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कशमकश

Posted On: 18 Feb, 2013 में

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Kashmakashभीतर पल पल करवट ले इक खालीपन,
होने लगी है खुद से ही खुद की अनबन
दूजा कोई होता तो समझा देती मै,
सौ दुनिया की करके बाते बहला देती मै …..
सपनों की दुनिया का तस्वुर करता है,
जाने क्यों सच मे जीने से डरता है ,
अपना सपना होता तो मिटा देती मै,
सच की झूठी दुनिया दिखला देती मै…..
कहता है मुझसे अब जीना छोड़ भी दे,
प्यार के सारे बंधन अब तू तोड़ भी दे,
मेरा जीवन होता तो लौटा देती मै,
मुझको ही होता तो प्यार भुला देती मै …..
थकी थकी सी रूह को सुला भी दे अब,
रुके रुके अश्कों को बहा भी दे अब
आंखे बंद करने से नींद अगर आ जाती तो,
मूंद के पलके खुद को सुला देती मै…..
अश्कों को अगर समझने वाला होता वो,
तो रोते रोते भी मुस्कुरा देती मै
काश के मुझको खुद को ही बहलाना आ जाता
तो आस की हर एक जोत बुझा देती मै…..

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2278 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ashutosh Shukla के द्वारा
March 16, 2014

सुन्दर अभिव्यक्ति रोशनी जी…. http://ashutoshshukla.jagranjunction.com/

RISHU के द्वारा
September 19, 2013

wah wah kya baat hai dil ko chu gai apki ye kavita ;) bohut khoob

Shweta के द्वारा
March 1, 2013

बेहद खूबसूरत रचना

    roshni के द्वारा
    March 1, 2013

    आभार श्वेता जी

    Paulina के द्वारा
    July 12, 2016

    paWin en mi caso he comprado 2 kindle y 2 fundas y portes han sido mas o menos 28€ y aduanas 52€.De todas formas puedes hacer la simulación en la página de amazon.com y justo antes de aceptar el pago te muestra un resumen con toda la inicnmaofór.

drvandnasharma के द्वारा
February 27, 2013

वाह वाह क्या बात है ,छू गयी दिल को , काश के मुझको खुद को ही बहलाना आ जाता

    roshni के द्वारा
    March 1, 2013

    धन्यवाद

chaatak के द्वारा
February 25, 2013

दिल के जज्बातों को यदि शब्द दिए जाएँ तो असर तो होता है, बहुत ही कम पंक्तियों में काफी असर लायीं हैं आप| हार्दिक बधाई!

    roshni के द्वारा
    February 26, 2013

    चातक जी नमस्कार, प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार

aman kumar के द्वारा
February 25, 2013

अश्कों को अगर समझने वाला होता वो, तो रोते रोते भी मुस्कुरा देती मै काश के मुझको खुद को ही बहलाना आ जाता तो आस की हर एक जोत बुझा देती मै….. बहुत दिल से लिखी कविता ! दिल को छु गयी !

    roshni के द्वारा
    February 26, 2013

    अमन कुमार जी रचना को पसंद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार

Dhavlima Bhishmbala के द्वारा
February 25, 2013

आदरणीय रोशनी जी, बहुत सुन्दर शब्दों से आपने अपनी कशमकश को व्यक्त किया है | हार्दिक बधाई |

    roshni के द्वारा
    February 26, 2013

    रचना की तारीफ के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आभार

    Pait के द्वारा
    July 12, 2016

    Kiitos Laventeli! Minullakin vielä huomenna palkaton "oma loma" tämän loakmätpän jatkoksi :) Ajattelin käydä kirjastossa katselemassa kivaa luettavaa kun tällä lomalla on tullut luettua kaikki hyvät kirjat kotoa. Samoin kivaa lomaa sinulle ♥

bhagwanbabu के द्वारा
February 25, 2013
    roshni के द्वारा
    February 26, 2013

    धन्यवाद भगवान बाबु जी आभार

seemakanwal के द्वारा
February 24, 2013

खुबसूरत रचना . बहुत धन्यवाद .

    roshni के द्वारा
    February 24, 2013

    धन्यवाद सीमा जी आभार

deepak khanduri के द्वारा
February 24, 2013

NICE

    roshni के द्वारा
    February 24, 2013

    Thank u deepak ji

akraktale के द्वारा
February 23, 2013

रोशनी जी सादर सुन्दर मनोभावों की प्रस्तुति.बहुत दिनों बाद आपकी कोई रचना मंच पर देख रहा हूँ मैं. बधाई स्वीकारें.

    roshni के द्वारा
    February 23, 2013

    आकाश जी नमस्कार हमेशा की तरह रचना को पसंद करने के लिए हार्दिक आभार .. कोशिश रहेगी की अब मंच पर दिखयी देते रहे .. आभार

yatindrapandey के द्वारा
February 22, 2013

हैलो यहाँ स्टार कम है *************************************************************************************************************** तो मई आपकी इस रचना को दे रहा हु बेहद ही दिल को छू लेने वाला

    roshni के द्वारा
    February 23, 2013

    यतिन जी इतने सारे स्टार्स के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आभार

    Adonica के द्वारा
    July 12, 2016

    I was seuisroly at DefCon 5 until I saw this post.

alkargupta1 के द्वारा
February 22, 2013

बहुत समय बाद आपकी सुन्दर रचना पढने को मिली रोशनी जी

    roshni के द्वारा
    February 23, 2013

    नमस्कार अलका जी , आभार रचना को पसंद करने के लिए

    Dorie के द्वारा
    July 12, 2016

    Would you like a receipt? fucking fatscntia! Joslyn James really knows how to get fucked. really got my cock going. just reminds me about the threesome i had!

allrounder के द्वारा
February 21, 2013

रौशनी जी नमस्कार, काफी दिनों बाद आपकी रचना मंच पर पढने को मिली हमेशा की तरह बेहतरीन रचना आपकी इसके लिए हार्दिक बधाई आपको और आगे भी ऐसे सुन्दर लेखन के लिए हार्दिक शुभकामनायें !

    roshni के द्वारा
    February 23, 2013

    नमस्कार सचिन जी तारीफ के लिए हार्दिक आभार

    Jaylon के द्वारा
    July 12, 2016

    5:30Ben 56/13:19(3k)Nathan 108/9:20(7k)Shea 208/146(7k)Carly 174/123(5k)Chris o 173/11:31(7k)Phil 77/142(7k)Jeremy 136/(12:55 rxLeasa 67/137(7k)Kylie 51/7:45(4k)Joel 266/14:35rx 6:15Eleanor 127/147(4k)Eoin 66/37Jake 311/5:59(tyre flip)Georgia 315/118(4k)Glen 2/13:56(6k)Brijesh 17/143(6k)Jeremey 4/135Fi 127/14:05(4k)Elli 31/135(4k)Rach k 109/14:28(3k)Amy 16a)11:17(3k/Br4dley 304/9:07rxJohn b 172/10:23 (7k)

shashi bhushan के द्वारा
February 21, 2013

आदरणीय रौशनी जी, सादर ! अंतर्मन के कशमकश में हिलकोरे खाती, एक सुन्दर भाव भरी रचना ! हार्दिक बधाई ! “”भीतर पल पल करवट लेता खालीपन, होने लगी है खुद से ही खुद की अनबन होता कोई दूजा मैं समझा देती सौ दुनिया की बातें कर बहला देती !”" “अगर समझता अश्कों के खालीपन को, रोते रोते भी हंसती, मुस्का देती, काश के मुझको खुद को बहलाना आता झूठी आस की हर एक जोत बुझा देती !”

    roshni के द्वारा
    February 23, 2013

    धन्यवाद् शशि जी रचना को पसंद करने ke लिए हार्दिक आभार

    Suzy के द्वारा
    July 12, 2016

    Wow! Great to find a post with such a clear meeagss!

Malik Parveen के द्वारा
February 20, 2013

दमदार वापसी रौशनी जी बधाई …

    roshni के द्वारा
    February 20, 2013

    परवीन जी नमस्कार तारीफ के लिए शुक्रिया आभार

ashvinikumar के द्वारा
February 20, 2013

इन भावों से आगे भी विस्तृत व्योम खुला है शुभ्र ज्योत्सना की निर्झरिणी का नाद सुना है भ्रमर गुंजन मे भी क्या स्थिरता होती ? कुसूमों की ही सुगंध है घाव सभी भरती …………………… शुभ प्रभात ……जय भारत

    roshni के द्वारा
    February 20, 2013

    Asivinikumar जी नमस्कार शुभ प्रभात आपके विचारों के लिए हार्दिक आभार .. कविता की सुंदर पंक्तियाँ .. यु कहे बहुत सुंदर आभार

    Greta के द्वारा
    July 12, 2016

    Celso Azevedo • 26 de Novembro de 2009 às 00:46Depois de um ano ou renova ou o alojamento expira. Nesse momento pode passar o seu site para outro alojamento se quepCr.eumsrimintos,Celso Azevedo

krishnashri के द्वारा
February 19, 2013

आदरणीय महोदया , सादर , क्याखुब विरोधाभास है काश के मुझको खुद को ही बहलाना आ जाता तो आस की हर एक जोत बुझा देती मैं —–

    roshni के द्वारा
    February 20, 2013

    Respected Krishnshri ji खुद को बहलाना मुश्किल होता है जबकि दूसरों को हम कितनी आसानी से अक्सर समझा देते है .. इसी एहसास को शब्दों में बयाँ किया है तारीफ हेतु आभार

    Mildred के द्वारा
    July 12, 2016

    I’m so glad I found my souliton online.

yogi sarswat के द्वारा
February 19, 2013

आंखे बंद करने से नींद अगर आ जाती तो, मूंद के पलके खुद को सुला देती मै….. अश्कों को अगर समझने वाला होता वो, तो रोते रोते भी मुस्कुरा देती मै क्या बात है ! बहुत सुन्दर रचना रौशनी जी ! मुझे ज्यादा कहना नहीं आता लेकिन कम शब्दों में ही कहूँगा , बहुत सुन्दर !

    jlsingh के द्वारा
    February 20, 2013

    मैं भी यही पर अपनी सहमती ब्यक्त करता हूँ!

    roshni के द्वारा
    February 20, 2013

    नमस्कार योगी जी शब्द मायने नहीं रखते बस भावना ही मायने रखती है .. आपको रचना अच्छी लगी आभार

    roshni के द्वारा
    February 20, 2013

    JL सिंह जी रचना पसंद करने हेतु धन्यवाद आभार

    Donyell के द्वारा
    July 12, 2016

    Sono d’accordo con Clauderouges. La tecnologia evolve, evolverà anche l’eink e si riuscirà a farne una versione a colori che supporti bene la mutÃamediililt . A quel punto sarà l’Lcd ad essere soppiantato, i tablet si produrranno con uno schermo di questo tipo e non ci sarà bisogno di due device, uno per leggere libri e l’altro per tutto il resto.

आर.एन. शाही के द्वारा
February 19, 2013

खुद को इस तरह भी क्या बहलाना रौशनी जी, जो आस की जोत ही बुझ जाय ! बहलाया तो जाता है आशा की बुझती चिंगारियों को हवा देकर और प्रज्वलित करने के लिये भई । सुना नहीं है क्या कभी, ‘तू आश का दीपक जला, के तेरा भगवान करेगा भला, अंधेरा सारा मिट जाएगा …’। मुक़द्दस ‘रौशनी’ के लबों पे अंधेरों की बातें नहीं जँचतीं । चेहरे पर वो मुस्कुराहट झलके, के लुढ़कते अश्क़ कपोलों के बीच ही कहीं काफ़ूर हो जायँ । तस्वीर के कंट्रास्ट के साथ मैच करती बेहतरीन पंक्तियों को देखकर ऐसा आभास हो रहा है, जैसे मेरी कोई फ़रमाइश अधूरी थी, जो पूरी हुई । अग़रचे मेरी खामखयाली है, तो भी मुझे इस भरम के साथ ही जीने दो । (इस शायराना अंदाज़ को बहारों के मौसम का नज़राना समझियेगा, कोई बद्तमीज़ी नहीं ।) बधाइयाँ और ॠतुराज वसन्त की शुभकामनाएँ !!

    आर.एन. शाही के द्वारा
    February 19, 2013

    ‘मुक़द्दस’ की बजाय मुझे ‘मुज़स्सिम’ लिखना था । खैर, कोई खास फ़र्क़ नहीं होना चाहिये दोनों में । दर-अस्ल जब कव्वा मयूर की ज़मात में बैठने हेतु उसके कहीं गिरे पड़े पंख उठाकर अपनी पूँछ में खोंस लेता है, तब उससे ऐसी ग़लतियाँ अक्सर होती ही रहती हैं । उर्दू-फ़ारसी के ज्ञान के मामले में इस खालिस कव्वे को भी यक़ायक़ मयूर बनने का शौक़ चर्रा गया है, लिहाज़ा मुआफ़ करना मोहतरमा रौशनी जी !

    roshni के द्वारा
    February 20, 2013

    Respected शाही जी नमस्कार तारीफ के लिए धन्यवाद .. शायद ये अँधेरे ही होते है जो रौशनी की तलाश के लिए प्रेरणा देते है … इस लिए अँधेरे भी उतने ही जरुरी है जितनी रौशनी … आपकी तारीफ के लिए एक बार फिर से बहुत बहुत शुक्रिया …और मुझे भी इतनी उर्दू आती नहीं की मुकदस और मुज़स्सिम में अंतर कर पाती.. और माफ़ी जैसे शब्द इस्तेमाल करके हमे शर्मिंदा न करे .. आप हमारे आदरनिये है .. आभार

    Adelphia के द्वारा
    July 12, 2016

    I agree, in fact I rarely tune in, I missed the &#;2n681ew’ Martha H-F. Must be a big change, Martha had a bit of a motor-mouth herself any time she was defending her Liberals. Perhaps she’s in love.

nishamittal के द्वारा
February 19, 2013

वाह रौशनी एक लंबे अरसे बाद तुम्हारी सुन्दर रचना मिली स्वागत .

    roshni के द्वारा
    February 20, 2013

    धन्यवाद निशा जी ऐसे ही अपना साथ देते रहिएगा आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 19, 2013

आदरणीया रोशनी जी सादर सुन्दर भाव युक्त रचना. बधाई.

    roshni के द्वारा
    February 20, 2013

    आदरनिये कुशवाहा जी, ऐसे ही अपना आशीर्वाद बांये रखियेगा आभार


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