lets free ur mind birds

Just for Soul

53 Posts

37858 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 591 postid : 688

आदमी अख़बार है

Posted On: 6 Apr, 2011 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मिलते है जब भी पूछते है कोई नयी खबर,
हर आदमी अब तो एक चलता फिरता अख़बार है……..
जिस से पूछों कहता है कुछ ठीक नहीं है,
हर शख्स को अब फिकरों ने कर दिया बीमार है………
छोटी सी उम्र मे भी लगता है बूढ़ा,
दब गया है वो गरीबी तले जिन्दगी इक पहाड़ है……
जब भी देखता हु उसको चुप सा मै हो जाता हूँ,
वो शख्स मासूम सा अब क्यों सबका गुनहगार है……
वो बार बार कहता है मुझको एक बार तो आजमा,
तुझको न हो खुद पे मगर मुझको तो ऐतबार है…….
रिश्तों को बचाते है आजकल सलाहकार,
दो दिलों के बीच अब कितनी सख्त सी दिवार है………
यों तो अब दुनिया में कुछ हासिल करना मुश्किल नहीं,
दो प़ल अपनों के संग बिताना हाँ मगर दुश्वार है……

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

188 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Gabrielle के द्वारा
July 12, 2016

Bom dia to0hoin&#823n; Gostaria de parabenizar a vc pela suas campanhas, sou ouvinte da radio a anos, naum deixo de ouvir um so programa, q deus abençoe a vc e a todos os locutores e ouvintes da radio,desde ja agradecemos todos da minha familia e a familia Thyssenkrupp metalurgica Santa Luzia. Abraços.

pramod chaubey के द्वारा
October 5, 2011

ठीक बात.

surendr kumar shukla bhramar 5 के द्वारा
May 23, 2011

रौशनी जी इस आज के समाज का सुन्दर ढंग से प्रस्तुतिकरण किया गया आदमी अख़बार ही नहीं मशीन बन गया है तेल पानी भरो रोबोट सा चार्ज करो चलते बनो किसके पास वक्त है किसी का दुःख दर्द सुनने का सब कुछ ठीक हैं न ?/ लोग बोल आगे बढ़ जाते हैं -खूबसूरत रचना के लिए बधाई -निम्न पंक्तियाँ बहुत भायीं यों तो अब दुनिया में कुछ हासिल करना मुश्किल नहीं, दो प़ल अपनों के संग बिताना हाँ मगर दुश्वार है… सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर ५

    roshni के द्वारा
    May 25, 2011

    शुक्ल जी , apke विचार जान कर अच्छा लगा ,, इसी तरह apne विचार से रूबरू करवाते रहिएगा … dhanywad sahit

Nikhil के द्वारा
May 21, 2011

खूबसूरत कविता. इन्सान की कशमकश और समाज में आये बदलाव का बखूबी चित्रण किया है आपने. कविता के लिए आभार.

    roshni के द्वारा
    May 21, 2011

    निखिल जी कविता का मूल समजने के लिए और आपके विचारों के लिए तहे दिल से शुक्रिया धन्यवाद सहित

aftab azmat के द्वारा
April 26, 2011

हर आदमी अब तो एक चलता फिरता अख़बार है…….. रौशनी जी, नमस्ते…आपने बहुत यथार्थ भरी कविता लिखी है,..बधाई स्वीकार करें…

    roshni के द्वारा
    April 29, 2011

    आफताब जी तारीफ के लिए शुक्रिया …… इसी तरह अपने विचारों से अवगत करवाते रहिएगा धन्यवाद

Harish Bhatt के द्वारा
April 21, 2011

रोशनी जी नमस्ते….. सच कहा आपने यों तो अब दुनिया में कुछ हासिल करना मुश्किल नहीं, दो प़ल अपनों के संग बिताना हाँ मगर दुश्वार है… अच्छी कविता के लिए हार्दिक बधाई

    roshni के द्वारा
    April 29, 2011

    हरीश जी नमस्कार आपके विचारों के लिए धन्यवाद

    Roxanna के द्वारा
    July 12, 2016

    Thank you Mary, that is so nice of you! The next time, we’ll have our breakfast gettgote-her in the Palais Royal so you can experience my view at first hand!

rahulpriyadarshi के द्वारा
April 21, 2011

बहुत सही कहा है रौशनी जी की रोष्टों को बचाने के लिए अब सलाहकारों की मदद लेनी पड़ रही है,दो दिल हमेशा दो दिल ही रहते हैं,तभी ये समस्या होती है,अगर एक हो जाएँ तो सारा लफड़ा ही मिट जाएगा,बहुत अच्छी उद्देश्यपरक अभिव्यक्ति,साझा करने के लिए धन्यवाद.

    roshni के द्वारा
    April 21, 2011

    राहुल जी आपके विचारों के लिए बहुत बहुत शुक्रिया .. आज के भोतिकवाद के युग में प्यार की जगह अनदेखी सी खाई ने ले ली है .रिश्तों में अजीब सा अनजानापन उभर आया है धन्यवाद सहित

coolbaby के द्वारा
April 9, 2011

Yes, Words have made us weak . But there are words about affection and devotion …………and these words are flickering stars gleaming over the globe. We searched the globe Day in day out Web chatting Orkuting ,skyping Blogging ,facebooking And Twittering Internet made us finally lovers Though living On the two sides of the globe !

    roshni के द्वारा
    April 12, 2011

    thank u for ur precious comment

alkargupta1 के द्वारा
April 7, 2011

रौशनी जी, बहुत ही सुन्दर भावाभिव्यक्ति है ! आज सही में दो दिलों के बीच बहुत बड़ी दीवार ही खड़ी हो गयी है रिश्तों में मधुरता समाप्त ही हो गयी है ! बहुत दिनों बाद आपकी श्रेष्ठ रचना पढने को मिली !

    roshni के द्वारा
    April 8, 2011

    अलका जी नमस्कार आप की प्रतिक्रिया हमेशा ही उत्साहवर्धक होती है ….. धन्यवाद सहित

chaatak के द्वारा
April 7, 2011

बहुत खूब रौशनी जी, एक बार फिर आपके लिए कहना होगा- Old head on young shoulders. कुछ इन्ही भावो के साथ कुछ पंक्तियाँ मेरी और से आपकी कविता के लिए- खामोश निगाहों की फरियाद कौन जाने, रिसते हुए ज़ख्मों की आवाज़ कौन जाने ? सुनता है तब खुदा भी जब चीखता है मुल्ला, मन के स्वरों का वंदन भगवान कौन जाने ? चुप साध ‘कृष्ण’ बैठा अब देख रहा हलचल, तूफ़ान ले हिलोरें बीच ताल कौन जाने ? वो बोलता नहीं पर कुछ चाहता है कहना, इस मूक इबारत के सुर ताल कौन जाने ? कहना नहीं है मुश्किल, वो जानता है फिर भही, वो आप हो रहा है, क्यूँ मौन कौन जाने ? अच्छी रचना पर ढेरों मुबारकबाद!

    roshni के द्वारा
    April 7, 2011

    चातक जी प्रशंसा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ……. कविता के रूप में आपकी दी गयी प्रतिक्रिया बहुत ही अच्छी लगती है .. सुंदर शब्दों के साथ सुंदर कविता कहने के लिए धन्यवाद …….. आभार सहित

kaushalvijai के द्वारा
April 7, 2011

roshni ji, acchi soch aur panktiyon ke liye sadhuvad. see at http://www.kaushalvijai.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    April 7, 2011

    कौशल जी धन्यवाद

ashvinikumar के द्वारा
April 7, 2011

रौशनी जी मंच पर पुनः आगमन का हार्दिक स्वागत ,,उडती चिड़िया के साथ लाल गुडिया भी लग जाए तो फिर क्या बात है ,,,,,,,,,,,,,,,जय भारत

    roshni के द्वारा
    April 7, 2011

    अश्विनी जी वन्दे मातरम तारीफ के लिए तहे दिल से धन्यवाद

Tufail A. Siddequi के द्वारा
April 7, 2011

रौशनी जी अभिवादन, “छोटी सी उम्र मे भी लगता है बूढ़ा, दब गया है वो गरीबी तले जिन्दगी इक पहाड़ है……, यों तो अब दुनिया में कुछ हासिल करना मुश्किल नहीं, दो प़ल अपनों के संग बिताना हाँ मगर दुश्वार है……” चंद लाइनों में आम आदमी की मुसीबतों, रिश्तों में दूरियों और इन सबके बीच आशाओं को पकडे रख कर आगे बढ़ने की चाह, सबको बड़ी खूबसूरती और परिपक्वता के साथ आपने प्रस्तुत किया है. बहुत आभार.

    roshni के द्वारा
    April 7, 2011

    Siddequi जी नमस्कार अपने रचना का मर्म खूब पहचाना ……. ये तो वर्तमान का सच है जिसे बस सब छुपाते है विचारों के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

    Thiiaguinho के द्वारा
    January 10, 2014

    An intgelilent point of view, well expressed! Thanks!

allrounder के द्वारा
April 7, 2011

रोशनी जी नमस्कार , एक बेहतरीन कृति के साथ मंच पर पुन उपस्तिथि के लिए बधाई और हार्दिक स्वागत !

    roshni के द्वारा
    April 7, 2011

    सचिन जी नमस्कार ……. स्वागत के लिए धन्यवाद और रचना को पसंद करने के लिए भी बहुत बहुत शुक्रिया .. आशा है की पहले की तरह फिर से आपके विचार मिलते रहेगे धन्यवाद सहित

abodhbaalak के द्वारा
April 7, 2011

रौशनी जी वेलकम बैक, आजके कडवे सच को बड़ी ही सरलता और सुन्दरता से आपने अंकित किया है…. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    April 7, 2011

    अबोध जी नमस्कार welcome के लिए शुक्रिया ……. और रचना पसंद करने के लिए भी

rachna varma के द्वारा
April 7, 2011

रौशनी आपको फिर से इस मंच पर देख कर अच्छा लगा ,आपकी कविताये तो हमेशा ही एक अनोखे अंदाज में होती है रिश्तो तथा आदमी के बीच बढती दूरियों का अच्छा वर्णन !

    roshni के द्वारा
    April 7, 2011

    रचना जी , फिर से आप से मिल कर मुझे भी बहुत अच्छा लगा ………. रिश्तों और आदमी के बिच में ये दूरियां जाने अनजाने न जाने कहाँ से आ जाती है …. सबके साथ होते हुए भी सब एक खालीपन से भरे हुए है प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

वाहिद काशीवासी के द्वारा
April 7, 2011

सुन्दर भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिए आभार,

    roshni के द्वारा
    April 7, 2011

    वाहिद जी होंसला अफजाई के लिए धन्यवाद


topic of the week



latest from jagran