेरुखी बाकी… बहुत अच्छे ,,,,,,

    roshni के द्वारा
    May 9, 2013

    धन्यवाद अमन जी

    Jeana के द्वारा
    July 12, 2016

    Per Ale 83.Caro Ale queste cose sono naturalmente complesse e non è facile dare una rieotsoa.Crsdp, però, che laddove un certo percorso non è stato fatto e certi blocchi restano, sia molto difficile provare qualcosa per il sesso opposto.Quel che posso dirti è che se provi disagio per le tue pulsioni, non mollare e il cambiamento potrà arrivare.IN bocca al lupo.

Alka के द्वारा
May 3, 2013

रौशनी जी, पहली बार आपको पढ़ रही हूँ | बहुत ही उम्दा अल्फाजों के साथ एक खुबसूरत गजल | बधाई ..

    roshni के द्वारा
    May 3, 2013

    अलका जी नमस्कार ग़ज़ल पसंद करने के लिए शुक्रिया … आभार

    Tessa के द्वारा
    July 12, 2016

    We need a lot more initghss like this!

Sushma Gupta के द्वारा
May 2, 2013

रौशनी जी, ”अँधेरे में कही खोने को निकले हैं कदम मेरे बची है रौशनी में फिर भी मेरी परछाइयां बाकी” बहुत ही लाज़वाब गजल है ,इसके लिए आपको हार्दिक वधाई ….

    roshni के द्वारा
    May 3, 2013

    Sushma ji namskar tarif ke liye hardik abhar

chaatak के द्वारा
May 2, 2013

‘होठों पे मुस्कराहट, फिर दिल उदास क्यूँ है, दरिया पे है बसेरा फिर भी ये प्यास क्यूँ है;’ परछाइयों में खोया ये कौन गा रहा है, ये खुद में खुद की आखिर ऐसी तलाश क्यूँ है; अच्छी रचना पर हार्दिक बधाई!

    roshni के द्वारा
    May 2, 2013

    चातक जी नमस्कार खुबसूरत प्रतिक्रिया खुबसूरत अश्यार के साथ … बहुत बहुत आभार

Rachna Varma के द्वारा
May 1, 2013

बहुत दिनों बाद रौशनी एक खूबसूरत कविता के साथ आपका आगाज हुआ |

    roshni के द्वारा
    May 2, 2013

    धन्यवाद रचना जी

    Dina के द्वारा
    July 12, 2016

    I believe that avoiding prepared foods may be the first step so that you can lose weight. They may taste beneficial, but prepared foods have got very little vitamins and minerals, making you try to eat more in order to have enough vitality to get over the day. Should you be constantly taking in these foods, transferring to grain and other complex caeoyhbdratrs will help you to have more vigor while eating less. Great blog post.

anilkumar के द्वारा
May 1, 2013

वास्तव में बहुत खूबसूरत रचना । बहुत बहुत शुभकामनाएं , रोशनी जी ।

    roshni के द्वारा
    May 2, 2013

    नमस्कार अनिल कुमार जी प्रतिक्रिया के लिए आभार

alkargupta1 के द्वारा
May 1, 2013

रोशनी जी , बहुत दिनों के पश्चात् अति सुन्दर रचना पढी …. बहुत ही अच्छी भावाभिव्यक्ति

    roshni के द्वारा
    May 1, 2013

    अलका जी प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार

yogi sarswat के द्वारा
May 1, 2013

तू न दे दिल में पनाह नहीं अफसोस अब मुझको अभी मरघट में बची है बहुत मेरे लिए जगह बाकी… बहुत सुन्दर शब्द आदरणीय रोशनी जी !

    roshni के द्वारा
    May 1, 2013

    योगी जी नमस्कार धन्यवाद प्रशंसा के लिए आभार

bhagwanbabu के द्वारा
May 1, 2013

काफी दिनो बाद… आपकी चन्द खूबसूरत लाईनें पढ़ने को मिली इस मंच पर… पुनः आपका स्वागत है… .

    roshni के द्वारा
    May 1, 2013

    भगवान बाबु जी धनयवाद स्वागत के लिए और रचना को पसंद करने के लिए आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 1, 2013

अर्ध शतक की बधाई

    roshni के द्वारा
    May 1, 2013

    Dhanywad चाचा जी आपका आशीर्वाद बना रहे तो शायद १०० तब भी कभी जा पाए हम आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 1, 2013

तू न दे दिल में पनाह नहीं अफसोस अब मुझको अभी मरघट में बची है बहुत मेरे लिए जगह बाकी… अँधेरे में कही खोने को निकले है कदम मेरे बची है रौशनी में फिर भी मेरी परछाईया बाकी… स्नेही रौशनी जी सादर बहुत ही भावात्मक रचना है बहुत सुन्दर बधाई.

    roshni के द्वारा
    May 1, 2013

    Adaarniye चाचा जी नमस्कार तारीफ के लिए धन्यवाद….

shashi bhushan के द्वारा
May 1, 2013

आदरणीय रौशनी जी, सादर ! खूबसूरत भाव भरी रचना ! सुन्दर प्रस्तुति !

    roshni के द्वारा
    May 1, 2013

    शशि जी नमस्कार आभार प्रशंसा के लिए

    Romby के द्वारा
    July 12, 2016

    Your article was exelelcnt and erudite.

Malik Parveen के द्वारा
April 30, 2013

बहुत सुन्दर कविता रौशनी ….

    roshni के द्वारा
    May 1, 2013

    Parveen ji dhanywad

div81 के द्वारा
April 30, 2013

कहना तुमसे बहुत कुछ है अभी बाकी ये तो आगाज है अंजाम अभी बाकी ……………  :) बहुत खूब

    roshni के द्वारा
    May 1, 2013

    dhanywad div ji tarif ke liye

    divya (div 81) के द्वारा
    May 2, 2013

    अर्ध शतक की बधाई रौशनी जी

    roshni के द्वारा
    May 2, 2013

    धन्यवाद दिव्या

    Bunny के द्वारा
    July 12, 2016

    i can hardly wait to hear how these turn out! i have been wanting to get more into feaerntmtion at home. this sounds way more accessible to me than traditional canning. and i love fermented foods. well, my body does. i just feel so much better when i eat them

nishamittal के द्वारा
April 30, 2013

बहुत दिन पश्चात एक सुन्दर रचना के साथ स्वागत रौशनी तुम्हारा

    roshni के द्वारा
    May 1, 2013

    निशा जी नमस्कार , धन्यवाद आभार

jlsingh के द्वारा
April 30, 2013

सुन्दर! अभी मरघट में बची है बहुत मेरे लिए जगह बाकी… अँधेरे में कही खोने को निकले है कदम मेरे बची है रौशनी में फिर भी मेरी परछाईया बाकी…

    roshni के द्वारा
    May 1, 2013

    नमस्कार जलसिंह जी , प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार


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