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एक फैसला

पोस्टेड ओन: 14 Jul, 2012 Uncategorized में

images (1)

अगर मैं फर्क कर पाता, हकीकत और फसानों में

तो मेरा नाम न आता, पागल और दीवानों में….

वो सच बोला कभी न, और मैंने कुछ झूठ न समझा,

हुआ न फर्क कभी मुझसे सच और बहानों में …..

मोहब्बत में खुदा को ढूंढता हूँ, रब को इंसानों में,

वही करता हूँ जो लिखा है कुराणों में पुराणों में…..

जब जिस्म नीला हो गया, तो एहसास हुआ तब ही,

जहर दिल में भरा था और थी मिठास जुबानों में…

बहुत चाहता है पर, रुलाता है मुझे बात बात पर,

सोचता हूँ वो मेरे अपनों में है या बेगानों में…..

मचलती, उठती-गिरती लहरों में थी कशिश कोई

किया जो फैसला रौशनी तूने डूबने का तूफानों में…..

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogeshkumar के द्वारा
July 27, 2012

आरजू हमने की तो हम पाए , रौशनी साथ लायी थी साये; साये गहरे थे रौशनी हलकी; हम न समझे थे बात इतनी सी ख्वाब सीसे के दुनिया पत्थर की ….

ajaykr के द्वारा
July 24, 2012

आदरणीय रौशनी जी, नाम पागल ,और दीवानों में आना बहुत जरूरी हैं ,,यदि कुछ हांसिल करना हैं तो |आप की कवितायें ,इसी तरह यदि आप लिखती गयीं तो वाह दिन दूर नही जब आप करोड़ो दिलो में रौशनी पहुच्येंगी |आपकी हर उम्दा रचना के लिए आभार ,एकदम मन खुश हों जाता हैं | मुझे अफ़सोस इस बात का हैं की मेरे ब्लॉग पर अभी तक रौशनी क्यूँ नही पड़ी |

    roshni के द्वारा
    July 27, 2012

    तारीफे के लिए बहुत बहुत शुक्रिया अजय जी आभार

Manoj Singh के द्वारा
July 23, 2012

जब अपने बेगाने होते हैं तो एहसास बहुत कुछ होता है…..

    roshni के द्वारा
    July 27, 2012

    आभार मनोज जी

    Luciana के द्वारा
    November 28, 2013

    Just the type of inhigst we need to fire up the debate.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 20, 2012

आदरणीया रोशनी जी, सादर अभिवादन.  सुन्दर भाव बधाई. मेरे स्वास्थ्य के प्रति चिंता व्यक्त करने हेतु आभार. 

    roshni के द्वारा
    July 21, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी नमस्कार रचना को पसंद करने के लिए आभार

vinay sharma के द्वारा
July 18, 2012

बहुत ही सुंदर रचना …..लिखते रहिये..

    roshni के द्वारा
    July 21, 2012

    विनय जी धन्यवाद

Punita Jain के द्वारा
July 17, 2012

रोशनी जी, सुन्दर शब्दों में बुनी हुई भावपूर्ण रचना | वो सच बोला कभी न, और मैंने कुछ झूठ न समझा, हुआ न फर्क कभी मुझसे सच और बहानों में ….. मोहब्बत में खुदा को ढूंढता हूँ, रब को इंसानों में, वही करता हूँ जो लिखा है कुराणों में पुराणों में——बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

    roshni के द्वारा
    July 17, 2012

    पुनीता जी, इसी तरह अपना प्रोत्साहन देते रहिये .. रचना को पसंद करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया .. आभार

sinsera के द्वारा
July 16, 2012

मन के अंतर्द्वंद को आपने बड़ी खूबसूरती से जुबान दी है ..रोशनी जी… तुम सुनो या न सुनो हमको था कहना ,कह दिया.. रह गयी इज्ज़त तुम्हारी , काम मेरा हो गया…

    roshni के द्वारा
    July 17, 2012

    सिंसेरा जी नमस्कार तारीफ के लिए शुक्रिया … तुमने सुना भी मगर इस कदर मगरूर हो गए, पहले हम से अब इस दिल से भी दूर हो गए आभार

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
July 16, 2012

रौशनी जी प्रतिक्रियाएं माडरेशन में जा रही हैं क्या ..गायब हैं या स्पैम में जब जिस्म नीला हो गया, तो एहसास हुआ तब ही, जहर दिल में भरा था और थी मिठास जुबानों में… बहुत चाहता है पर, रुलाता है मुझे बात बात पर, सोचता हूँ वो मेरे अपनों में है या बेगानों में….. रौशनी जी जिन्दगी के पहलू.. आभास और अनुभव को अच्छा व्यक्त कर सकी ये रचना …गजब के भाव ,.ऐसा ही होता है जब हम जागते हैं तब तक फिर अँधियारा शुरू… भ्रमर ५

    roshni के द्वारा
    July 17, 2012

    शुक्ला जी आजकल कुछ प्रतिक्रिया अपने आप ही spam में चली जाती है … पता नहीं क्यों …

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
July 16, 2012

जब जिस्म नीला हो गया, तो एहसास हुआ तब ही, जहर दिल में भरा था और थी मिठास जुबानों में… बहुत चाहता है पर, रुलाता है मुझे बात बात पर, सोचता हूँ वो मेरे अपनों में है या बेगानों में….. रौशनी जी जिन्दगी के पहलू.. आभास और अनुभव को अच्छा व्यक्त कर सकी ये रचना …गजब के भाव ,.ऐसा ही होता है जब हम जागते हैं तब तक फिर अँधियारा शुरू… भ्रमर ५

    roshni के द्वारा
    July 17, 2012

    शुक्ला जी नमस्कार अक्सर हम समझने में देर कर देते है सामने वाला तो जैसा होता है वैसे ही करता है … खैर यही जीवन है यु भी जब जागो तबी सवेरा …. रचना की तारीफ के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
July 16, 2012

बहुत ही उम्दा नज़्म है आपकी मेरे लफ्ज़ शायद वह बात न कह पायें जिसका की आप और आपकी नज़्म हक़दार है..

    roshni के द्वारा
    July 17, 2012

    अनिल कुमार जी इतना कहना ही मेरे लिए बहुत बड़ी बात है …. आपकी खामोश सी तारीफ के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार

Chandan rai के द्वारा
July 16, 2012

रौशनी जी , मचलती, उठती-गिरती लहरों में थी कशिश कोई किया जो फैसला रौशनी तूने डूबने का तूफानों में….. आपके हौसले की कहानी और बुलंदी बहुत प्रेरणा दायक है , प्रेरक रचना !

    roshni के द्वारा
    July 17, 2012

    चन्दन जी अक्सर मंजिलों तक जाने के लिए डूबना भी पड़ता है, और फिर चाहे डूब जाये या पार निकला जाये तारीफ के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
July 16, 2012

बहुत सुन्दर रचना .बधाई! रोशनी जी.

    roshni के द्वारा
    July 17, 2012

    धन्यवाद भूपेश जी आभार

yogi sarswat के द्वारा
July 16, 2012

जब जिस्म नीला हो गया, तो एहसास हुआ तब ही, जहर दिल में भरा था और थी मिठास जुबानों में… क्या बात है ! बहुत खूब रोशनी जी ! सुन्दर अल्फाज़

    roshni के द्वारा
    July 17, 2012

    योगी जी नमस्कार thank for ur precious comment… thanks a lot

Mohinder Kumar के द्वारा
July 16, 2012

रोशनी जी, मुहब्बत में शिकायत का लुत्फ़ लिये नजम… लिखते रहिये.. मुहब्बत और प्यार में तो शिकायत करना भी मुश्किल होता है… किसी ने क्या खूब कहा है.. “वो पुर्शिशे गम को आये हैं… कुछ कह न सकूं चुप रह न सकूं खामोश रहूं तो मुश्किल है…. कह दूं तो शिकायत होती है.. जीने के लिये इस दुनिया में गम की भी जरूरत होती है

    roshni के द्वारा
    July 17, 2012

    Mohinder कुमार जी नमस्कार l हम आह भी भरे तो हो जाते है बदनाम वोह क़त्ल भी करे तो चर्चा नहीं होता … यही तो मोह्बात है …. बहुत सुंदर शेर कहा आपने खामोश रहूं तो मुश्किल है…. कह दूं तो शिकायत होती है… रचना की तारीफ के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

rekhafbd के द्वारा
July 16, 2012

रौशनी जी मोहब्बत में खुदा को ढूंढता हूँ, रब को इंसानों में, वही करता हूँ जो लिखा है कुराणों में पुराणों मे,अति सुंदर अभिव्यक्ति ,बधाई

    roshni के द्वारा
    July 16, 2012

    तारीफ के लिए शुर्किया रेखा जी आभार

R K KHURANA के द्वारा
July 16, 2012

प्रिय रौशनी जी, जब जिस्म नीला हो गया, तो एहसास हुआ तब ही, जहर दिल में भरा था और थी मिठास जुबानों में… बहुत सुंदर ! आपकी कविता का एक एक शब्द काबिले तारीफ है ! राम कृष्ण खुराना

    roshni के द्वारा
    July 16, 2012

    आदरनिये खुराना जी नमस्कार सब आप बड़ों का आशीर्वाद है जो सबको रचना पसंद आती है … तारीफ के लिए आभार

Alka Gupta के द्वारा
July 15, 2012

बहुत ही सुन्दर भावाभिव्यक्ति रोशनी जी

    roshni के द्वारा
    July 16, 2012

    अलका जी प्रशंशा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

akraktale के द्वारा
July 15, 2012

रौशनी जी सादर नमस्कार, जब जिस्म नीला हो गया, तो एहसास हुआ तब ही, जहर दिल में भरा था और थी मिठास जुबानों में… वाह! बहुत खूब. सुन्दर रचना. बधाई.

    roshni के द्वारा
    July 15, 2012

    आदरणीय आकाश जी नमस्कार रचना को पसंद करने के लिए और तारीफ के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

div81 के द्वारा
July 15, 2012

सुन्दर भाव से सजी उम्दा रचना जब जिस्म नीला हो गया, तो एहसास हुआ तब ही, जहर दिल में भरा था और थी मिठास जुबानों में……………… बधाई आपको

    roshni के द्वारा
    July 15, 2012

    दिव जी रचना को पसंद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

dineshaastik के द्वारा
July 15, 2012

मोहब्बत में खुदा को ढूंढता हूँ, रब को इंसानो में… जहर दिल में भरा था और थी मिठास जुबानों में… बहुत चाहता है पर, रुलाता है मुझे बात बात पर, सोचता हूँ वो मेरे अपनों में है या बेगानों में….. रोशनी जी बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ….. कृपया इसे भी पढ़ेः- http://dineshaastik.jagranjunction.com/2012/07/13/हम-ऐसे-खुदा-को-क्यों-मानें/

    roshni के द्वारा
    July 15, 2012

    दिनेश जी नमस्कार प्रशंसा के लिए बहतु बहतु शुक्रिया और आपके नएआलेख की जानकारी के लिए भी आभार

shashibhushan1959 के द्वारा
July 15, 2012

आदरणीय रौशनी जी, सादर ! भावनाओं की सशक्त अविभिव्यक्ति ! जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों को आपने शब्द दिए ! बहुत सुन्दर ! सादर !

    roshni के द्वारा
    July 15, 2012

    शशि जी नमस्कार तारीफ के लिए तहे दिल से शुक्रिया आभार

rameshbajpai के द्वारा
July 15, 2012

प्रिय रौशनी जी लम्बे अन्तराल के बाद आपकी पोस्ट पर आना हुआ है | वही करता हूँ जो लिखा है कुराणों में पुराणों में…..भावो की अनंत गहराईयों से बहे ये सुरीले अंदाज …… हर शब्द अभिव्यक्ति की कसौटी के मानको को पूर्ण करता …. बधाई शुभकामाए ,आशीर्वाद | संत मीरा बाई पर रचना बहुत जल्दी आपके लिय |

    roshni के द्वारा
    July 15, 2012

    Respected बाजपाई जी नमस्कार आप काफी दिनों बाद आये … आपका कमेन्ट पढ़ कर बहुत खुशी हुई … और मेरे लिए मीरा बाई की रचना वाह, जानकर और भी अच्छा लगा धन्यवाद , जल्दी पोस्ट कीजियेगा मुझे मीरा बाई की रचना का हमेशा इंतज़ार रहता है .. आभार

nishamittal के द्वारा
July 15, 2012

सुन्दर प्रस्तुति रौशनी सदा की भांति. जब जिस्म नीला हो गया, तो एहसास हुआ तब ही, जहर दिल में भरा था और थी मिठास जुबानों में…

    roshni के द्वारा
    July 15, 2012

    निशा जी नमस्कार , धन्यवाद तारीफ के लिए आभार

jlsingh के द्वारा
July 15, 2012

जहर दिल में भरा था और थी मिठास जुबानों में… कहूं क्या और मैं अब, न बची मिठास जुबानों में… मचलती, उठती-गिरती लहरों में, थी कशिश कोई किया जो फैसला ‘रौशनी’ तूने डूबने का तूफानों में….. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत चुलबुलापन गया, बचपन गया, रह गयी केवल खेद! अगर किसी बात का बुरा लगे तो बता दीजिये … सभी प्रशंशा के शब्द हैं … भावना को समझेंगी न!

    roshni के द्वारा
    July 15, 2012

    जल सिंह जी नमस्कार आपके प्रशंसा की शब्द सर आँखों पर .. हम उसके भाव समझ गए है ….. रचना के moral को व्यक्त करने के लिए बहुत बहुत आभार धन्यवाद सहित

ashishgonda के द्वारा
July 14, 2012

रौशनी जी! तारीफ़ के लिए शब्द नहीं मिल रहें हैं कृपया क्षमा करें……. http://www.ashishgonda.jagranjunction.com/ रामसेतु तोडना कितना उचित कितना अनुचित

    roshni के द्वारा
    July 15, 2012

    आशीष जी तारीफ भी कर दी और कह भी दिया की शब्द नहीं मिल रहे … धन्यवाद आभार

ANAND PRAVIN के द्वारा
July 14, 2012

रौशनी जी, नमस्कार पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ क्यूंकि पिछली बार जब आपने मंच से विराम लिया था तभी मेरा आगमन हुआ था तब मैंने आपके तारों का कारोबार पढ़ा था और आज आपका एक फैसला पढ़ रहा हूँ …………..लाजवाब लेखनी ………..सुन्दर भाव बहुत ही गहरी रचना ………….आपको बधाई मेरी तरफ से

    roshni के द्वारा
    July 15, 2012

    आनंद जी नमस्कार आप पहली बार आये और आशा है की अगली बार भी ब्लॉग पर आयेगे … और अपना प्रोत्साहन देगे तारीफ के लिए शुक्रिया आभार

allrounder के द्वारा
July 14, 2012

रौशनी जी, नमस्कार आपकी इस प्यारी सी पेशकश के बारे मैं क्या लिखूं मैं ? जहर दिलों मैं था और मिठास थी, जुबानों मैं ! अद्वितीय ! प्रसंशनीय !

    roshni के द्वारा
    July 15, 2012

    सचिन जी नमस्कार कुछ न लिख कर भी इतनी तारीफ .. धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
July 14, 2012

प्यारी सी ग़ज़ल है

    roshni के द्वारा
    July 15, 2012

    यमुना जी धन्यवाद




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