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और घर वीरान हो गया....

Posted On: 7 Jul, 2011 Others में

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images (2)उस रोशनदान पर कबूतरों का वह जोड़ा शायद पिछले ३ साल से रह रहा था.. खामोश से लोगों के बीच जब वे अपने पंख फडफड़ा कर उड़ते तो महसूस होता जैसे अभी भी जिन्दगी बाकी है..वीरान से उस घर की रौनक ये कबूतर मोहल्ले की हर छत पर आते जाते रहते, भाईचारा दिखाते .. बेशक मोहल्ले के लोग आपस मैं एक दूसरे से न बोलें, न मिलें मगर वे कबूतर सबसे मिलने जाते ..इन तीन सालों मैं उन दो कबूतरों ने घर को छोटे छोटे न जाने कितने बच्चों से भर दिया और आज फिर से उनके घोंसले में सुबह देखा तो ३ अंडे थे जो नवजीवन का इंतज़ार कर रहे थे , अँधेरे से उजाले में आने के इंतज़ार में न जाने वे उस छोटे से खोल में कैसे रहते थे ?

आज सुबह उस घर में रहने के लिए एक परिवार आने वाला है .. उसका मुखिया घर की साफ़ सफाई करवा रहा है .. अपना नया जीवन शुरू करने के लिए .. अपने परिवार के साथ आबाद होने के लिए … चलो अच्छा है इस घर में कोई तो आया .. मगर तभी उन कबूतरों का शोर सुनाई दिया आज कुछ ज्यादा ही शोर कर रहे थे न जाने क्या हुआ था … जल्दी से बाहर आकर देखा तो उनका घोंसला रोशनदान पर नहीं था बल्कि बिजली की तारों के ऊपर रखा पड़ा था.. और ये सब उस घर के नए मालिक ने किया था .. सब कबूतर चिल्ला रहे थे और वह आदमी बोला ये यहाँ गंदगी फैला रहे है मेरा रोशनदान और घर गन्दा कर रहे है इसलिए मैंने इसे हटा दिया .. मैंने बहुत दुःख के साथ कहा की वे तो बेजुबान पंछी है, कब से यहाँ रह रहे है फिर से घोंसला बना लेंगे.. इसलिए आपको हटाना ही नहीं चाहिए था …. उन्होंने कहाँ कैसे बना लेंगे ? मैं यहाँ जाली लगा दूँगा फिर वे अन्दर ही न सकेगे .. images (1)इतनी बात करते – करते उन कबूतरों का घोंसला नीचे गिर गया और अंडे टूट गए जिन्दगी रौशनी की किरण देखने से पहले अँधेरे में चली गयी .. ३ जीवन एक पल में समाप्त हो गए और वे बेजुबान कबूतर विलाप करते रहे …
और घर का नया मालिक रोशनदान को बंद करके जाली लगवा कर इस तरह गर्वित हो रहा था जैसे उसे घर पर अपना कब्जा वापस मिल गया हो …. वह खुशी से इतर रहा था , और सालों से बंद पड़ा घर आज सच में वीरान हो गया था …..
(मेरे घर के सामने बसे उन प्यारे से बेजुबान कबूतरों को समर्पित)

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21 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

SP VERMA के द्वारा
November 2, 2011

you wrote it so much touching & intresting thanks a lot & good wishes .

supriyo के द्वारा
August 12, 2011

प्रिय आदरणीय दीदी प्रणाम , आपको और आपके सभी प्रियजनों को इस भाई की तरफ से इस मंगल पर्व रक्षाबंधन की ढेरो मंगलकामनाये भगवान् मेरी रौशनी दीदी को संसार की सभी खुशिया प्रदान करे आज इस मंगल दिबस पर इस्वर से इस भाई की बस इतनी ही कामना है हमेसा खुश रहे ,धन्यवाद आपका बिनीत सुप्रिय (प्रिय दीदी न ही आपका मेल ई डी मेरे पास था और न ही फ़ोन नंबर इसलिए मेरे पास आपसे संपर्क का और कोई जरिया नहीं था इसलिए यहाँ पर मुझे लिखना पढ़ा इसकेलिए छमा करे दीदी )

    roshni के द्वारा
    September 28, 2011

    प्रिय सुप्रियो माफ़ करना तुमे देर से उत्तर दे रही हूँ पहले दिया था शायद submit नहीं हो पाया .. मई तुमे मेल करुगी उससे तुमे मेरा mail id मिल जायेगा … और तुम्हारा स्नेह पाकर बहुत अच्छा लगा … तुम्हारी दीदी

supriyo के द्वारा
August 6, 2011

मेरी प्रिय दीदी प्रणाम बहुत ही सुन्दर हृदैस्पर्शी और मार्मिक रचना के लिए आपका दिल से आभार प्रिय दीदी एक बात आपसे मै आज पूछता हूँ मैंने गौर किया है की आपकी हर रचना मै बहुत ही दर्द छिपा होता है क्या बात है दीदी मै नहीं जानता पर मै इतना जनता हूँ बियोगी कवी हो जाता है सायद ऐसा कुछ आपके साथ भी है नहीं जनता मैंने ये सब्द दिल से लिखा है कुछ गलत कह गया तो माफ़ करना दीदी ,आपना ख्याल रखियेगा ,धन्यवाद आपका बिनीत भाई सुप्रिय

deepa के द्वारा
July 20, 2011

very nice very touching keep it up……. roshni

rameshbajpai के द्वारा
July 10, 2011

रौशनी जी आपकी सहजता व सरलता व संवेदन शीलता का अनुभव तो मुझे हमेशा आपकी रचनाओ में स्पस्ट दिखा है | पर पोस्ट और ये भाव तो अनमोल है , बेटी दुनिया में बहुत कम लोग ऐसे होते है जिनका स्नेहिल अंतर्मन खुली किताब की तरह सदा सामने रहता है | मुझे आप पर फक्र व बहुत गर्व है | प्रभु सदा आपकी झोली को खुशियों से भरी रखे | बहुत बहुत शुभकामनाये ,बधाई

    rameshbajpai के द्वारा
    July 10, 2011

    कृपया इस तरफ पढ़े “पर ये  पोस्ट और ये भाव तो अनमोल है “

    roshni के द्वारा
    September 23, 2011

    Respected बाजपाई जी काफी देर से उत्तर दे रही हूँ कारन mera password kho gaya tha.. post ko pasand krne ke liye dhanywad… itne khule dil se tarif krne ke liye bahut bahut shukriya.. apse muje kafi protshan milta hai .. with regards

nishamittal के द्वारा
July 10, 2011

बहुत अच्छे भावना से भरपूर उदगार ,रौशनी मानव संवेदनहीन होता जा रहा है.

    Derex के द्वारा
    July 12, 2016

    C’ est pas une question d’ être dépassé ou pas..simplement tous les terminaux ont des mises à jours et selont le modèle et les voeux du constructeur,certains modèles reçoivent des mises à jours plus ou moins no;2beuses&#8r30m.tout simplement comme le hd2 qui avait été pérenniser à ce niveau….c est comme ça.!..

RaJ के द्वारा
July 7, 2011

किसी के लिए किसी जान से प्यार किसी के लिए केवल शिकार है इन्सान तंग दिल होता जा रहा है रौशनी जी

    roshni के द्वारा
    July 8, 2011

    राज जी सही कहा अपने .. आपके विचारों के लिए धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
July 7, 2011

रोशनी जी , इन बेजुबान प्राणियों की भावनाओं को आपने महसूस किया अच्छा लगा ! आज हर इंसान अपने अपने स्वार्थ में लगा हुआ है उसे अपनों की चिंता नहीं है फिर ये तो बेचारे बेजुबान हैं इनकी भावनाओं को sochne समझने का समय ही नहीं है……..भावनात्मक लेख !

    roshni के द्वारा
    July 8, 2011

    अलका जी , अगर कभी सकून की चाहत हो तो या तो इन बेजुबानो को देखकर मिलता है ये छोटे छोटे बच्चों को … बस इन बेजुबानो को समझ ही नहीं पते हम …….. आपके कीमती विचारों के लिए तहे दिल से शुक्रिया

संदीप कौशिक के द्वारा
July 5, 2011

हर शख़्स भी वीरान-सा ही हो गया है….भावनात्मक रूप से । . . सुंदर कृति रोशनी जी, पढ़कर अच्छा लगा । हार्दिक बधाई आपको !! :)

    roshni के द्वारा
    July 8, 2011

    धन्यवाद संदीप जी

allrounder के द्वारा
July 5, 2011

रौशनी जी, काफी सम्बेदना जगाता है आपका ये लेख, किन्तु वर्तमान काल मैं जब मनुष्य मनुष्य का ही घरोंदा उजाड़ने से नहीं चुकता ऐसे मैं इन बेजुबान पंक्षियों के बारे मैं कौन सोचे ! फिर भी आपने इन बेजुबानों के दर्द को महसूस किया उसके लिए आपको हार्दिक बधाई !

    roshni के द्वारा
    July 8, 2011

    सचिन जी, यही तो दुःख है न हम इन्सान न इन्सान रहे है न ही जानवर …….. क्युकी इन्सान को भी खुश नहीं देख सकते और पशु पक्षियों को भी दुःख देने से नहीं चुकते ……….. आपके विचार अच्छे लगे धन्यवाद

chaatak के द्वारा
July 4, 2011

रौशनी जी, आपकी संवेदनशीलता और आपके घर के सामने रहने वाले उस व्यक्ति की संवेदनहीनता हमारी दुनिया में हर जगह उपस्थित विरोधाभास को सिद्ध करती है| नियति सचमुच क्रूर खेल खेलती है वर्ना वे बेजुबान आपके घर में भी घोसला बना सकते थे इसी तरह हम कई और तर्क दे सकते हैं पर कोई भी तर्क नियति के आगे सटीक नहीं और अंततः हमें यही मानना होगा ‘अनहोनी होनी नहीं होनी हो सो होए’ | पशु पक्षियों के लिए आपकी संवेदना को जानकर बहुत ही अच्छा लगा| लगता है इस दुनिया में अभी भी कुछ इंसान जिन्दा है!

    roshni के द्वारा
    July 8, 2011

    चातक जी, काफी समय बाद आप जज पे ए अच्छा लगा … आपके विचार हमेशा की तरह उतम और गूढ़ है …….. इसी तरह अपने विचारों हम तक पहुंचाते रहिएगा धन्यवाद सहित

    Caiya के द्वारा
    July 12, 2016

    How can I see previous weeks information on my Yahoo Pregnancy calender?I set up a pregnancy calendar on my yahoo, and I’m really enjoying it. I like that it gives me information on me and my baby week by week. However, I read something in my last week’s calendar, and I don’t now how to find it. When i click on ‘whole ca8d1ear&#l2n7;, I get a journal type entry , not week by week. Any ideas on how to acess that section?


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