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बस सवाल ही है .....???

Posted On: 28 Sep, 2011 में

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question-mark8
क्यों चाँद हँस रहा है?
क्यों मुस्कुरा रहे है तारे ?
क्यों साहिलों पे आ के खो जाते हैं किनारे?
क्यों होता है कोई अपना ?
क्यों बन जाते हैं बेगाने?
क्यों जिंदगी तलाशती है जीने के लिए सहारे ?
हर गम सवाल मैं है,
हर खुशी सवाल मैं है,
क्यों समझ नहीं पाते हम खुदा के ये इशारे ……
मैं हँसती हूँ कभी बेवजह,
रोती हूँ कभी जार जार ,
कोई ख़ुशी नहीं बेगानी
कोई गम नहीं हमारे ……….
मै बेवजह ही अक्सर उलझ जाती हूँ इन बातों मै
जवाब नहीं जिनके न पास मेरे न तुम्हारे…….
(रौशनी)
____________

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597 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ramesh Patel Anjana के द्वारा
December 23, 2011

बह्त  खुब……………………..

rajeevdubey के द्वारा
November 1, 2011

कोई ख़ुशी नहीं बेगानी कोई गम नहीं हमारे ………. …………………………………… इसी दिशा में हैं उत्तर सारे… सवाल गहरे हैं, पर जरूरी है कि उठें और उत्तर ढूंढें जाएँ .. साधुवाद

    roshni के द्वारा
    November 2, 2011

    राजीव जी धन्यवाद्

    Chacidy के द्वारा
    July 12, 2016

    I might be bentiag a dead horse, but thank you for posting this!

Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
October 18, 2011

आदरणीया रोशनी जी , सादर अभिवादन ! इतने सारे प्रश्न…………………… बाप रे जवाब नहीं जिनके न पास मेरे न तुम्हारे सुन्दर रचना ……………बधाई !

    roshni के द्वारा
    October 20, 2011

    डॉ कैलाश जी धनयवाद

    Adeyemi के द्वारा
    November 29, 2013

    No coltiamnps on this end, simply a good piece.

    Stretch के द्वारा
    July 12, 2016

    If your cat had kittens in the oven, you wouldn’t call them bi&;Hits.smdashcuarry AndersonThe important thing to remember is that this is John’s (and to an extent, Sarah’s) story. Though events surrounding them might seem convoluted, sometimes mythic, at times, the fact is that from their perspective there isn’t any discontinuity.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
October 18, 2011

रौशनी जी अभिवादन २८ सितम्बर के बाद अब १८ अक्तूबर आ गया इतना इंतजार क्यों हम शीघ्र फिर कुछ पढना गुनगुनाना चाहते हैं लिखते रहिये … भ्रमर ५

    roshni के द्वारा
    October 18, 2011

    नमस्कार शुक्ल जी जरुर आज ही एक पोस्ट कर रही हूँ आशा है पसंद आयेगी आभार सहित

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    October 18, 2011

    रौशनी जी आप ने वादे के मुताबिक भले ही छोटी किन्तु सुंदर कृति दी और मान रखा आभार ..कुछ न कुछ मन के उद्गार आते रहने दिया कीजिये … शुक्ल भ्रमर ५

nishamittal के द्वारा
October 12, 2011

रौशनी ,बीच में मै लम्बे समय अनुपस्थित रही अतः तुम्हारी [पोस्ट नहीं देख सकी.सही कहा है तुमने सुन्दर शब्दों में बहुत से प्रश्न सदा अनुत्तरित ही रहते हैं.बहुत लम्बे समय बाद अच्छा लगा तुम्हारी पोस्ट पढना.अपना लेखन जारी रखना.

    roshni के द्वारा
    October 12, 2011

    निशा जी नमस्कार प्रसंशा के लिए धन्यवाद .. आपके विचार जान कर बहुत अच्छा लगा .. लेखन जारी रहेगा बस लगातार नहीं लिख पाउगी.. आभार सहित

coolbaby के द्वारा
October 11, 2011

जी हमारे पास इन सारे सवालों के जवाब हैं :) वैसे आप ने भी एक जवाब तो तलाश कर ही लिया है खुदा के इशारे :)

    roshni के द्वारा
    October 11, 2011

    धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
October 4, 2011

बहुत ही सुन्दर भावनाओं की अभिव्यक्ति! हर गम सवाल मैं है, हर खुशी सवाल मैं है, क्यों समझ नहीं पाते हम खुदा के ये इशारे ……

    roshni के द्वारा
    October 4, 2011

    singh जी धन्यवाद प्रशंसा के लिए आभार

Aakash Tiwaari के द्वारा
October 1, 2011

रोशनी जी, सबसे पहले तो आपको नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये..दूसरी बात ये की मै आपकी फोटो देखकर समझ ही नहीं आया था की ये वाही रोशनी जी है जिनकी गजल मन मस्तिष्क को झकझोर देती है..बाद में आदरणीय श्री बाजपेई जी के ब्लॉग में आपके कमेन्ट के सहारे जब यहाँ आया तो पाया की आप ही है…. आज आपकी रचना में बहुत ही अलग सा पन था..बेहद खूबसूरत ….बेहद …. दो शब्द मेरी तरफ से… ********************************************************** हम करते है सवाल मगर वो खामोश रहते है, दिया है जो दर्द वो हम आज भी सहते है, इन्तेजार है वो लौटकर जरूर आयेंगे, इस टूटे दिल में जिन्दा वो आज भी रहते है….. ********************************************************** आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    October 1, 2011

    आकाश जी आपको भी नवरात्री की बहुत बहुत शुभकामनये .. अरे आप तो भूल ही गए.. लेकिन शुक्र है आखिर और अपने मुझे पहचान लिया … पहले से भी ज्यदा आपको मेरी रचना अच्छी लगी जानकर बहुत ही खुसी हुई … और आपका शेर फिर से आपके दिल की व्यथा बयाँ कर रहा है .. आकाश जी बस सवाल का जवाब आपको खुद ही तलाश करना होगा .. कई बार जानेवाला वापस नहीं आता… मगर आपका इंतज़ार देखकर तो न वापसं आने वाला भी एक न एक दिन कही से आ ही जायेगा किसी न किसी रूप में … धन्यवाद

rita singh 'sarjana' के द्वारा
September 30, 2011

रौशनी जी , ” क्यों जिंदगी तलाशती है जीने के लिए सहारे ? हर गम सवाल मैं है, हर खुशी सवाल मैं है, क्यों समझ नहीं पाते हम खुदा के ये इशारे ……” बहुत सुन्दर प्रस्तुति ,बधाई

    roshni के द्वारा
    October 1, 2011

    रीता जी नमस्कार धन्यवाद .. हमेशा की तरह रचना को पसंद करने के लिए और प्रोत्साहन के लिए तहे दिल से शुक्रिया …

mparveen के द्वारा
September 30, 2011

रौशनी जी मन के भावों को शब्दों की माला में पिरोने का बहुत ही सफल प्रयास किया गया है … सुंदर और प्यारी सी रचना के ले लिए बधाई …..

    roshni के द्वारा
    September 30, 2011

    परवीन जी धन्यवाद आभार

    Jailyn के द्वारा
    July 12, 2016

    Hezké shrnutí a dobrá práce, Tribune! Bohužel je to vpodstatÄ› jedno, co z volebního programu budou strany plnit a co ne, jelikož ho 90% voličů nečetlo ani pÅ™ed volbami, ani kdykoliv jindy a je jim to vpodstatÄ› jedno, stačí jim xichty na vÅ¡ech možných i ne½ožnÃmch reklamních plochách a jednoduchá a úderná hesla…

Amita Srivastava के द्वारा
September 29, 2011

रौशनी जी , बहुत सुंदर भावों की प्रस्तुति . बधाई कभी अच्छी लगी वो इतनी , कभी बुरी लगी , हर रूप जिसका देखा , थी मेरी जिन्दगी |

    roshni के द्वारा
    September 30, 2011

    अमिता जी नमस्कार खुबसूरत शेर धन्यवाद

sadhana thakur के द्वारा
September 29, 2011

रौशनी जी ,बहुत अच्छी कविता ..बधाई हो ………..

    roshni के द्वारा
    September 30, 2011

    साधना ठाकुर जी नमस्कार रचना को पसनद करने के लिए धन्यवाद

surendra shukl bhramar5 के द्वारा
September 29, 2011

रौशनी जी सुन्दर रचना मन को भा गयी ..सच में ऐसा ही होता है ..प्रश्न ही प्रश्न और खोजिये ढूंढिए चैन से जी लीजिये ….सुन्दर भ्रमर ५ हर गम सवाल मैं है, हर खुशी सवाल मैं है, क्यों समझ नहीं पाते हम खुदा के ये इशारे …… मैं हँसती हूँ कभी बेवजह, रोती हूँ कभी जार जार , कोई ख़ुशी नहीं बेगानी कोई गम नहीं हमारे ……….

    roshni के द्वारा
    September 30, 2011

    शुक्ल जी नमस्कार ये जिन्दगी वैसे इन्ही सवालों के जवाब तलाश करने मे निकल जाती है … तारीफ के लिए आभार ऐसे ही प्रोत्साहन देते रहिएगा धन्यवाद

    surendra shukla bhramar5 के द्वारा
    October 4, 2011

    बार बार पढने और गुनगुनाने के लिए मन करता है रौशनी जी यों ही रौशनी दिखाते रहिये भ्रमर ५

    roshni के द्वारा
    October 4, 2011

    धन्यवाद् शुक्ला जी

    Sagar के द्वारा
    July 12, 2016

    Haha le fameux jambon d’Aoste belle manipulation, j’adore le jambon italien, tout comme le jambon espagnol d’ailleur, mais pas facile de trouver du véritable jambon en Fr0&nec#823a;Pierre Articles récents..

संदीप कौशिक के द्वारा
September 29, 2011

बहुत दिनों के बाद ही सही……मगर सुंदर पंक्तियाँ…..हमेशा की तरह । बहुत बहुत आभार रोशनी जी !

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    संदीप जी, हमेशा की तरह प्रशंसा के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया आभार सहित

akraktale के द्वारा
September 29, 2011

रोशनी जी नमस्कार, बधाई आपको. मुझे आपकी रचना की पंक्तियाँ कुछ ढूंड ती सी प्रतीत हुई.मै अपनी प्रति क्रिया इन पंक्तियों के माध्यम से दे रहा हूँ. कुछ पल जिंदगी के सुकूं तलाशते हैं, कुछ वादों के सहारे कुछ यादों के सहारे.

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    नमस्कार अशोक जी उपरलिखित पंक्तियों के द्वारा आपकी प्रतिक्रिया बहुत ही अच्छी लगी .. धन्यवाद आभार सहित

    Symona के द्वारा
    July 12, 2016

    Sziasztok!Az én édesanyám vietnámi és én tÅ‘le tanultam a receptet!Persze náluk is működik az ahány ház,annyi szokás! Az én anyukám is szokott rákos verziót készíteni,de legtöbbször darált marha éssertéshús keverékével készíti és szokott beletenni szÃtrababcsíjá³! A rizslapot pedig sör és langyos víz keverékébe mártja,ettÅ‘l még ropogósabb lesz!Ha valakinek van kedve,próbálja ki így is!Zsófi!Imádom az oldaladat!

वाहिद काशीवासी के द्वारा
September 29, 2011

रोशनी जी, लंबे समय बाद आपकी कोई कृति अवतरित हुई है। पढ़ कर अच्छा लगा। वैसे मेरे ख़याल से इन सवालों के जवाब भी ख़ुद इन्हीं सवालों में छिपे हुए हैं। आभार सहित,

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    वाहिद जी , सही पहचाना अगर देखा जाये तो सवाल खुद ही जवाब होता है मगर फिर बी बाहर ही तलाशते है हम यही तो मानव सवभाव है … आपने पहले की ही तरह फिर से प्रशंसा और प्रोत्साहन के लिए आभार

Paarth Dixit के द्वारा
September 29, 2011

आदरणीय रौशनी जी, नमस्कार..बहुत ही सुन्दर कविता..बहुत अच्छा लिखती है आप.. साधुवाद

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    पार्थ जी नमस्कार धन्यवाद आपको कविता अच्छी लगी आभार

    Lark के द्वारा
    July 12, 2016

    mar31 Eh si, JJFlash, hai proprio ragione, e ti ringrazio per la riflessione che mi hai fatto fare sull’uso del termine &#r0o2;quota8e”.Pers2nalmente non ne faccio largo uso, ma è sempre giusto sottolineare l’esatta natura per la quale sono stati coniati (o forse, in questo caso, inventati – giacchè non esiste in italiano un verbo “quotare”!) certi termini.A volte, in effetti, sottoscrivo o approvo può rendere meglio l’idea e indicare più appropriatamente il concetto.Alla prossima, dunque.

Abdul Rashid के द्वारा
September 29, 2011

हकीक़त से परे सपनो के सहारे जवाब के इंतजार में खुद क्यों रहा किनारे मंजिल पे आके उत्सव के सहारे ख्व़ाब के खुमार में खुद क्यों रहा अंधियारे. बेहतरीन उम्दा……….. लेकिन क्यों का जवाब क्यों http://singrauli.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    रशीद जी नमस्कार क्यों का जवाब वैसे हमेशा ही क्यों होता है यानि की कोई जवाब ही नहीं .. फिर भी जवाब की तलाश है रचना पसंद करने के लिए आभार

आर.एन. शाही के द्वारा
September 29, 2011

रौशनी जी, आपकी खूबसूरत कविता के लिंक के सहारे यहां आने का मौका मिल गया । हमेशा की तरह लुभाने और सोचने पर बाध्य करने वाली पंक्तियां । बधाई !

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    शाही जी नमस्कार लिंक के जरिये ही सही आप अपना कीमती समय निकल कर यहाँ आए तो सही .. व्यवस्ता के बीच मे से कविता पढ़ कर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत बहुत आभार … आशा है की आगे भी इसी तरह आपका प्रोत्सहन मिलता रहेगा .. आभार सहित

    आर.एन. शाही के द्वारा
    September 30, 2011

    रौशनी जी, आपकी नई सौम्य और सुन्दर तस्वीर देखकर दोबारा टिप्पणी करने से खुद को रोक नहीं पा रहा हूं । जब आप करीना से भी अधिक सुन्दर हैं, तो फ़ेसबुक पर उसकी तस्वीर का सहारा लेने की ज़रूरत क्या है ? यह एक मित्र का सुझाव है, कोरी टिप्पणी नहीं ! अपने साहब को मेरा प्रणाम कहेंगी । आभार !

    roshni के द्वारा
    October 1, 2011

    शाही जी तारीफ के लिए शुक्रिया

allrounder के द्वारा
September 29, 2011

रौशनी जी नमस्कार, जे जे पर पुनर्वापसी पर आपका हार्दिक स्वागत है ! पूर्व की भांति इस बार भी आपकी रचना मैं जीवन के प्रति आपके दार्शनिक वैचारिक मंथन की झलक दिखाई देती है ! आपके सवालों को पढने के बाद मैं भी कुछ सोचने पर विवश हो गया और अंत मैं निष्कर्ष ये निकाला की जिन्दगी केबीसी की भांति एक खेल हैं और इस खेल का होस्ट अमित जी नहीं शायद भगवान् है जिस प्रकार केबीसी मैं पूछे जाने वाले हर सवाल का जवाव पहले से ही तय होता है उसी प्रकार जीवन के हर सवाल का कोई न कोई जवाव होता अवश्य है और हम मैं से जो भी प्रतियोगी इन सवालों के जवाव जितनी ज्यादा अच्छे से देंगे वो उतने अच्छे से इस जीवन के खेल मैं आगे बढ़ेंगे .. बस जरुरत है हमें ईश्वर के पूछे गए हर सवाल पर आत्म मंथन की है .. जिससे हम इस खेल मैं आगे … आगे और आगे बढ़ते जाएँ … और आप भी इसी प्रकार अच्छा अच्छा और अच्छा लिखती जाएँ …

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    सचिन जी नमस्कार धन्यवाद सवागत के लिए .. वैसे ये आना जाना तो लगा ही रहता है … समय मिलते ही हम जागरण पे आ जाते है .. आपका निष्कर्ष काफी रोचक है और सही भी ये वास्तविक जीवन की kbc है … कविता पर आपके गहन विचार जान कर अच्छा लगा .. धन्यवाद आभार सहित

manoranjanthakur के द्वारा
September 29, 2011

बहुत दिनों के बाद बिखरी है ये रौशनी बहुत बधाई

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    मनोज जी नमस्कार जी कुछ व्यवस्ता के कारन जागरण पे न आ सकी कोई रचना लेकर आज समाये मिलते ही लिख दिया कविता पसंद करने के लिए धन्यवाद आभार सहित

    Belle के द्वारा
    July 12, 2016

    I am really enjoying the theme/design of your weblog. Do you ever run into any internet browser cotpitibalimy problems? A small number of my blog visitors have complained about my website not operating correctly in Explorer but looks great in Firefox. Do you have any suggestions to help fix this issue?

Santosh Kumar के द्वारा
September 29, 2011

आदरणीय रोशनी जी ,.सादर नमस्कार बहुत मानवीय भावों से युक्त ,.बेहतरीन रचना ,..कृपया बधाई स्वीकार करें http://santo1979.jagranjunction.com/

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    संतोष जी नमस्कार रचना पसंद करने के लिए धन्यवाद आभार सहित

Alka Gupta के द्वारा
September 29, 2011

रोशनी जी , एक लम्बे अन्तराल के बाद आपकी बहुत ही बढ़िया कविता पढने को मिली….सही में यही तो ज़िन्दगी है जो पल-पल अपने जीने का सहारा ढूँढती है…..हर आदमी यहाँ हजारों ,लाखों सवालों के घेरे में फंसा रहता है….. उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई !

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    अलका जी नमस्कार ये सवाल ही है जो इंसान को जिन्दगी भर जवाब तलाश करने के फेरे मे इतनी बड़ी जिन्दगी को पल मे निकल देते है .. और सवाल फिर भी सवाल ही रह जाते है … जवाब जानते बुझते हुए बी .. काफी समय बाद लिखा मगर आपका प्रोत्सहन और प्यार पहले की ही तरह मिला .. धन्यवाद आभार सहित

anju के द्वारा
September 29, 2011

roshni जी अछी कविता दिल के किसी कोने मैं छुपे हुए सुने पण को सुलझाने की इचा;; कविता के रूप मैं उजागर हुए आपके मन के भाव बहुत सराहनीय हैं मन को छू लेने वाली कविता

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    अंजू जी आपके प्यार और प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

chaatak के द्वारा
September 29, 2011

बहुत खूब रौशनी जी, काफी दिनों बाद आपकी कविता मंच पर देखकर बहुत ख़ुशी हुई| आधुनिक परिदृश्य में स्वयं से सवाल करता मानव मस्तिष्क निःसंदेह इसी तरह अपने ही सवालों में उलझ जाता है| मैं आपकी इस कविता को ‘हिंदी में लिखे एक खूबसूरत ”ínterior monologue” की संज्ञा दूंगा| एक और अच्छी रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें!

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    चातक जी काफी दिनों बाद लिखा और आपकी हेमशा की तरह विस्तार और भाव को समझती प्रतिक्रिया और मेरी कविता को दिया गया नाम सब के लिए धन्यवाद …कविता के मूल को आप बखूबी बयाँ कर देते है .. बधाई के लिए हार्दिक आभार धन्यवाद् सहित

    Marylouise के द्वारा
    July 12, 2016

    Field wrote “…like your republican colleagues in Florida and California and take the money.”Ah, come on Arnie is hardly at all Republican except in the name. The Gouvernator of California sure showed all of the people that he is an actor, he surely isn’t doesn’t act like the rest of the Reanslicpub. We star struck fools here in California surely like our actor politicians, at least this is one we cannot foist off on to the rest of the country. (I think he really wanted to help though.)

rameshbajpai के द्वारा
September 29, 2011

मै बेवजह ही अक्सर उलझ जाती हूँ इन बातों मै जवाब नहीं जिनके न पास मेरे न तुम्हारे…… रौशनी जी नियति का यह अबूझ समीकरण वास्तव में बहुत जटिल है | इश्वर इतना कठोर भी हो सकता है क्या ? कई बार खुद से यह पूछना पड़ता है | पर नियति के इस बंजर में भी हौसलों से संभावनाओ के गुलाब नियति स्वयं लहरा देती है | शुभ कामनाओ सहित

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    आदरनिये वाजपई जी नमस्कार इश्वर की बाते तो इश्वर ही जाने मगर मानव मन ये जानते हुए भी की उसकी करनी मे कोई रहस्य फिर भी सवालों मे घिरा रहता है … अपने बहुत अच्छे से इस बात को लिखा धन्यवाद ऐसे ही अपना आशीर्वाद देते रहिएगा

vinitashukla के द्वारा
September 29, 2011

रौशनी जी, सुन्दर उद्गारों से सजी, इस भावप्रणव रचना पर बधाई.

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    विनीता जी नमस्कार आप को कविता अच्छी लगी धन्यवाद … आपका प्रोत्सहन ऐसे ही मिलता रहे … आभार सहित

syeds के द्वारा
September 28, 2011

क्यों चाँद हँस रहा है? क्यों मुस्कुरा रहे है तारे ? क्यों साहिलों पे आ के खो जाते हैं किनारे? रौशनी जी, सुन्दर पंक्तियाँ… अच्छी रचना के लिए बधाई की पात्र हैं…

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    syeds जी नमस्कार हमेशा की तरह प्रशंसा के लिए तहे दिल से धन्यवाद

Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
September 28, 2011

रोशनी जी, सादर अबिवादन ! सुन्दर भावयुक्त पोस्ट……… साधुवाद !

    roshni के द्वारा
    September 29, 2011

    धन्यवाद् कैलाश जी कविता पसंद करने के लिए आभार सहित

Lahar के द्वारा
September 28, 2011

क्यों चाँद हँस रहा है? क्यों मुस्कुरा रहे है तारे ? ये चाँद को आपको हँसाने के लिए मुस्कुरा रहा है ! और रही बात तारो की , तो आपको मुस्कुराते देख ये भी मुस्कुरा रहे है| सुन्दर रचना |

    roshni के द्वारा
    September 28, 2011

    लहर जी धन्यवाद .. मुझे मालूम ही न था की मुझे मुस्कुराता देख कर ये मुस्कुरा रहे है ….. शुक्रिया तारीफ के लिए आभार

abodhbaalak के द्वारा
September 28, 2011

रौशनी जी एक लम्बे अंतराल के बाद आपको कोई रचना मंच पर …. केवल एक वाक्य में कहूं तो यही कहूँगा की मंच से दूरी ने आपकी लेखनी को और निखारा है, बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल, पर ये उलझन क्यों, खुश रहा करें, और खुश रहें ये ही इश्वर से दुआ है. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    roshni के द्वारा
    September 28, 2011

    अबोध जी नमस्कार धन्यवाद आपके प्रोत्साहन के लिए ये उलझन तो जिन्दगी के साथ साथ हमेशा चलती रहती है … सब कुछ होने पर बी एक खालीपन होता है शायद … आपकी दुआं के लिए धन्यवाद … और मेरी भी इश्वर से प्राथना है की सब खुश रहे आभार सहित

Harish Bhatt के द्वारा
September 28, 2011

रौशनी जी नमसते. बहुत ही शानदार कविता. हार्दिक बधाई. क्यों होता है कोई अपना ? क्यों बन जाते हैं बेगाने? क्यों जिंदगी तलाशती है जीने के लिए सहारे ?

    roshni के द्वारा
    September 28, 2011

    हरीश जी नमस्कार , हमेशा की तरह कविता पसंद करने के लिए धन्यवाद् आभार


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