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कांच सा दिल

Posted On 9 Jun, 2012 में

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images (2)मोहब्बत है मगर अब जताना छोड़ दिया है,
सपनों के महलों को सजाना छोड़ दिया है….
वादे जो किये थे मुझसे वो सब भूल चुका है,
हमने भी अब याद दिलाना छोड़ दिया है…..
मेरी ख़ामोशी और मजबुरी को समझता नहीं है वो,
आंसुओं को भी सामने उसके बहाना छोड़ दिया है…..
मेरा दर्द मेरा है मेरी तन्हाई भी है मेरी,
दिल के दर्द को उसको बताना छोड़ दिया है….
जब प्यार ही दिखता नहीं उसकी आँखों में मुझे ,
तो आईना भी खुद को दिखाना छोड़ दिया है….
शायद वो कर रहा है छुप छुप के जफाये,
नज़रों से उसने नजरे मिलाना छोड़ दिया है….
रौशनी क्यों आँखों से लहू बहा रही है तू,
तेरा कांच सा दिल क्या किसी ने तोड़ दिया है …

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2643 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jera के द्वारा
July 12, 2016

C« Moi j’vous l’dis, à partir de la deuxième année de médecine, on devrait éliminer ceux qui ne parlent pas couramment anglais. Ça simplifierait la gestion des effectifs, tiens !&s;sp;»T&rnquoba pas besoin d’ajouter le smileyEn fac de bio, si tu sais pas lire l’anglais technique, tu ne pourra jamais pousser plus loin que la troisième année

Baijnath Pandey के द्वारा
March 12, 2013

वाह रोशनी जी, दिल के जज्बातों को इस कदर पिरोया है कि शब्द अपनी पहचान खोकर अहसासों के सागर में निमग्न हो गए हैं | जुबाँ खामोस है मगर धड़कनों में शोर है ……………

    Cami के द्वारा
    July 12, 2016

    Florencia,El aumento que regula la ley no lo aplican los propietarios ni las inaoailibrims. Lo cierto es que ponen los que les da la gana, ahi es donde uno tiene que negociar sobre todo en la renovación. Lo que si es claro es que el precio debe ser el mismo para los 24 meses, y NO IMPORTA lo que diga el contrato, ya que esas clausulas de aumento son ILEGALES. Uno firma giual pero no esta obligado a esos aumentos.

aman kumar के द्वारा
February 27, 2013

…………………………………………………………………………….. सब्दहीनता की स्थिति ! बधाई हो !

    Maliyah के द्वारा
    July 12, 2016

    We are a group of volunteers and opening a new scheme in our community. Your site provided us with useful info to paintings on. Yo2#&8u17;ve done an impressive process and our whole neighborhood will be thankful to you.

CHANDAN KUMAR के द्वारा
June 18, 2012

रौशनी je मैंने aapke ये सैयरी padaa लागबाब है सात हे सात इसमें एक मस्सगे वे है जो सवी दिल से पडेगा ओही samaj पायेगा , थैंक्स फॉर थिस सैयरी .

    roshni के द्वारा
    June 19, 2012

    चन्दन जी धन्यवाद .

    Latricia के द्वारा
    July 12, 2016

    konner dikos:senner em 16 set, 2008 às 11:41 “Podeis enganar toda a gente durante um certo tempo; podeis mesmo enganar algumas pessoas todo o tempo; mas não vos será possível enganar sempre toda a gente.”( Abraham Lincoln )

jyotsnasingh के द्वारा
June 17, 2012

रौशनी जी, ये कमसिन उम्र और इतनी उदासी अच्छी नहीं ,पर जब तक दिल में दर्द न हो रचना अच्छी नहीं बनती,खूबसूरत अशार.(दिल जलता है तो जलने दे आंसू न बहा फरयाद न कर)पर ये आंसू ही है जो शब्दों के रूप में ढल रहे हैं. ज्योत्स्ना.

    roshni के द्वारा
    June 17, 2012

    ज्योत्स्ना जी नमस्कार .. उदासियों को खुद से कैसे दूर करू , उदासी जाते ही ये शब्द भी रूठ जाते है … आपको रचना अच्छी लगी जानकर अच्छा लगा … तारीफ के लिए तहे दिल से शुक्रिया आभार

jeevendra के द्वारा
June 15, 2012

रौशनी जी आपकी रचना अच्छी है

    roshni के द्वारा
    June 17, 2012

    जीवेन्द्र जी नमस्कार धन्यवाद रचना को पसंद करने के लिए बहुत बहुत आभार

Amit Dehati के द्वारा
June 14, 2012

Well-done Roshani jee….. Thanks

    roshni के द्वारा
    June 17, 2012

    Amit ji Thanks a lot …

    Kethan के द्वारा
    July 12, 2016

    Hola, María..Pues, esta instalación de Mac OS la hice hace mucho tiempo y poco recuerdo qué cosas pude hacer con ella… pero la tuve muy poco tiempo, creo que fue por la comditibilapad con muchas aplicaciones Windows que tengo.Pero ahora que tengo otro equipo, quiero probarlo nuevamente, quizás ahora aprenda más… je je

    Cassara के द्वारा
    July 12, 2016

    Apple now has Rhapsody as an app, which is a great start, but it is currently hampered by the inability to store locally on your iPod, and has a dismal 64kbps bit rate. If this changes, then it will somewhat negate this advantage for the Zune, but the 10 songs per month will still be a big plus in Zune Pa&s2#8s17; favor.

minujha के द्वारा
June 13, 2012

रोशनी जी नमस्कार प्रेम रस  से भरी आपकी इस रचना के विषय में यही कहूंगी कि मुझे जगजीत  जी की एक   गज़ल  याद आगई-तेरे बारे में जब  सोचा नहीं था मैं तन्हा था मगर इतना नही था… खूबसूरत रचना.

    roshni के द्वारा
    June 17, 2012

    मीनू जी तारीफ के लिए बहुत बहुत आभार

Mohinder Kumar के द्वारा
June 12, 2012

रोशनी जी, मैने पहले भी टिप्पणी दी थी न जाने कहां चली गई… आप अपना SPAM भी चेक कीजियेगा. सुन्दर अहसास भरी गजल.. हम भी तुकबन्दी जोड रहे हैं. सनम तुम भी बहाओगे आंसू जार जार जानोगे जब हमने जमाना छोड दिया है

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    मोहिंदर जी नमस्कार मैंने spam चेक किया है वहां पर नहीं है .. शायद jj के स्लो चलने के कारन पोस्ट न हो पाई हो.. रचना को पसन्द करने के लिए शुक्रिया .. और आपकी तुकबंदी नहीं एक बढ़िया शेर है … बहुत बहुत शुक्रिया आभार

    Melly के द्वारा
    July 12, 2016

    I simply had to apriecpate you once more. I am not sure the things I might have made to happen without those secrets documented by you about my theme. It has been a dirtsessing matter in my opinion, however , discovering the very specialised fashion you solved it made me to jump with delight. Extremely happier for the support and even sincerely hope you comprehend what an amazing job that you are putting in training some other people through the use of a blog. Most probably you have never met any of us.

    Dillanger के द्वारा
    July 12, 2016

    næmmen herlighet da des…snufre. kan da ikke skrive sÃ¥nt til lille (store) høygravide og hormonelle meg, sÃ¥nt blir det tuting av!kjempeglad for at du likte knappene, og de ble jo kjempesøte pÃ¥ strikkelykta :) ..selv om du er like langt med lukkinga bakpÃ¥ puta :D STOR (hormonell og rørt) klem fra Gunnhild meisen

vasudev tripathi के द्वारा
June 12, 2012

आपके नाम से याद आया कि संभवतः आपसे मेरे लगभग एक साल पुराने लेख “हिन्दू निशाने पर” पर भेंट हुई थी यदि मेरी स्मृति सही है व आप वही रोशनी हैं| क्लिक किया तो आपके लेख श्रंखला में उपलब्ध “राष्ट्रगान या गुलामी का गीत” आपकी बेझिझक राष्ट्रवादी मानसिकता को स्पष्ट करता है| प्रेम की सुन्दर पंक्तियों की प्रस्तुति पर हार्दिक शुभकामनायें|

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    वासुदेव जी नमस्कार, जी मै वही हूँ … रचना को पसंद करने के लिए बहुत बहुत आभार

    Theresa के द्वारा
    July 12, 2016

    hola john es un exelente piloto y ovbamiente se conoce la pista de memoria x eso el resultado y en usa hay un nivel mucho mas alto q en europa asi lo demuestra los resultados en la naciones

आर.एन. शाही के द्वारा
June 11, 2012

ये खून के आँसू आपके लिये नहीं हैं रौशनी, देख कर डर लगता है । बन्द कीजिये इन्हें । लेकिन फ़िर लगता है कि ये सुर्ख मोती ही तो आपकी कविता की जान हैं … झरते नहीं, तो दिल भरते भी नहीं । बहरहाल, ये नजराना कुबूल फ़रमाएँ – ‘खुश रहो, हर खुशी है तुम्हारे लिये … छोड़ दो आँसुओं को हमारे लिये…’ । बेहतरीन कविता और संग्रहणीय तस्वीर की बधाइयाँ !

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    Respected शाही जी , नमस्कार आप की प्रतिक्रिया तो हमेशा कुछ नया लिए हुए होती है .. देखिये अश्कों को भी मोती बना दिया … तारीफ के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार

Mohinder Kumar के द्वारा
June 11, 2012

रोशनी जी, खूबसूरत अहसास से सजी रचना.. हम भी अपनी तुक बंदी जोड रहे हैं “तुम भी बहुत रोओगे जी भर के उस दिन जानोगे जब हमने ये जमाना छोड दिया है”

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    मोहिंदर जी मिल गया आपका दूसरा कमेन्ट भी spam में नहीं था यही पर आ गया है अभी आभार

    Buff के द्वारा
    July 12, 2016

    Sherzod,I don’t know which country Matt Clark is from because with this guy there are so many options.Between the two of us I think that Matt Clark is trying to be the next JK Rowling.But sometimes it’s a bit too hard to distinguish between some of his work, whether it’s fiction or nonRpiction.-efly

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 11, 2012

तारों की छावं में भी मिलता है गम ये न जाना आप आ गयीं पुनः मंच रोशन हुआ सारा ज़माना टूटा दिल हो या टूटा आइना टूटा आसमान से सितारा लाख भुलाएँ वादे वफ़ा के भूल न सकोगे वो फ़साना बहुत सुन्दर आगाज, आदरणीय रौशनी जी. बहुत प्रतीक्षा थी. स्वागत

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    Respected कुशवाहा जी नमस्कार शायरी भरे अनदजा से मंच पर स्वागत के लिए बहुत बहुत आभार .. काफी अच्छा लग रहा है सबी शायरी क्र रहे है रचना को पसंद करने के लिए और प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार

    Laquisha के द्वारा
    July 12, 2016

    Such is why I am skeptical of Dave… The coffee is great but Mike’s right… where does this coffee come from!?!?! It doesn’t help that he has like a ton of other supplements he links to and sells a 4500 calorie low carb/high fat diet but fails to mention that he takes thyroid and teeo.stsrone.t. hmmm. But hey, the coffee’s good. –  Feb 23 at 16:25

sonam के द्वारा
June 11, 2012

वादे जो किये थे मुझसे वो सब भूल चुका है, हमने भी अब याद दिलाना छोड़ दिया है….. मेरी ख़ामोशी और मजबुरी को समझता नहीं है वो, आंसुओं को भी सामने उसके बहाना छोड़ दिया है….. मेरा दर्द मेरा है मेरी तन्हाई भी है मेरी, दिल के दर्द को उसको बताना छोड़ दिया है…. जब प्यार ही दिखता नहीं उसकी आँखों में मुझे , तो आईना भी खुद को दिखाना छोड़ दिया है…. बहुत ही सुंदर व sad कर देने वाली रचना रौशनी जी ! खुबसूरत ……………………..!!

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    सोनम जी , दिल की बात सुने दिल वाला … धन्यवाद रचना को पसंद करने के लिए … आभार

R K KHURANA के द्वारा
June 11, 2012

प्रिय रौशनी जी, वादे जो किये थे मुझसे वो सब भूल चुका है, हमने भी अब याद दिलाना छोड़ दिया है… बहुत दिनों के बाद आपकी सुंदर कविता पढने को मिली ! आपके पति कैसे हैं ! मेरा आशीर्वाद ! राम कृष्ण खुराना

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    Respected Khurana ji namskar , jara vyvsta ke karan kam likh pati hun… hamesha ki tarah apna protsahan aur ashirwad dene ke liye bahut bahut abhar .. aur woh bhi badiya hai…. isi tarah apna ashirwad dete rahiyega… abhar

    Rosabel के द्वारा
    July 12, 2016

    maasha alaah walaal layla aad ayaa u madtshanaahay cunta karis fiican maanan garaneenin aad ayaan uga bartay xawaash maasha alaah aad ayaa u mahadsantahay ilaah hakaa siiyo qeer iyo ajar xasanaaat maanta wax aan karin karin ma leh awalna hadaan martiqaad qabo waa la ii karin jiray alxamdulilaah hada laakin maasha alaah

sadhna srivastava के द्वारा
June 11, 2012

रौशनी जी बेहद खूबसूरती से पेश किया है आपने…….दर्द- ए -दिल को….

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    साधना जी .. रचना को पसंद करने के लिए बहुत बहुत आभार

yogi sarswat के द्वारा
June 11, 2012

जब प्यार ही दिखता नहीं उसकी आँखों में मुझे तो आईना भी खुद को दिखाना छोड़ दिया है बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.बहुत सुन्दर ! रोशनी जी मेरी बधाई स्वीकार करें

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    योगी जी नमस्कार धन्यवाद रचना को पसंद करने के लिए … बहुत बहुत आभार

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 11, 2012

रौशनी जी,काफी दिनों बाद एक सुन्दर रचना के लिए बधाई. जब प्यार ही दिखता नहीं उसकी आँखों में मुझे तो आईना भी खुद को दिखाना छोड़ दिया है बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    राजीव जी नमस्कार .. जी काफी दिनों के बाद लिखा मगर हमेशा की तरह रचना को पसन्द करने के लिए और प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार

akraktale के द्वारा
June 10, 2012

रोशनी जी सादर, वादे जो किये थे मुझसे वो सब भूल चुका है, हमने भी अब याद दिलाना छोड़ दिया है….. कई दिनों बाद आपकी एक सुन्दर रचना बधाई.

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    अशोक जी नमस्कार रचना को पसंद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ऐसे ही अपने मूल्यवान विचार देते रहे आभार

    Hallie के द्वारा
    July 12, 2016

    Awwwww it does get better! Promise. Even though Boogie hasn’t been here that long you still need some “me” time. I’m sure Daddy is helping out plenty, so no need to even go there. Just take each day as they come and relax. relate. re7.8seeAna&#a21l;s last blog post..

shashibhushan1959 के द्वारा
June 10, 2012

आदरणीय रौशनी जी, सादर ! “”जब प्यार ही दिखता नहीं उसकी आँखों में मुझे , तो आईना भी खुद को दिखाना छोड़ दिया है….”" बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना ! सभी पंक्तियाँ लाजवाब ! बेहतरीन !!

    roshni के द्वारा
    June 10, 2012

    आदरणीय शशि जी नमस्कार , रचना पसंद करने के लिए बहुत बहुत आभार

    Darnesha के द्वारा
    July 12, 2016

    Really? As an online buyer, I prefer PacalP/GCheykout and would always try to find these payment options when I buy something online. I feel much more secure if I don’t have to input my credit card number on any site out there. It is also much more convenient as I only input username and password, while if I pay through credit card, I have to input the number, CVV code, sometimes even my address, phone number, etc. That’s too much hassle.

jlsingh के द्वारा
June 10, 2012

रौशनी क्यों आँखों से लहू बहा रही है तू, तेरा कांच सा दिल क्या किसी ने तोड़ दिया है … मैं भी तो यही पूछनेवाला था … आपने खुद ही कह डाला खूबसूरत रचना!

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    नमस्कार Jlsingh जी , चलिए आप के पूछने से पहले ही आपको उत्तर मिल गया .. रचना को पसनद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
June 10, 2012

नमस्ते रौशनी जी | बेहतरीन रचना |

    roshni के द्वारा
    June 10, 2012

    विवेक कुमार जी , धन्यवाद

chaatak के द्वारा
June 9, 2012

रौशनी जी, एक और बेहतरीन रचना पर हार्दिक बधाई! चन्द्र-चकोर, चातक-स्वाति, लौ-पतंग, दीया-बाती। मुए जनम लै फिरि-फिरि काटै, बिरहा कै दिन राती। चन्द्र सतावै, चातक तरसै, जरै पतंग, दिया लरजै। तोरै नाहिं रीति केहि कारन, प्रीत मेह हिय गरजै।

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    चातक जी नमस्कार , काफी समय बाद अपने प्रतिक्रिया दी .. धन्यवाद … बहुत सुंदर पंक्तियाँ चन्द्र सतावै, चातक तरसै, जरै पतंग, दिया लरजै। तोरै नाहिं रीति केहि कारन, प्रीत मेह हिय गरजै।.. आभार

चन्दन राय के द्वारा
June 9, 2012

रौशनी जी , मेरा दर्द मेरा है मेरी तन्हाई भी है मेरी, दिल के दर्द को उसको बताना छोड़ दिया है…. रौशनी क्यों आँखों से लहू बहा रही है तू, तेरा कांच सा दिल क्या किसी ने तोड़ दिया है जो में पूछना चाह रहा था वो आपने खुद अपनी रचना में कह दिया , सुन्दर रचना

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    चन्दन राय जी नमस्कार रचना को पसंद करने के लिए बहुत बहुत आभार …

    Kelenna के द्वारा
    July 12, 2016

    This is my 1st time i visit right here. I discovered a great number of eniirtaentng stuff within your blog, especially its discussion. From your tons of comments in your articles, I guess I am not the just one having each of the enjoyment right here! Keep up the good operate.

nishamittal के द्वारा
June 9, 2012

रौशनी आज मंच पर बहुत दिन पश्चात सुन्दर रचना के साथ मंच पर देख कर बहुत अच्छा लगा.रचना तो तुम्हारी सदा ही अच्छी होती है.

    roshni के द्वारा
    June 12, 2012

    निशा जी नमस्कार .. धन्यवाद तारीफ के लिए आभार

June 9, 2012

चलिए जो हुआ अच्छा ही हुआ……………परन्तु मुझे यह समझ में नहीं आ रहा कि तारों का कारोबार छोड़कर आप यह कौन……………………………..! एक बार फिर, एक सुन्दर रचना के साथ आपकी सुन्दर वापसी ……………………..हार्दिक आभार.! _______________________________________________________________________ फ़िलहाल “आलोक श्रीवास्तव” का यह ग़ज़ल पढ़िए और कुछ समय के लिए बेहोश हो जाइये………. सखी पिया को जो मैं न देखूँ तो कैसे काटूँ अंधेरी रतियाँ, के’ जिनमें उनकी ही रोशनी हो, कहीं से ला दो मुझे वो अँखियाँ। दिलों की बातें, दिलों के अंदर, ज़रा-सी ज़िद से दबी हुई हैं, वो सुनना चाहें ज़ुबाँ से सब कुछ, मैं करना चाहूँ नज़र से बतियाँ। ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, सुलगती-साँसे, तरसती-आँखें, मचलती-रूहें, धड़कती-छतियाँ। उन्हीं की आँखें, उन्हीं का जादू, उन्हीं की हस्ती, उन्हीं की ख़ुशबू, किसी भी धुन में रमाऊँ जियरा, किसी दरस में पिरो लूँ अँखियाँ। मैं कैसे मानूँ बरसते नैनो के’ तुमने देखा है पी को आते, न काग बोले, न मोर नाचे, न कूकी कोयल, न चटखीं कलियाँ ।……

    jlsingh के द्वारा
    June 10, 2012

    प्रिय अनिल जी , सादर आपके अथाह सागर में अनगिनत रत्न छुपे हुए है, कृपया ऐसे ही बीच बीच में चमकाते रहिये! आपके आँखों के आंसू रोशनी जी के पास कैसे पहुँच गए ? गलत बात है …… मजाक कर रहा हूँ!

    roshni के द्वारा
    June 10, 2012

    अनिल कुमार जी नमस्कार, रचना को पसंद करने के लिए आभार … और जहाँ तक रही तारों की बात तो कुछ समय के लिए खाव्बों से निकलकर हकीकत में भी जीना जरुरी है … और अलोक जी की ग़ज़ल जरुर पढेगे .. एक बार फिर से शुक्रिया

    roshni के द्वारा
    June 10, 2012

    और अनिल जी , आपके द्वारा लिखी गयी ग़ज़ल बहुत सुंदर है … बस यही कहुगी गुनाह को भी सजा का हक है , ज़ख्मो को भी दावा का हक है , कौन रहता है अपने प्यार के बिना , प्यार में रूह को सदा महकने का हक है

    June 10, 2012

    मन कौन किया है तो फिर महका करो न, कोयल बनकर चहका करो न, इस तरह आंसू बहाकर, हमारे दर पर बहका करो ना. गुनाह को सजा का हक़, जख्मो को दवा का हक़, यह बात बेईमानी सी है, देखों इस कदर लहका करो ना. कहना-सुनना, रोना-हँसना, और वो भी मुहब्बत में, यह बीती बात हो गयी, पीकर यह जाम अब और बहका करो ना …

vikramjitsingh के द्वारा
June 9, 2012

रौशनी जी आप का स्वागत है…… हमेशा की तरह सुन्दर रचना….. आपकी रचना पर दो शब्द…… ”जो कुछ भी मिला है…उसे सीने से लगा ले… सिक्के की तरह गम को उछाला नहीं करते….”

    dineshaastik के द्वारा
    June 10, 2012

    विक्रम  जी, आप तो गमगीन  बना देते हो, दिले- गम - दीप को, फिर से जला देते हो। आदरणीय रोशनी जी, आपकी रचना के समर्थन  में कुछ  पंक्तियाँ प्रस्तुत  हैं- ये सच्ची मुहब्बत  बेकार होती है, कितना भी रोकें, आखिरकार होती है। इस  बला से दुश्मन  को भी बचाये खुदा, इससे तो जिन्दगी तार तार होती है।। मुहब्बत  दर्द  का ही पर्याय है शायद, या मुहब्बत  की दर्द  से हार होती है। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मुहब्बत तो लगता है मुझे केवल  एक  छलावा, मुहब्बत में और कुछ  नहीं है दर्द  के अलावा, सच्ची मुहब्बत नजर नहीं आती मुझको कहीं भी, सभी करते हैं मुहब्बत, मगर केवल  दिखावा। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मुहब्बत तो दिखती बहुत खूबसूरत, हकीकत  में किन्तु बहुत ही भयानक। मुहब्बत से बचते हुये हम  हैं चलते, मगर  फिर भी होती मुहब्बत  अचानक।

    June 10, 2012

    सच और झूठ की बात ही ख़ामो खां होती है यह वो सच हैं जो रूहों से भी वयां होती हैं. यह ऐसा दर्द है, हद से गुजरना, दवा होती है, और इसकी इबादत, काशी और कावा होती है. इश्क से तुम हो, मैं हूँ और यह कायनात सारी, अब कैसे मान ले तुम्हारी बात, छलावा होती है. कभी मेरी आखों में झाककर देखों “अलीन ” जहाँ तड़पते जिस्म में एक रुंह जवां होती है…………..

    roshni के द्वारा
    June 10, 2012

    विक्रमजीत सिंह जी स्वागत और तारीफ के लिए तहे दिल से शुक्रिया

    roshni के द्वारा
    June 10, 2012

    दिनेश जी नमस्कार समर्थन के लिए आभार … और आपकी पंक्तियाँ बहुत बढ़िया है सुंदर कविता के लिए आभार

Sumit के द्वारा
June 9, 2012

अच्छी रचना …….. जब प्यार ही दिखता नहीं उसकी आँखों में मुझे , तो आईना भी खुद को दिखाना छोड़ दिया है……सार्थक ………….

    roshni के द्वारा
    June 10, 2012

    सुमित जी रचना की तारीफ के लिए आभार

allrounder के द्वारा
June 9, 2012

नमस्कार रौशनी जी, काफी दिनों बाद मंच पर आपकी उपस्तिथि हुई, ये देखकर बहुत ख़ुशी हुई, और आपकी रचना के बारे मैं तो क्या कहने…. हमेशा की तरह ही कम शब्दों मैं बहुत कुछ कहती है ….. इसके लिए आप बधाई की पात्र हैं, ऐसे ही लिखते रहिये और मंच को सुशोभित करते रहिये यही शुभकामना आपके लिए !

    roshni के द्वारा
    June 10, 2012

    सचिन जी नमस्कार मंच पर तो किसी न किसी रूप में रहते ही है .. अगर खुद न लिखे तो दुसरे साथियों की रचनाओ को पढते है .. हमेशा की तरह रचना को पसंद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार


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