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आइने अक्सर टूट जाते है -Valentine Contest

Posted On: 10 Feb, 2011 Others में

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परछाईयां हमेशा साथ रहती है
आईने टूट जाया करते है..
दिल के बंधन चलते है उम्र भर दूर तलक
दिमाग के रिश्ते राह में छूट जाया करते है…
.

जो जैसा है उसे उसी रूप में प्यार करना ही प्यार की जीत है … जब हम प्रेम में होते है तो उस समय हमें एक दूजे की कमियां नहीं दिखाई देती ….. मगर कुछ समय बाद तुलना करने लगते है , कमियां खोजने लगते है और होता यों है की अक्सर अपने साथी को बदलने की कोशिश में पता ही नहीं चलता की कब अपने साथी को हम अपना आइना बना लेते है .. उसे इतना बदल देते है की वह हमारे जैसा बन जाता है .. और फिर भी हम उससे ही शिकायत करते है की तुम बदल गए या बदल गयी … ये तो वही बात हुई खुद को आईने में देखना और खुद से ही शिकायत करना…… प्यार मैं आइना नहीं परछाई बनो एक दूसरे की जो साथ साथ चलें , कभी बड़े तो कभी घटे लेकिन जुदा न हो-टूटे ना… यों भी किसी से इसलिए प्यार नहीं किया जाता की वह हमारे जैसा है प्यार इसलिए करते है क्योंकि जो बात हम मैं नहीं है वह उसमे है … और दोनों मिलकर सम्पूर्ण हो जाते है ….. तो फिर क्यों बढें हम अधूरेपन की ओर उसे अपना जैसा बना कर ….. प्यार की यही परिभाषा है यही कहानी है – यही मायने है — दो अधूरे लोग एक होकर एक परछाई बनें — आइना नहीं…क्योंकि आइने अक्सर थोड़ी सी चोट से ही टूट जाया करते है ……. सब प्यार करने वालों से मेरा यही अनुरोध है कि ये अहसास अनमोल है खास है और हर चीज़ से ज्यादा कीमती है….. इसे हमेशा दिल में बसा कर रखना इसलिए हम क्यों न अपने लिए एक हमसाया हमसफ़र तलाश करे न की एक आइना……..
ये कुछ पंक्तियाँ हर प्यार करने वाले के लिए और हर प्यार देने वाले के नाम


उसने कहा जिन्दगी बड़ी खूबसूरत होगी
हर तरफ तुझपे फूलों की बारिश होगी
तू ऐसे ही डरती है प्यार के साए से
एक दिन तुझ पे मोहब्बतों की छत होगी
तू मेरा मान मेरा अभिमान मेरा अपना है
तू साए की तरह मेरे साथ हर वक्त होगी

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59 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chadndra kailash के द्वारा
May 25, 2011

hello रौशनी जी मैंने काफी समय के बाद आपके ब्लॉग को ज्वाइन किया है प्यार का नाम इक बेईमानी लगता है आपने ठीक ही कहा की प्यार इबादत के सिबा कुक्ष भी नहीं

kanchan chhatrashali के द्वारा
April 9, 2011

congratulation ..

Neetu Dhir के द्वारा
March 10, 2011

Hello Roshni Ji, One day you will shine in the world like a star shine in the sky.Keep it up.God bless you.

आर.एन. शाही के द्वारा
February 27, 2011

रौशनी जी, काफ़ी दिनों से मंच पर आपकी उपस्थिति नहीं हो रही । कोई व्यस्तता है या मंच से कोई नाराजगी ? आपकी रचनाओं और टिप्पणियों की हम सभी को आवश्यकता महसूस हो रही है ।

Coolbaby के द्वारा
February 26, 2011

Love is not when you expect someone who loves to accept your views ,it is when you learn how to respect different views …………

nikhil के द्वारा
February 26, 2011

रौशनी जी बहुत कम समय में आपने अपनी एक मजबूत जगह मंच पर बना ली है .. आपकी लेखनी में बहुत क्षमता है.. . …. शार्टलिस्ट होने के लिए बहुत बहुत बधाईया .. ऐसे ही लिखते रहे.. शुभकामनाये

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
February 20, 2011

रौशनी जी ! सुन्दर रचना … वेलेंटाइन कांटेस्ट में शार्टलिस्टेड होने की बधाइयां, व आगे के लिए शुभकामनाएं

आर.एन. शाही के द्वारा
February 20, 2011

रौशनी जी, प्रतियोगिता में शार्टलिस्टेड होने की बधाइयां, व चयनित होने की शुभकामनाएं ।

chaatak के द्वारा
February 19, 2011

रौशनी जी, वेलेंटाइन कांटेस्ट में अंतिम पांच में चुने जाने पर हार्दिक बधाई!

    Uff के द्वारा
    November 28, 2013

    Boom shlakaaka boom boom, problem solved.

allrounder के द्वारा
February 19, 2011

रोशनी जी, बेहतरीन लेख और प्रतियोगिता मैं अंतिम ५ मैं चुने जाने पर हार्दिक बधाई !

charchit chittransh के द्वारा
February 18, 2011

रोशनी जी ,उत्तम विचारों की सुगढ़ प्रस्तुति , बधाइयाँ ! आप प्रेम प्रतीक प्रधान के चुनाव के अधिकृत प्रत्याशी घोषित हुई हैं {जैसे आस्कर अवार्ड के लिए अधिकृत भारतीय फिल्म का चुना जाना }. आपको इस प्रतियोगिता का सिरमौर चुने जाने हेतु ह्रदय की गहराइयों से शुभकामनाएं !

anju के द्वारा
February 16, 2011

रौशनी जी बहुत ही बढ़िया लिखा की हमें प्यार मैं आएना नहीं बल्कि उसका साया बनना चाहिए ताकि उसे हेर वक़्त तुम्हारे पास होने का एहसास होता रहे

omprakash pareek के द्वारा
February 14, 2011

रोश्निजी आपने जो ‘आइना’ दिखाया उसमें उभरे अक्स हकीकत दिखाते हैं. एक अछे ब्लाग के लिए बधाई. oppareek43

    roshni के द्वारा
    February 14, 2011

    ओमप्रकाश जी धन्यवाद

Deepak Sahu के द्वारा
February 12, 2011

रोशनी जी! प्रेम के संबंध मे सुंदर बातें कही आपने! प्रेम मे शक या शिकायत नाम की कोई चीज नहीं होनी चाहिए! होना चाहिए तो सिर्फ विश्वास!

    roshni के द्वारा
    February 12, 2011

    साहू जी विश्वास ही तो हर रिश्ते की नीव है धन्यवाद आपके विचारों के लिए

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 11, 2011

रौशनी जी….. बहुत सुंदर लिखा है आपने…..

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    हिमांशु जी धन्यवाद

deepak pandey के द्वारा
February 11, 2011

रौशनी जी ,आईने और परछाई के प्रतिक रूप में प्रयोग बहुत अच्छा लगा. अच्छी रचना…

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    पाण्डेय जी, लेख पसंद करने के लिए शुक्रिया

Prakash Kharayat के द्वारा
February 11, 2011

रोशनी जी पड़कर अच्छा लगा आपने काफी खूबसूरत अंदाज़ में प्यार को लिखा ! जो में आगे लिखने जा रहा हूँ पहले तो उसके लिए आप से माफ़ी चाहूँगा उम्मीद है आप मेरी गुस्थाकी को माफ़ कर देंगी. “परछाईयां हमेशा साथ रहती है आईने टूट जाया करते है.. दिल के बंधन चलते है उम्र भर दूर तलक दिमाग के रिश्ते राह में छूट जाया करते है….” क्या खूब लाइन है- एक बात कहू – जब हमें अपनी परछाई की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है, (अँधेरे में) तभी वो हमारे साथ नहीं होती और आईने टूट के भी आपका साथ नहीं छोड़ते, बल्कि वो टूट कर अपने हर टुकड़े मैं आप के ही जीते है. दिल के रिश्ते अक्सर खो जाते है जैसा की आप ने खुद लिखा है, हम एक दुसरे की कमियां गिनने लगते है! दरअसल अगर दिल की जगह दिमाग से काम लिया होता तो वो साड़ी कमियां प्यार करने से पहले ही नज़र आ जाती! दो अधूरे लोग बिलकुल एक जैसे नहीं हो सकते इसलिये अगर वो बड़ी चाहतो से एक हो भी जाये तो शायद जो चीज़ बनेगी वो आगे जाकर किसी न किसी के नज़रों में तो खटकेगी, हाँ दो पूर्ण लोग अगर एक दुसरे की बाहों में बाहें दाल के भी चले तो उनके बीच का सामंजस्य देखने लायक होगा! तो शायद मुझे तो एक आईने की ज़रुरत है जो हर हाल में मुझे मेरा चेहरा दिखा सके (टूटने पर भी) , न की वो साया जो ज़िन्दगी में अँधेरा घिरते है साथ छोड़ दे! आपका प्यार आपके साथ ताउम्र बना रहे ये दुआ है मेरी! और स्वागत है आपके मेरे ब्लॉग में!

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    परकाश जी, साया कभी साथ नहीं छोड़ता .. बस समझ का अंतर है-अँधेरा होते ही हमारा साया हमे छोड़ कर नहीं जाता बल्कि हमारे साथ हमारी आतमा के साथ एक हो जाता है …….. यानी की हमारे मुश्किल समय में दो नहीं एक होकर साथ चलते है और हर रिश्ते में यही जरुरी है एक होना ….. युभी रात होने का अर्थ ये तो नहीं की सूरज भाग गया वोह तो तब भी साथ ही होता है रात के चाँद बनकर………… आपको अपना आइना मुबारक हो , लेकिन कोशिश कीजियेगा वोह कभी टूटे न , क्युकी आइना चाहे कितने टुकड़े में बाँट जाये फिर भी दिखेगे तो आप अकेले ही ना…… और आपके ब्लॉग पे भी हम जरुर जायेगे ……. धन्यवाद

allrounder के द्वारा
February 11, 2011

रौशनी जी नमस्कार, आपका लेख पढ़ा बहुत ही अच्छे विचार व्यक्त किये आपने इसके माध्यम से, आप इस मंच के श्रेष्ठ कवित्रियों मैं से एक है और इस बार अपने अंतर्भावों को कविता की जगह एक सुन्दर लेख से व्यक्त करने पर आपको हार्दिक बधाई !

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    सचिन जी , मंच की श्रेष्ठ कवित्रियों में शामिल करने के लिए शुक्रिया……… कविता की तरह आपको मेरा लेख भी पसंद आया ये मेरे लिए खुशी की बात है …….. आपका तहे दिल से धन्यवाद्

Dharmesh Tiwari के द्वारा
February 11, 2011

रौशनी जी नमस्ते,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,उसने कहा जिन्दगी बड़ी खूबसूरत होगी हर तरफ तुझपे फूलों की बारिश होगी तू ऐसे ही डरती है प्यार के साए से एक दिन तुझ पे मोहब्बतों की छत होगी,,,,,,,,,,,,,,बहुत खुबशुरत लाईने,धन्यवाद!

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    धर्मेश जी , पंक्तियाँ पसंद करने के लिए शुक्रिया

R K KHURANA के द्वारा
February 11, 2011

प्रिय रौशनी जी, आपकी कलम में दिन प्रतिदिन निखा आता जा रहा है ! सुंदर रचना आर के खुराना

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    आदरनिये खुराना जी धन्यवाद …. प्रशंसा के लिए …… ये मेरे लिए खुशी के बात है की लेखन में दिन प्रतिदिन कुछ कर पा रही हूँ , सब आप लोगों का स्नेह और आशीर्वाद है

Nikhil के द्वारा
February 11, 2011

वेलंटाइन क्वीन को मेरी तरफ से हार्दिक बधाई. बहुत सुन्दर रचना. आभार, निखिल झा

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    निखिल जी jj वाले चाहे जिसे भी चुने लेकिन फिलहाल इस प्रतियोगिता में काफी कुछ सिखने को मिला ……… शुभकामनओ के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 11, 2011

रोशनी जी, बहुत ही उम्दा लेख, आपने प्यार की बहुत ही करीब से व्याख्या की है…साथ में कविता भी बहुत अच्छी लगी… आपने मेरी कहानी नहीं पढ़ी मुझे थोडा अटपटा लगा….फिर भी उम्मीद है की मेरी कहानी का अंत जरूर पढ़ेंगी…. http://aakashtiwaary.jagranjunction.com आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    आकाश जी मैंने आपकी कहानी पढ़ी और प्रतिक्रिया भी थी …. और आपकी कहनी हम न पढ़े ऐसा तो हो ही नहीं सकता ………. आपको लेख और कविता अच्छी लगी धन्यवाद

Deepak Jain के द्वारा
February 11, 2011

keep it up roshni ji

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    दीपक जैन जी धन्यवाद

Ramesh bajpai के द्वारा
February 11, 2011

यों भी किसी से इसलिए प्यार नहीं किया जाता की वह हमारे जैसा है प्यार इसलिए करते है क्योंकि जो बात हम मैं नहीं है वह उसमे है … और दोनों मिलकर सम्पूर्ण हो जाते है … रौशनी जी बहुत ही प्रशंसनीय कथ्य , अच्छी पोस्ट बधाई | ५\५

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    आदरनिये वाजपयी जी , यही सम्पुरंता ही प्यार है … आपसे ५/५ अंक पाकर अत्यंत खुसी हुई… आभार सहित

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    धन्यवाद भगवान बाबु जी

February 10, 2011

रोशनी जी खूबसूरत रचना…… ..तराजू के एक पलड़े में बैठो तुम, और एक में बैठूंगा मैं, फिर देखना कांटे पे, अपनी मोहब्बत होगी.

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    राज जी……. सुंदर पंक्तियाँ लिखी अपने …… कुछ मेरी और से मोहब्बत को तराजू में न तोल पाओगे देखो तुम आग से न यु खेल पाओगे ये इश्क है बदले में मांगता है जान कुछ हासिल न होगा और जान से भी जाओगे .. धन्यवाद

chaatak के द्वारा
February 10, 2011

रौशनी जी, आपकी कवितायें जिस पूर्णता के साथ अहसासों को प्रकट करती हैं ठीक उसी प्रकार आपका गद्य लेखन भी किसी कविता की अविरल धारा की तरह सीधे असर करता है| “तू मेरा मान मेरा अभिमान मेरा अपना है तू साए की तरह मेरे साथ हर वक्त होगी” खूबसूरत उदगार ! बधाई!

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    चातक जी , मेरे द्वारा लिखा ये गद्य आपको पसंद आया जानकर खुशी हुई …….. चूकि आप तो दोनों लेखन बड़ी खूबसूरती से करते है तो आप से मिले विचार मेरे लिए अनमोल है धन्यवाद

rahul kumar (Bijupara,Ranchi) के द्वारा
February 10, 2011

बस इतना ही कहूँगा…………….. क्या बात…… क्या बात………………… क्या बात……………………………………………………………….

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    राहुल जी धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद्

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 10, 2011

सुन्दर रचना के लिए बधाई……….

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    पियूष जी बहुत बहुत धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
February 10, 2011

रोशनी जी , बहुत ही अच्छे विचारों के साथ रचना की प्रस्तुति ! बहुत अच्छा कहा है एक होकर परछाई बनें…….अच्छी रचना के लिए बधाई ! शुभकामनाएं !

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    अलका जी, बहुत बहुत शुक्रिया आपको मेरी ये कोशिश अच्छी लगी

आर.एन. शाही के द्वारा
February 10, 2011

रौशनी जी, ब्लाग लेखन के समय आपकी भावनात्मक अभिव्यक्तियां बेजोड़ होती हैं, इसको यूं ही बढ़ाती रहिये । वैसे तथ्य यह है कि दिमागी रिश्ते सिर्फ़ तिज़ारत में काम आते हैं, प्यार में नहीं । प्यार में भावनाओं को पैदा नहीं करना पड़ता, वे खुद-ब-खुद पैदा होती हैं । लेकिन तिज़ारत में आदमी जैसी चाहे वैसी मुस्कुराहट अपने होठों पर लाकर दिखा सकता है, एक चतुर सेल्समैन की तरह, जहां जैसा एप्लीकेबल हो । यह प्रतियोगिता भी एक तिज़ारत ही तो है, वरना प्यार में कैसा सौदा ? जहां अंकगणित का खेल होगा, भावनाएं वहां से कोसों दूर होंगी । दोनों का छत्तीस का आंकड़ा होता है । प्यार की सच्चाइयों का आईना दिखाने के लिये आप को ढेर सारी बधाइयां ।

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    आर आन शाही जी , प्यार तो एक अपने आप होने वाला एहसास है …….. मैंने जो महसूस किया है वही लिखा है मेरे भावों पर प्रतियोगिता का असर नहीं है, क्युकी मेरी हमेशा से यही सोच है ….. मै ऐसा सोचती हूँ तो जरुरी नहीं सब ऐसा सोचे …. और आप को मेरे विचार अच्छे लगे जानकर अति प्रसनता हुईं ….. हमेशा की तरह प्रोत्सहन के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ….

February 10, 2011

रोशनी जी, बहुत ही बढिया बात कही आपने-आईने अक्सर टूट जाते हॆ लेकिन साया हमेशा साथ निभाता हॆ.अक्सर लोग दूसरे आदमी की सिर्फ कमियां गिनवाने में ही अपनी जिंदगी बिता देते हॆं-लेकिन उसकी अच्छाईयों की ओर ध्यान ही नहीं देते.यदि हम अपनी कमियों व दूसरों की अच्छाईयों की ओर ध्यान दें तो हमें प्रेम का सही अर्थ समझ में आयेगा.धन्यवाद!

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    विनोद जी नमस्कार दुसरे की कमियां देखते देखते हम ये भूल जाते है की हम भी इंसान है और हम में भी बहुत सी कमियां है … फिर अगर बहुत सारा प्यार है तो थोड़ी सी कमी को भी सवीकार कर लिया जाना चहिये……. यही प्रेम के अर्थ है धन्यवाद आपको मेरा लिखा पसंद आया

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 10, 2011

रौशनी वादे और कस्मे तो हर कोई करता है मगर सही कहा आपने .. हमें सपनो की दुनिया से उतर कर व्यावहारिकता की दुनिया में भी समय से उतर आना चाहिए…

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    निखिल जी , प्यार एक सपना है जिसे अगर इंसान खुली आँखों से देखे और महसूस करे तो ज्यदा सार्थक है ……

nishamittal के द्वारा
February 10, 2011

चलिए रौशनी सुंदर प्रस्तुति पर पहली प्रतिक्रिया मेरी.प्रेम वर्षा में सब भीगें ,कैसे भीगें व भीगते रहें के लिए कुछ टिप्स.इन्वेलिड कोड शो करने के चाकर मई मेरी प्रतिक्रिया दूसरी बन गयी.

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    निशा जी नमस्कार , आप से पहली प्रतिक्रिया मिली खुशी हुई लेकिन invalid कोड के कारन वाहिद जी की प्रतिर्किया पहले मिल गयी धन्यवाद

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 10, 2011

बड़े ही सुन्दर विचार प्रेषित किये हैं आपने रोशनी जी.बधाई स्वीकार करें| http://kashiwasi.jagranjunction.com/2011/02/10/%E0%A4%85%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%81-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A5%87-valentine-contest/

    roshni के द्वारा
    February 11, 2011

    वाहिद जी आपको विचार अच्छे लगे धन्यवाद


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