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खंजर सा

Posted On: 6 Jun, 2011 में

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RD3

जब जब वह अपनी दोस्ती का इज़हार करता है ,

एक खंज़र सा सीने के आर पार करता है ………

तोहमत लगा लें सब सर आँखों पे लेगे हम,
इश्क कब कहा किसी से तकरार करता है………

दिखता है खुदा मुझको मेरे यार मैं,
और खुदा मे दीवाना महबूब का दीदार करता है………

कोई गिला है तो चलो सुलझा लें बैठ कर,
क्यों प्यार को रुसवा सरे बाज़ार करता है………

बड़ा आसान है मुस्कुरा के दिलों में जगह बना लेना,
जरा सा हँस क्यों रोकर जीना दुश्वार करता है………

रौशनी चल वक्त से अब आगे निकल चले,
कही दूर दूसरी दुनियां में कोई तेरा इंतज़ार करता है..
…….

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364 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dr. Sanjiv Mishra, Jagran के द्वारा
July 6, 2011

दोस्ती इतनी महंगी भी नहीं होती सच कहूं खंजर सी गहरी भी नहीं होती वो तो दोस्त ही हैं जो संग रहते हैं दुनियावाले तो हमें संगदिल कहते हैं      बहुत अच्छा लिखा है आपना, बधाई -संजीव

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
June 17, 2011

बहुत खूब रोशनी जी … आपकी ये रचना भी बहुत पसंद आई …… कोई गिला है तो चलो सुलझा लें बैठ कर, क्यों प्यार को रुसवा सरे बाज़ार करता है……… बहुत खूब .. इस लाज़वाब पेशकश के लिए ढेरों बधाइयाँ

    roshni के द्वारा
    June 20, 2011

    शैलेश जी धन्यवाद आपके बहुमूल्य विचारों के लिए आभार सहित

supriyo के द्वारा
June 15, 2011

priya रौशनी दीदी बहुत ही सुन्दर कबिता दिल को छु गयी कुछ दर्द को समेटे ये पंग्तिया आपने किस परिस्थिति या मनोभाव से लिखी है मालूम नहीं पर बहुत ही सुन्दर कबिता धन्यवाद आपना ख़याल रखियेगा आपका बिनीत सुप्रियो

    roshni के द्वारा
    June 17, 2011

    सुप्रियो धनयवाद तुमे कविता अच्छी लगी …….. दिल से स्वागत तुम्हारी प्रतिक्रिया का

chaatak के द्वारा
June 10, 2011

रौशनी जी, देर से प्रतिक्रिया करने के लिए माफ़ी चाहता हूँ इस रचना के लिए ५/५ कम लग रहा है इतनी उत्कृष्ट रचनाएँ कम ही पढ़ने को मिलती हैं| अंतिम पंक्ति एस्केपिज्म की ओर इशारा कर रही है मानो इस दुनिया के इंसानी मिथकों को नजदीकी से देखने के बाद कोई अनायास ही कह उठे- ‘Enough! Mine eyes have seen enough!’ खूबसूरत रचना पर एक बार फिर हार्दिक बधाई!

    roshni के द्वारा
    June 10, 2011

    चातक जी , आप हमेशा ही कविता का निचोड़ निकल देते है उसका अर्थ बयाँ कर देते है …‘Enough! Mine eyes have seen enough!’ बिलकुल यही भाव थे लिखते हुए ……… धन्यवाद इतनी गहराई से पढने और विचार व्यक्त करने के लिए ……….. देरी से ही सही आप के विचार तो मिले इसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया

shifali के द्वारा
June 9, 2011

रौशनी , बहुत ही अच्छा लिखा, वाह वाह आगे भी इतनी अच्छी अच्छी रचनाये मिलते रहेगी यही आशा है

    roshni के द्वारा
    June 10, 2011

    शिफाली जी जरुर आगे भी आप की दुआने मिलते रहे तो हम युही लिखते रहेगे

Aakash Tiwaari के द्वारा
June 8, 2011

रोशनी जी, इस वक्त आप बहुत कमाल का लिख रही है…बहुत खूब…बहुत अच्छा लगता है जब ऐसी लाजवाब रचनाये पढने को मिलती है…. मै २ दिन से आपको कमेन्ट देने की कोसिस कर रहा हूँ मगर ये कोड इनवैलिड हो जा रहा है ..एक बार तो सोचा की अब कमेन्ट ही न दूं..लेकिन फिर ये लगा की कहीं आप नाराज न हो जाए… दो शब्द लिख रहा हूँ…. *************************************************************** चाहते जो बताई दिल की उनको वो नाराज हो गए, कल तक हम जिनके थे उनके लिए बेगाने आज हो गए, बहुत रोया था उनकी दर पर एक रात वो हँसते ही रहे आज वो आंसू बहा रहे है जब हम राख हो गए. ************************************************************** आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    June 8, 2011

    आकाश जी, नाराज होने का तो सवाल ही नहीं है क्युकी इस समस्या से आप ही नहीं हम सब ही परेशान है ४-५ कोशिश के बाद थक हर कर कमेन्ट लिखना ही बंद करना पड़ता है ……… आप जब भी तारीफ करते है दिल खोल कर करते है ……. धन्यवाद इतनी तारीफ के लिए दो शब्द बहुत खूब है ………. धन्यवाद

    Jayne के द्वारा
    January 12, 2014

    Wow, your post makes mine look febeel. More power to you!

    Gerri के द्वारा
    July 12, 2016

    You get a lot of respect from me for writing these helpful arlsitec.

आर.एन. शाही के द्वारा
June 8, 2011

रौशनी जी, आपकी नायाब बैटिंग फ़िर चालू हो गई, अच्छा लग रहा है । थोड़ी देर हो गई पहुंचने में, इसके लिये माफ़ी चाहूंगा । रचना सचमुच वक़्त से आगे है । बधाई ।

    roshni के द्वारा
    June 8, 2011

    शाही जी धन्यवाद ….. आप बड़े है तो माफ़ी जैसे शब्द इस्तेमाल न किया कीजिये .. अपनी इतनी व्यवस्ता के बावजूद समय निकल कर अपने मेरी रचना को पढ़ा और अपने कीमती विचार दिए यही काफी है …. प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार सहित

IDIOT के द्वारा
June 7, 2011

अछे शब्द हैं रोशनी जी बाह……………..चल वक्त से अब आगे निकल चले, कही दूर दूसरी दुनियां में कोई तेरा इंतज़ार करता है..……. http://idiot.jagranjunction.com/

    roshni के द्वारा
    June 7, 2011

    धन्यवाद प्रशंसा के लिए

Harish Bhatt के द्वारा
June 7, 2011

roshni ji namastey……. बहुत ही अच्छी कविता ke liye hardik badhayi.

    roshni के द्वारा
    June 7, 2011

    harish ji thanks for ur precious comment thanks a lot

NIKHIL PANDEY के द्वारा
June 6, 2011

जब जब वह अपनी दोस्ती का इज़हार करता है , एक खंज़र सा सीने के आर पार करता है … रौशनी जी बहुत खूब पहली ही पंक्ति से आपकी रचना दिल में उतर गई बहुत खूब ..

    roshni के द्वारा
    June 7, 2011

    निखिल पाण्डेय जी काफी दिनों बाद आप मंच पर आए अच्छा लग रहा है अब धीरे धीरे सब लौट रहे है … ये बहुत ही अच्छी बात है ……. कविता को पसंद करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार सहित

Alka Gupta के द्वारा
June 6, 2011

रोशनी जी, बहुत लम्बे समय के बाद हर बार की तरह आपकी सुन्दर रचना पढने को मिली बहुत ही बढ़िया रचना के लिए बधाई !

    roshni के द्वारा
    June 7, 2011

    अलका जी , और हर बार की तरह आपसे प्रोत्सहन और प्यार मिला इसके लिए दिल से शुक्रिया धन्यवाद सहित

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
June 6, 2011

लंबे समय बाद आपके किसी ब्लॉग पर प्रतिक्रिया देने की कोशिश कर रहा हूँ….. कोशिश इस लिए क्योकि बार बार कोड इंवेलिड हो जाता है…….. एक और सुंदर रचना …. दिखता है खुदा मुझको मेरे यार मैं, और खुदा मे दीवाना महबूब का दीदार करता है……… ———————  सुंदर पंक्तियों से सजी इस रचना के लिए बधाई…..

    roshni के द्वारा
    June 7, 2011

    पियूष जी मै भी इस समस्या से परेशान हु आज कितने दिनों बाद कमेन्ट कर पा रही हूँ …. बार बार कोड-invalid होने से परेशानी के साथ साथ समय भी बर्बाद होता है …मगर अबी तक इसका कोई हल नहीं निकाला जा रहा ……. एक बार फिर से प्रोत्सहन और तारीफ के लिए शुक्रिया

    Elouise के द्वारा
    July 12, 2016

    Hoi! Ik zie hier dat er een piratenstratego werd gehouden. Ik vroeg me af of ik die als word/excel bestand(oid) kon krijgen. In de zomer ben ik als vrijwilliger leiding bij een zomerkamp van Stichting Vakantie Kind en hebben wij ook als thema ὖpiraten” We wilden ook een levend stratego houden, en als de kaartjes beschikbaar zijn, zou ik er graag gebruik van willen maken.

nishamittal के द्वारा
June 5, 2011

रौशनी सदा की तरह खूबसूरत रचना.दूसरी दुनिया नहीं अब तो इसी दुनिया में तुम्हारा सदा का साथ निभाने वाला साथी मिल गया है,अतः अब यहीं पर उनके +हम सबके साथ यूँ ही हंसी खुशी अपनी रचनाओं से आनंदित करो.सुन्दर रचना के लिए बधाई.

    anju के द्वारा
    June 5, 2011

    रौशनी जी जरा हँस रोकर क्यों जीना दुश्वार करता है .. हमेशा की तरह सुंदर कविता \\\\\\\\\\\\\\\’ युही लिखते रहिये

    roshni के द्वारा
    June 7, 2011

    निशा जी नमस्कार , जी अपने सही कहा………. इसलिए अब कही और जाना कैंसल … यु बी आप सब इतने अच्छे लोगों का साथ वहां थोड़ी न मिलेगा …….. रचना आपको अच्छी लगी धन्यवाद

    roshni के द्वारा
    June 7, 2011

    अंजू जी धन्यवाद आपके प्रोत्सहन के लिए ……

संदीप कौशिक के द्वारा
June 5, 2011

रोशनी जी, पहली पंक्ति पढ़ते ही बस….मानो दिल में गहरे तक उतर गयी हो…. . जब जब वह अपनी दोस्ती का इज़हार करता है , एक खंज़र सा सीने के आर पार करता है ……… . . आपको बहुत-बहुत बधाई इतनी अच्छी रचना के लिए !!

    roshni के द्वारा
    June 7, 2011

    संदीप जी , एक कवी एक कवी की तारीफ करे तो जरुर रचना अच्छी ही होगी ……… तारीफ के लिए दिल से धन्यवाद

R K KHURANA के द्वारा
June 4, 2011

प्रिय रौशनी जी, बहुत खूब ! बहुत ही सुंदर ! कोई गिला है तो चलो सुलझा लें बैठ कर, क्यों प्यार को रुसवा सरे बाज़ार करता है… इन पंक्तियों ने मन मोह लिया ! लेकिन अपने आखिर में यह क्या लिख दिया ! रौशनी चल वक्त से अब आगे निकल चले, कही दूर दूसरी दुनियां में कोई तेरा इंतज़ार करता है.. नहीं भाई ! अभी से दूसरी दुनिया की बातें ….न..न….न…न…न..न… राम कृष्ण खुराना

    roshni के द्वारा
    June 7, 2011

    Respected खुराना जी नमस्कार बस कवी के मन मे जो आया वोह ऐसे ही लिख दिया.. युही कई बार इन्सान युही बेठे बेठे सोचता है की दूसरी दुनिया कैसी होगी सो इसी मोह ने ये लिखवा दिया ……….लेकिन आप सब इतने प्यार देने वाले अपनों को छोड़कर अभी नहीं जाना चाहुगी . और हाँ बस इसी तरह स्नेह और आशीर्वाद देते रहियेगा आभार सहित

narayani के द्वारा
June 4, 2011

नमस्कार रौशनी जी बहुत ही भाव पूर्ण रचना है क्यों रोकर जीना दुश्वार करता है ,बहुत सुन्दर धन्यवाद नारायणी

    roshni के द्वारा
    June 7, 2011

    नारायणी जी , तारीफ के लिए शुक्रिया……….. आभार सहित

allrounder के द्वारा
June 4, 2011

रौशनी जी बड़े दिनों बाद इतनी अच्छी रचनाओं के साथ आई हो दूसरी दुनिया मैं जाने की बात मत कीजिये वर्ना हम लोगों को इतने गहरे jajbat कहाँ पढने को मिलेंगे ! एक बार फिर से अपनी कलम का जादू चलने के लिए हार्दिक बधाई !

    roshni के द्वारा
    June 7, 2011

    सचिन जी , धन्यवाद दूसरी दुनिया में देर सवेर तो जाना ही है …मगर हाँ अभी फ़िलहाल यही हूँ… आप के द्वारा रचना पसंद की गयी धन्यवाद


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