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साजिश

Posted On: 28 May, 2011 में

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boatजिन्दगी से जीने की ख्वाइश भी नहीं की,
मौत को आने की सिफारिश भी नहीं की…..

रूह पे करता रहा वो जुलम हर तरह,
दिल ने जरा सी राहत की गुजारिश भी नहीं की…..

जल गया सीना, जिस्म पे पड़ गए छाले,
उन पत्थर सी आँखों ने जरा सी बारिश भी नहीं की…..

वो साहिल पे बैठा था और फिर भी बह गया,
समंदर ने लगता है कही कोई साजिश तो नहीं की…..

अपनी निगाह से वो सवाल कर के चल दिया,
और मेरे इक जवाब की चाहत भी नहीं की…..

रौशनी क्यों शब्द तुझ से रूठ गए है,
सोचो के परिंदों ने कही बगावत तो नहीं की…..

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47 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

amarshiv के द्वारा
November 14, 2011

Rosni hokar bhi andero se bhagti hai aap Rachan bahaut hi achi hai

rameshbajpai के द्वारा
July 10, 2011

वो साहिल पे बैठा था और फिर भी बह गया, समंदर ने लगता है कही कोई साजिश तो नहीं की रौशनी जी आज कई कोशिशो के बाद कमेन्ट पोस्ट हुआ | इसी क्रम में अनायास इस पोस्ट पर पंहुचा | भावो से समन्दर से निकली यह नायब पोस्ट | बधाई

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
June 17, 2011

रोशनी जी …… बेहद खूबसूरत ग़ज़ल पेश की आपने ….. आपकी इस ग़ज़ल का हर शेर लाज़वाब लगा ….. बस ऐसे ही लिखती रहें …. —————————————————– जिन्दगी से जीने की ख्वाइश भी नहीं की, मौत को आने की सिफारिश भी नहीं की….. —————————————————– वो साहिल पे बैठा था और फिर भी बह गया, समंदर ने लगता है कही कोई साजिश तो नहीं की….. —————————————————— इन दो शरों ने तो मन प्रसन्न कर दिया | अहसासों की गहराई को आपने इतनी खूबसूरती से लफ़्ज़ों में उकेरा है, की पढ़ कर मन खुश हो जा रहा है |

    roshni के द्वारा
    June 20, 2011

    शैलेश जी रचना को पसंद करने के लिए और तारीफ के लिए बहुत बहुत आभार ..

manoranjan thakur के द्वारा
June 2, 2011

रौशनी जी आप न होती तो अँधेरा होता आप है तो रौशनी है फिर कोइ  वगाबत कऱे  जिंदगी में तो फर्क कहाँ यूं ही रोशन होता रहे बगिया आपका

    roshni के द्वारा
    June 2, 2011

    मनोरंजन जी धन्यवाद तारीफ के लिए … आप की लिखी हुई पंकितयां भी बहुत अच्छी है धन्यवाद सहित

surendra shukl Bhramar 5 के द्वारा
June 1, 2011

रौशनी जी बहुत सुन्दर भाव निम्न पंक्ति मन को छू गयी -बधाई हो -ये बेदर्द जमाना है जी जल गया सीना, जिस्म पे पड़ गए छाले, उन पत्थर सी आँखों ने जरा सी बारिश भी नहीं की… शुक्ल भ्रमर 5

    roshni के द्वारा
    June 1, 2011

    शुक्ल जी .. धन्यवाद . वैसे जमाना बेदर्द न होता तो कविता कहाँ से आती… ?? कुछ न कुछ अच्छा छिपा ही होता है हर किसी दुःख में सुख में … आपको कविता अच्छी लगी जानकर ख़ुशी हुई तारीफ के लिए धन्यवाद

AMIT KR GUPTA के द्वारा
June 1, 2011

रोशिनी जी नमस्कार ,कैसी हैं ?आपकी दस लाइन की रचना ने बहुत सी बाते कह गई .अच्छी प्रस्तुति दिल खुश हो गया .बधाई अमित कुमार गुप्ता हाजीपुर वैशाली बिहार http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    June 1, 2011

    अमित जी नमस्कार, मै ठीक हूँ आप कैसे है ? रचना आपको पसंद आयी जानकर अत्यंत अच्छा लगा ……… एक बार फिर से आपके अनमोल विचारों के लिए तहे दिल से शुक्रिया … आभार सहित

alkargupta1 के द्वारा
May 31, 2011

रौशनी जी , काफी समय बाद आपकी उत्तम कोटि की रचना पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा | शब्द सौन्दर्य व भाव सौन्दर्य पूर्ण काव्य रचना ! आपकी हर रचना में बड़े ही गहन भाव मिलते हैं उम्मीद करती हूँ अब आगे भी सदा की तरह आपकी सुन्दर रचनाएँ मंच पर आती रहेंगी ! बधाई !

    roshni के द्वारा
    June 1, 2011

    अलका जी नमस्कार कुछ व्यवस्ता के चलते समय ही नहीं मिला और जब मिला तो कुछ लिखा दिया ……….हमेशा की तरह आप से उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया आपके बहुत ही अच्छा लगा .. इसी तरह अपना स्नेह देते रहिएगा धन्यवाद सहित

Baijnath Pandey के द्वारा
May 31, 2011

रौशनी जी , बहुत खूब, शब्द शब्दों की विवेचना कर सकते है किन्तु, भावनाओं की नहीं ……….इसलिए इस रचना की गहराई को शब्द दे पाना संभव नहीं | मेरी गुजारिश है की बस यूँ हीं लिखती रहें ….. इस ख़ूबसूरत पेशकश के लिए आपका आभार

    roshni के द्वारा
    May 31, 2011

    पाण्डेय जी , आपके विचार जानकर अच्छा लगा ……… तहे दिल से शुक्रिया प्रशंसा के लिए … इसी तरह अपने कीमती विचारों से अवगत करवाते रहिएगा …….. धन्यवाद सहित

आर.एन. शाही के द्वारा
May 30, 2011

रौशनी जी, कविता हो या कोई गद्यात्मक रचना, आप की कृतियों के विषय में शब्दों में लिख पाना मेरे लिये हमेशा दुष्कर रहा है । क्योंकि अल्फ़ाज़ में छिपे जज़्बात इतने गहरे होते हैं कि अल्फ़ाज़ उनमें कहीं विलीन हो जाते हैं । ऊपर की लाइनों के शब्द भी इनमें छिपी भावनाओं के आगे कुछ बौने से ही हैं । परिन्दे क्या बग़ावत करेंगे, वे निरीह प्राणी तो बस यही गुज़ारिश करते होंगे कि मालिक़ की दया से उनके आका का अगला कदम उनके अस्तित्व के लिये कहीं कोई और झटका तो साबित नहीं होने वाला ! बहुत दिनों बाद एक बहुत उम्दा रचना । अफ़सोस है कि आपकी रचना के विषय में फ़ेसबुक से पता चला, और मैं खुद को रोक नहीं पाया । कुछ सांसारिक जंजाल मुझे नियमित नहीं होने दे रहे हैं, निज़ात मिलते ही मैं भी लिखना शुरू करूंगा । बस ख्वाहिश है कि आप पूर्व की भांति ही लिखती रहें । धन्यवाद ।

    roshni के द्वारा
    May 30, 2011

    शाही जी नमस्कार आपकी और से विस्तृत विचार जानकर हमेशा की तरह इस बार भी बहुत ही अच्छा लगा ……. एक बहुत ही अच्छा अनुभवी लेख जब दुसरे लिखने वाले का होंसन बढता है तो अच्छा लगता है ………इसी तरह आगे भी आपका मार्ग दर्शन मिलते रहे …. और आप भी जल्दी ही jj पे वापसी करे ताकि हमे अच्छे लेख पड़ने को मिल सके …..यु भी सरे पुराने ब्लोग्गेर्स अब बहुत ही कम दीखते है यहाँ पर…….. धन्यवाद सहित

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 30, 2011

    रोशनी जी, मै भी चाहता हूँ की सारे पुराने ब्लोगर एक साथ फिर मंच पर आ जाए तो क्या बात है..बहुत सूनापन और एक बनावटी हंसी ही दिख रही है चारो तरफ…आपसबके इन्तेजार में…. ***************************** एक अकेला आकाश तिवारी *****************************

    roshni के द्वारा
    May 31, 2011

    आकाश जी सही कहा अपने पुराने साथी यहाँ न पाकर काफी सूनापन सा लग रहा है जागरण मे…. आशा है की सब जल्द ही वापस आयेगे .

neha के द्वारा
May 30, 2011

well said ……… i always admire your poems….its wonderful.

    roshni के द्वारा
    May 30, 2011

    thanks a lot neha

anju के द्वारा
May 30, 2011

roshni ji, hamesha ki tarah ek bahut hi badiya rachna…. dil ko chukar jati hui.. wah wah badhai

    roshni के द्वारा
    May 30, 2011

    अंजू जी काफी समय बाद आपकी राय मिली धन्यवाद

Aakash Tiwaari के द्वारा
May 29, 2011

रोशनी जी, बहुत दिनों बाद आपको इस मंच पर देखा…साथ में एक नायाब पेसकस के साथ.. रूह पे करता रहा वो जुलम हर तरह, दिल ने जरा सी राहत की गुजारिश भी नहीं की….. वाह क्या बात है…मान गए आपको… ***************************** एक अकेला आकाश तिवारी *****************************

    roshni के द्वारा
    May 29, 2011

    आकाश जी काफी दिनों के बाद मंच पर नयी रचना लिखते हुए मुझे भी बड़ा अछा लग रहा है ..मंच से ज्यदा दिन दूर नहीं रहा जा सकता ..कविता के जरिये ही खुसी मिलती है बस उसी को सब में फेलाना चाहती हूँ … रचना आपको पसंद आयी धन्यवाद तारीफ के लिए दिल से शुक्रिया

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 30, 2011

    आपकी इस नायब पेसकस की बराबरी तो नहीं कर सकता मगर कुछ लिख तो जरूर सकता हूँ. ********************************************************* हम तड़पते है दर्द से तो मजा उनको आता है.. आज उनकी मुस्कराहट की खातिर हम रो पड़े….. ********************************************************** **************************** एक अकेला आकाश तिवारी ****************************

    roshni के द्वारा
    May 30, 2011

    आकाश जी , बहुत ही खुबसूरत शेर कहा आपने ………. एक शेर मेरी और से मेरी ख़ुशी के लिए एक बार मुस्कुरा दे मुझे लगेगा मेरी दुआ असर कर गयी है मैंने मांगी थी जो ख़ुशी तेरे लिए उस ख़ुशी से तेरी झोली भर गयी है .. धन्यवाद सहित

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    May 30, 2011

    रोशनी जी, आपने जो शेर लिखा वो बहुत अच्छा था..कुछ शब्द फिर लिख रहा हूँ… *********************************************************** झोली भरी खुशियों की कभी देखा नहीं, कोई दुआ मेरे लिए करेगा ऐसा कभी सोचा नहीं, आज आँखों में आंसू भर गए उनकी दुआ सुनकर, उनकी खातिर खुद को हंसने आज रोका नहीं… ************************************************************ एक अकेला आकाश तिवारी *****************

R K KHURANA के द्वारा
May 29, 2011

प्रिय रौशनी जी, बहुत दिनों के बाद तीन उडती हुई चिड़ियाँ दिखाई दी ! जहाँ आपकी रचना देख कर मन प्रसन्न हुआ, कविता पढ़ कर उससे भी ज्यादा ख़ुशी हुई ! बहुत सुंदर कविता लिखती है हैं आप रौशनी क्यों शब्द तुझ से रूठ गए है, सोचो के परिंदों ने कही बगावत तो नहीं की… बहुत सुंदर राम कृष्ण खुराना

    roshni के द्वारा
    May 29, 2011

    आदरनिये खुराना जी आप का आशीर्वाद युही मिलता रहे बस यही इच्छा है …..आप अपनी प्रतिक्रिया से सदेव ही प्रोत्साहित करते है ….. और दिल से खुसी जाहिर करते है …….. बहुत बहुत धन्यवाद आपके स्नेह के लिए आभार सहित

priyasingh के द्वारा
May 29, 2011

रोशनी क्यों शब्द तुझसे रूठ गए है, सोचो के परिंदों ने कहीं तुझसे बगावत तो नहीं की ……… आजकल ये परिंदे मुझसे बगावत किये हुए है…… पर आपसे तो कहीं से भी बगावत करते हुए नज़र नहीं आते ……….. बेहतरीन रचना ……

    sanjay kumar tiwari के द्वारा
    May 29, 2011

    vo sahil pe baitha tha …….ye do panktia bahut hi khobsurat ban pari hai ……dhanyavad Roshani ji ek sunder krati prastut karne ke liye

    roshni के द्वारा
    May 29, 2011

    प्रिया जी नमस्कार आप से क्यों बगावत कर दी इन्होने??? … ये तो मुझसे भी थोड़े दिन दूर रहे .. कागज पे उतर ही न रहे थे ……अज कही जाकर माने है .. आप भी मनाने की कोशिश कीजिये मान जायेगे मगर आप से तो ये नाराज नहीं हो सकते ये मुझे यकीं है ,,, प्रशंसा के लिए दिल से शुक्रिया धन्यवाद् सहित

    roshni के द्वारा
    May 29, 2011

    संजय जी आपको ये पंकित अच्छी लगी धन्यवाद कृति को पसंद करने के लिए भी बहुत बहुत शुक्रिया धन्यवाद सहित

    priyasingh के द्वारा
    May 30, 2011

    आपके मुह में घी शक्कर …अरे नहीं घी शक्कर तो पुराना है आपके मुह में डेरी मिल्क ………..आप जैसे शब्दों के कलाकार ने कहा है तो शब्द भी विचारों में आ ही जायेंगे ………….

    roshni के द्वारा
    May 30, 2011

    प्रिया जी आप खुद ही एक अच्छी कलाकार है … और हाँ डेरी मिल्क वाली बात तो बहुत ही मीठी है ….. शकर पुरनी है और कुछ मीठा हो जाये ……चलिए अप्प जब अपनी अगली पोस्ट करेगी तो मेरी डेरी मिल्क लाना न भूलियेगा ….. आपकी दोस्त

nikhil के द्वारा
May 29, 2011

वाह रौशनी जी, ज़िन्दगी से जीने की ख्वाहिश भी नहीं की, मौत को आने की सिफारिश भी नहीं की. जब पहले अल्फाज़ ही दिल की गहराईयों तक उतर जाएँ तो आगे के अल्फाजों के क्या कहने. आपने फिर से एक सुन्दर रचना को पढ़ने का अवसर दिया, शुक्रिया. बस यूँही जागरण के मंच को अपने शब्दों से हरा-भरा रखें.

    roshni के द्वारा
    May 29, 2011

    निखिल जी बस माँ सरवती का आशीर्वाद और आप जैसे दोस्तों की होंसला अफजाई है जो कुछ लिख पाती हूँ … और आप सबको पसंद आता है .. बस इसी तरह अपने विचार से अवगत करते रहिये ….. इतनी तारीफ के लिए दिल से शुक्रिया धन्यवाद सहित

वाहिद काशीवासी के द्वारा
May 29, 2011

रौशनी जी, लंबे वक़्त के बाद आपकी वापसी सुखद रही| आपके इस भावनात्मक ज्वार में डूबते उतराते अच्छा अनुभव हुआ| एक शेर मेरी तरफ़ से भी आपकी ग़ज़ल में .. – “हमने तो सब लुटा दिया तेरे एक लफ़्ज़ पर, पर तूने एक ज़रा सी नवाज़िश भी नहीं की, क्या-क्या न कहा हमने तेरी एक इल्तजा पर, हम चुप खड़े रहे तुमने कोई फ़रमाईश भी नहीं की;” शुक्रिया आपका, 

    roshni के द्वारा
    May 29, 2011

    वाहिद जी शेर के द्वारा किसी शयरी की तारीफ बहुत ही अच्छी लगती है … आपका शेर बहुत पसंद आया इसी तरह अपनी शायरी से होंसला बढ़ाते रहिएगा …… तहे दिल से शुक्रिया आपके विचारों के लिए .. धन्यवाद सहित

RaJ के द्वारा
May 29, 2011

शब्द रौशनी se कभी रुठते नहीं , शायरी से रिश्ते यू छूटते नहीं रौशनी ji badhai http://www.jrajeev.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    May 29, 2011

    राज जी सच कहा आपने शायरी से रिश्ते जल्दी नहीं छुट सकते कहनी न कही साथ निभाने आ ही जाते है … धन्यवाद सहित

संदीप कौशिक के द्वारा
May 28, 2011

रोशनी जी, कई दिनों के इंतज़ार के बाद आपने अपनी इस बेहतरीन कृति से परिचित कराया | पंक्ति दर पंक्ति दिल में उतरती गई | बहुत-बहुत आभार आपका……इसे इस मंच पर साझा करने के लिए !!

    roshni के द्वारा
    May 29, 2011

    संदीप जी जानकर अच्छा लगा की हर पंकित पसंद ई … प्रोत्सहन के लिए बहुत बहुत आभार .. धन्यवाद सहित

allrounder के द्वारा
May 28, 2011

रोशनी जी, नमस्कार शब्द चाहें भी तो रोशनी से रूठ नहीं सकते हाँ कुछ समय के लिए हाथ से छूट सकते हैं, मगर सदा के लिए रूठ नहीं सकते और आपकी इस कविता का एक एक शब्द इस बात का गवाह है ! आपकी इस बेमिशाल कृति के लिए आपको हार्दिक बधाई !

    roshni के द्वारा
    May 29, 2011

    सचिन जी , namskar hamesha ki tarah protshan ke liye dhanywad … haan ye sach hai ki kuch der ke liye ye parinde kahi kho gaye the badi mushkil se wapas aye hai …… tarif ke liye shukriya dhanywad sahit

nishamittal के द्वारा
May 28, 2011

बहुत सुन्दर रचना roshni ,सदा की तरह ,बहुत बधाई पहला कमेन्ट मेरा.

    roshni के द्वारा
    May 29, 2011

    निशा जी आपका और से पहला कमेन्ट पाकर बहुत ही अच्छा लगा …. इसी तरह अपना सिंह बनाये रख्येगा … धन्यवाद सहित


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