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तेरे हाथ का खिलौना

Posted On: 25 Dec, 2010 में

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god-2जब चाहता है हँसा देता है,
जब चाहता है रुला देता है,
मुझको समझता है वो रेत के मानिद,
घर बनाता है और फिर गिरा देता है………..

मै इल्तजा करता हु चाँद बना दे मुझको,
मगर वो सूरज सा बनाकर मुझको जला देता है ………..

जब मै कहता हूँ की किसी आंगन का दीया बन जाउगा मै,
वो तेज आंधी बनकर लौ को बुझा देता है………..

खिलोने की तरह खेलता है फिर तोड़ देता है,
दर्द से तडपता हु जो, तो धीरे से मुस्कुरा देता है………..

मागने से मौत देता है- वो जीने की सजा,
जब जीना चाहता हु तो मौत की नींद सुला देता है………..

फिर भी मै खुश हो तेरे साये के नीचे,
जब कश्ती डगमगाती है तू पार लगा देता है………..

मेरे खुदा ये रौशनी तेरी रहमत से रोशन है ,
तेरा ही नूर है जो मंजिल का पता देता है ……..

जब चाहता है हँसा देता है,
जब चाहता है रुला देता है………..

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1783 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Deepak Jain के द्वारा
January 28, 2011

रोशनी जी, आज फीर से एक बार आपकी ये कविता पढ़ी तो कमेन्ट देने से नहीं रुक सका “मागने से मौत देता है- वो जीने की सजा,” वाकई बहुत गहराई है दीपक जैन

    roshni के द्वारा
    January 28, 2011

    दीपक जी फिर से धन्यवाद

Deepak Jain के द्वारा
January 27, 2011

रोशनी जी, आपकी एक कविता ” एक ऐसी दुकान ” पढने के बाद मुझे बहुत अच्छा लगा और अब मै आपकी सारी कवितायेँ पढ़ रहा हूँ और यकीं मानिये मेरे कवि मित्र जो कहते हैं कवितायेँ तेरी समझ से परे हैं मुझे कुछ कुछ समझ आने लगी हैं और मैंने उन्हें भी आपकी कविताओं का लिंक दिया है दीपक जैन रायगढ़ (छ.ग.)

    roshni के द्वारा
    January 27, 2011

    दीपक जी ये मेरे लिए बहुत खुशी की बात है की आपको कविता में रूचि हुई ……..और आपको मेरी सब रचनाये अच्छी लगी जानकर बहुत ही अच्छा लगा

Alka Gupta के द्वारा
January 9, 2011

खिलौने की तरह खेलता है फिर तोड़ देता है , दर्द से तड़पता हूँ जो तो धीरे से मुस्कुरा देता है…… रोशनी जी ,बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ……… नव वर्ष समृद्धिमय व मंगलमय हो !

    roshni के द्वारा
    January 10, 2011

    अलका जी धन्यवाद आपको भी बहुत साडी शुभकामनये

    Dasia के द्वारा
    July 12, 2016

    “Unions will be lined up first for the Federal money. That 60B Obama cash should offset a bunch of the overtime. What’s left over will be used for infrastructure and indupidials.”Nove, JJ and Fast Eddie will be lined up sooner. And I hope they get their cut first. The sad fact is they probably will not.

HIMANSHU BHATT के द्वारा
January 1, 2011

मेरे खुदा ये रौशनी तेरी रहमत से रोशन है , तेरा ही नूर है जो मंजिल का पता देता है….. अति सुंदर रचना…… नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ ….. धन्यवाद….

    roshni के द्वारा
    January 2, 2011

    हिमांशु जी धन्यवाद

Rawal Kishore के द्वारा
January 1, 2011

बहुत खूब रौशनी जी दिल को तार-तार करती रचना बधाई

    roshni के द्वारा
    January 1, 2011

    रावल किशोर जी धन्यवाद

    Ranessa के द्वारा
    July 12, 2016

    No retaupble insurance company uses Kelly Blue Book. Check nada.com clean retail. Keep in mind any unrelated damage and high mileage charges will be deducted.

Deepak Sahu के द्वारा
January 1, 2011

रोशनी जी बहुत सुन्दर रचना! आपको मेरी और से नव वर्ष की बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं धन्यवाद दीपक http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/

    roshni के द्वारा
    January 1, 2011

    दीपक साहू जी धन्यवाद ……..

chaatak के द्वारा
January 1, 2011

नव वर्ष आपको सफलता, समृद्धि, प्रसिद्धि, बल, निरोग एवं ढेर सारी खुशियाँ प्रदान करे ! शुभम-मंगलम !

    roshni के द्वारा
    January 1, 2011

    धन्यवाद चातक जी

    Jenaya के द्वारा
    July 12, 2016

    Уважаемый Кирилл вµÑ€Ð¡³ÃÂµÃÂµÃÃÂич,можно ли иногороднему пройти УЗИ органов брюшной полости и получить консультацию в Вашем Центре и каким образом это сделать?Есть ли очередь,можно ли заранее записаться2000 на определённую дату?

kailash nautiyal के द्वारा
December 31, 2010

Roshni ji, namaskar. aapki kavita padi. kavita mein sabdon ka chayan atti uttam hai. prabhavit karti hai. likhte rahiye. nav varsh ki subh kamnaeyen.

kailash nautiyal के द्वारा
December 31, 2010

roshniji namaskar hindi typing mein thoda haath tang hai. lekin aapki kavita padkar raha nahin gaya. yeh sach hai, koi sakti hai, jo humen prerna deta hai, hamara jeevan chalata hai, isiliye aap hum likh paa rahe hai. likhte rahiye.dhanyavad. nav varsh ki subh kamnaien.

    roshni के द्वारा
    January 1, 2011

    Kailsah ji आपको कविता अच्छी लगी और आपने अपने विचार दिए इस के लिए बहुत बहुत शुक्रिया नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये

div81 के द्वारा
December 31, 2010

रौशनी जी………….नववर्ष की शुभकामनाये नया साल आप के जीवन में खूब सारी खुशियाँ और खूब सारी सफलता लाये आप की और आप के परिवार की मंगल कामना के साथ ……..दिव्या

    Twiggy के द्वारा
    July 12, 2016

    Hi Sweetie! These earrings are absolutely gorgeous, and I totally agree with Brenda about the tanzanite looking beautiful with the gold. You have such a eye for combining just the right beads and metals. I always love your cresitona!!! xoxo

atharvavedamanoj के द्वारा
December 31, 2010

लाली छाये दशों दिशा में, जगमग जगमग हो जग सारा | नवल वर्ष के नव प्रभात को विनत हमारी, नमन हमारा || शीतल, मलय सुवासित नंदन वन सा मह मह महके भारत | कोकिल सा कूके इस जग में खग सा चह चह चहके भारत | फटे शत्रुओं पर बन घातक ज्वाला भक् भक् भभके भारत | शौर्य, तेज का तीक्ष्ण हुताशन बनकर दह दह दहके भारत | तड तड टूटे सारे बंधन जीर्ण शीर्ण हो सारी कारा | नवल वर्ष के नव प्रभात को विनत हमारी नमन हमारा || शेष फिर कभी वंदे भारत मातरम मनोज कुमार सिंह मयंक एक हिंदू आतंकवादी

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
December 31, 2010

नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्‍पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। अरविन्‍द पारीक

Amit Dehati के द्वारा
December 31, 2010

बहुत ही खुबसूरत , अच्छा लगा , अच्छी पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई ! http://amitdehati.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    December 31, 2010

    अनित देहाती जी धन्यवाद

    Luck के द्वारा
    July 12, 2016

    Safe travels and remember, you are not going to Mars so you can buy anything you forget! (But, I agonize over packing so obviously can’t take my own advc2e&#8i30;)

mona के द्वारा
December 30, 2010

बहुत बढ़िया रचना …….ऐसे ही लिखती रहे

    roshni के द्वारा
    December 31, 2010

    धन्यवाद मोना जी

    Kaeden के द्वारा
    July 12, 2016

    This design is steller! You certainly know how to keep a reader amused. Between your wit and your videos, I was almost moved to start my own blog (well, alH2!t&#8o30;Hamas) Wonderful job. I really enjoyed what you had to say, and more than that, how you presented it. Too cool!

allrounder के द्वारा
December 28, 2010

रोशनी जी, नमस्कार और स्वागत है जागरण जंक्सन पर आपके नए अवतार के साथ ! आपने अभी तक अपनी कलम की रोशनी से इस प्रतिष्ठित मंच को सुशोभित किया है, और आशा है आगे भी आप ऐसे ही इसे सुशोभित करती रहेंगी ! एक बात की और प्रशंशा मैं करना चाहूँगा की आपने अपनी चिड़ियों को भी अपनी तस्वीर के साथ जोड़ दिया, और अपने अवतार के साथ उन्हें जोड़कर बहुत ही प्रशंशनीय कार्य किया है ! एक बार फिर से स्वागत आपके नए अवतार के साथ !

    roshni के द्वारा
    December 28, 2010

    सचिन जी ये चिड़िया ही मेरी पहचान है …….. इन्हें हटाकर तो मै कभी भी अपनी तस्वीर लगाने की सोच भी नहीं सकती….. भविष्य में मै रहू न रहू ये चिड़िया ऐसी ही रहेगी हमेशा …….. आपने मेरी इन चिड़ियों का जिक्र किया मुझे बहुत ही अच्छा लगा ….. ये नीला असमान और ये परिंदे ही मेरी पहली पहचान है ………… धन्यवाद

Satya prakash tiwari के द्वारा
December 28, 2010

बहुत ही सुन्दर रचना मन को स्पर्श करती हुई, और जीवन का सत्य उजागर करती हुई ! आपको और अच्छा लिखने की शुभकामनायें !

    roshni के द्वारा
    December 28, 2010

    सत्य प्रकाश जी , कविता अच्छी लगी धन्यवाद … और भी अच्छा लिखने का सदा प्रयास करती रहूगी…… धन्यवाद सहित

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
December 28, 2010

सुश्री रोशनी जी, इस मंच पर आपकी रोशनी इसी तरह जगमगाती रहे यही कामना है। बहुत सुंदर कविता। बहुत ही सुंदर भावाभिव्‍यक्ति। अरविन्‍द पारीक

    roshni के द्वारा
    December 28, 2010

    आदरनिये अरविन्द जी, आपको कविता अच्छी लगी ये जानकर खुशी हुई …..प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

Aakash Tiwaari के द्वारा
December 27, 2010

रोशनी जी, बहुत ही खूबसूरत और एक श्रेष्ठ रचनाकार की रचना…इससे कम की उम्मीद करना भी बेमानी है….. दो शब्द बनाया है….पेश क्र रहा हूँ.. “यूँ छोड़ के न जा मुझे रोता हूँ रोता रहूँगा, तेरे प्यार में जीता था गमे जुदाई में मरता रहूँगा.” आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    December 28, 2010

    आकाश तिवारी जी , दो शब्द काफी अच्छे है ……… युही अपने विचार देते रहिएगा …….. धन्यवाद सहित

allrounder के द्वारा
December 27, 2010

रोशनी जी, नमस्कार क्या खूबसूरती से आपने ईश्वर की सत्ता पर प्रश्न उठाये हैं और फिर उससे भी ज्यादा खूबसूरती से उन्ही प्रश्नों का उत्तर भी दिया है ! मुझे लगता है हम सब ईश्वर के हाथ की कठपुतलियां हैं दुनिया मैं सिर्फ अपना – अपना पार्ट निभाने यहाँ आये हैं जिस दिन हमारा पार्ट ख़तम उस दिन वेह सर्वशक्तिमान प्रभु एक झटके से डोर खींच लेता है और हमारा खेल ख़तम ! लेकिन ये ऊपर वाला कभी – कभी ये भूल जाता है की उसने मनुष्य को एक दिल भी दिया है और जाने वाला अपने पीछे छोड़ जाता है ऐसे ही दिल मैं यादें जिनके सहारे हमें जिन्दगी गुजारनी पड़ती है , कभी अपनी ख़ुशी के लिए कभी अपनों की ख़ुशी के लिए ! हम सभी उसके अधीन हैं और उसके बनाये नियमों को हमें मानना ही पड़ेगा ! एक बार फिर से मन के सच्चे उदगारों के लिए बधाई !

    roshni के द्वारा
    December 27, 2010

    सचिन जी, बिलकुल सही विश्लेषण किया अपने ……….. एक एक शब्द सच है …………. हम अब अपना अपना पार्ट निबा रहे है न जाने किस पल किस घडी ये पार्ट ख़तम हो जाये ……. धन्यवाद सहित

abodhbaalak के द्वारा
December 27, 2010

Rukh se utha hijab, achha nahi kia Chehra dikha ke aapne achha nahi kia Ham to fida they aapke, bas lekh ke hi the Ab aapne ye dared dil ke achha nahi kia आपकी लेखनी पर क्या कहना, वो तो है ही …..

    abodhbaalak के द्वारा
    December 28, 2010

    आपने तो मेरी अच्छी खासी क्लास ले ली शाही जी, शायरी के ऐसी की तैसी हो के रह गयी, अच्छा हुआ की ….. ये सब तो राज जी ही के बस की बात है मै तो ठहरा अबोध ….. वैसे जिसको कमेन्ट लिखा था अच्छा हुआ की उन्होंने ने कुछ नहीं लिखा ….

    roshni के द्वारा
    December 28, 2010

    अबोध जी मैंने आपके कमेन्ट का reply पोस्ट किया था किसी करणवश डिस्प्ले नहीं हुआ .. अभी अभी आपका एक और कमेन्ट पढ़ा तो पता चला ………… हमेशा की तरह रचना अच्छी लगी ये जानकर अच्छा लगा ……………. धन्यवाद सहित

    आर.एन. शाही के द्वारा
    December 28, 2010

    अबोध जी, कोई क्लास नहीं, इसे भी ह्यूमर के तौर पर ही लेने का कष्ट करें । दरअसल मैंने ऊपर नीचे के सभी कमेंट्स पर रौशनी का जवाब देखा, बीच में आप पर कोई जवाब उन्होंने नहीं लिखा था । बस ध्यानाकर्षण का मुझे एक तरीक़ा सूझा, जो लिख दिया । यह तो नहीं न लिख सकता था कि रौशनी तुमने अबोध जी के कमेंट का जवाब क्यों नहीं लिखा । वह लड़की है और खुले दिमाग की है इसलिये हम लोग थोड़ा हद से ज़्यादा ही शेरो शायरी लिख देते हैं, यह मानते हुए कि बुरा नहीं मानेगी, और उसने अभी तक किसी को कोई उल्टा जवाब लिखा भी नहीं है । रही राज जी की बात, तो मैंने आज तक कभी रौशनी और राजकमल को एक दूसरे के ब्लाग पर कोई कमेंट लिखते हुए नहीं देखा, जबकि दोनों ही मुझसे भी बहुत पुराने ब्लागर हैं । कभी दोनों अच्छे मूड में रहे तो पूछ कर बताऊंगा । वैसे भाई साहब को तो आप जानते ही हैं । धीरे-धीरे आपसी समझ बढ़ने के बाद लोग खुलकर उनसे सटने लगे है, वरना वह करंट के झटके से कम तो हैं नहीं । उम्मीद है आप और मैं एकदूसरे को अच्छी तरह समझते हैं, और आपने मेरी ‘क्लास’ को अन्यथा नहीं लिया होगा । धन्यवाद ।

    December 30, 2010

    अबोध भाई घबरा क्यों गए- “उनको दी है खुदा ने अच्छी सूरत, और हमको दी हैं दो आँखें, देखते ही मुह से निकल पड़ा लाजवाब, तो ‘राज’ इसमें बुरा क्या है”

    Kurachi के द्वारा
    January 11, 2014

    That’s a skillful answer to a difflcuit question

Deepak Jain के द्वारा
December 27, 2010

बेहतरीन कविता

    roshni के द्वारा
    December 27, 2010

    धन्यवाद दीपक जी

Anuradha chaudhary के द्वारा
December 26, 2010

nice post.

    roshni के द्वारा
    December 27, 2010

    Thank u anuradha ji

div81 के द्वारा
December 26, 2010

बहुत ही खूबसूरती से बयां किया रोशनी जी आप ने खुदा की रहमत को ए खुदा तेरी मर्जी के आगे क्या होगा है पता तू जो चाहे वैसा समां हो , तेरी रजा तू जो चाहे तपती धूप में, खिलता हुआ गुलिस्तान होगा

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    दिव जी , उस खुदा की रहमत को तो मै क्या कोई भी बयाँ नहीं कर पायेगा .. उसकी ही मर्जी है जो थोडा सा लिख लेते है …… बस ये रहमत बनी रहे ……… और तेरी रजा तू जो चाहे तपती धूप में, खिलता हुआ गुलिस्तान होगा.. तेरी रजा से ही दुनिया में मेरा निशान होगा …..तेरी मर्जी से खुदा-तेरी मर्जी से खुदा …… आपकी प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से शुक्रिया धन्यवाद

anju के द्वारा
December 26, 2010

प्रिय रौशनी जी मुझको समझता है वो रेत के मानिद, घर बनाता है और फिर गिरा देता है अति सुंदर

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    anju ji बहुत बहुत धन्यवाद

sdvajpayee के द्वारा
December 26, 2010

 हृदय की रोशनी से निकली अभिव्‍यक्ति। पूर्णिमा के चांद सी रोशनी और मधुर शीतलता देती हुई होना स्‍वाभाविक है। इस भाव प्रवणता को सलाम।

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    Respected Sdvajpayee ji नमस्कार , यकीं नहीं होता की आपकी टिप्पणी मेरी कविता के लिए .. आज पहली बार आपकी प्रतिक्रिया पाकर अति हर्ष हुआ ……… धन्यवाद सहित

    sdvajpayee के द्वारा
    December 26, 2010

       इस के लिए भक्ति-दर्शन  से सराबोर आपकी कविता ही उत्‍तरदायी है ।

ashutoshda के द्वारा
December 26, 2010

रौशनी जी नमस्कार चाँद अगर परदे में भी रहे तो भी उसकी रौशनी कम नहीं होती चाँद अगर परदे में भी रहे तो भी उसकी रौशनी कम नहीं होती परदे से बहार आने पर रौशनी बिखरना तो लाजिमी है ही आपने जो इश्वर की महिमा पर जो रौशनी डाली है वो वाकई काबिले तारीफ है इसी तरह से रौशनी बिखरते रहिये आशुतोष दा

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    Ashutoshda जी , बहुत बढ़िया शेर अर्ज किया अपने …… इतने बड़ी शक्ति की महिमा पैर रौशनी डालने की छोटी सी कोशिश है ये ……. मेरे पास वो लफ्ज कहा जो उस भगवन के बारे में लिख सके ….. आपको रचना अच्छी लगी बहुत बहुत धन्यवाद आभार सहित

December 26, 2010

रोशनी जी, यदि सब-कुछ हमारे ही हाथ में हो जाये,तो फिर शायद जीने का अंदाज ही बदल जाये.कल क्या होगा-यह सब भविष्य के गर्भ में छुपा हुआ हॆ.अच्छा हॆ छुपा ही रहे.Man purposes but God disposes अर्थात आदमी सोचता कुछ हॆ,लेकिन उसके साथ वह शक्ति जिसे भगवान कहा जाता हॆ-करती कुछ हॆ.यही तो जीवन का सत्य हॆ.इस सत्य को अपनी कविता में ,सुन्दर चित्र के साथ अच्छी अभिव्यक्ति दी हॆ-आपने.सुन्दर रचना के लिए बधाई!

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    विनोद पराशर जी नमस्कार Man purposes but God disposes … सब कुछ उसी की मर्जी से होता है इंसान तो उस भगवान के हाथ का खिलौना है बस वो जैसा चाहता है वैसा हमारे साथ करता है .आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आभार सहित

R K KHURANA के द्वारा
December 26, 2010

प्रिय रौशनी जी, मागने से मौत देता है- वो जीने की सजा, जब जीना चाहता हु तो मौत की नींद सुला देता है ! क्या बात है ! बहुत ही सुंदर रचना ! बहुत सुंदर कविता ! आपकी लेखनी में दिन प्रतिदिन निखर आ रहा है ! हिंदी साहित्य के लिए शुभ सन्देश है ! कमल की रचना ! मेरी और से शुभकामनायें ! राम कृष्ण खुराना

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    आदरनिये खुराना जी नमस्कार , आप के द्वारा ये सब कहना मेरे लिए बहुत खुशी की बात है ….. अच्छा लगा ये जानकर की मुझे में आपको कुछ सम्भावन नज़र आयी ……….. बहुत बहुत धन्यवाद बस इसी तरह प्रोत्सहन देते रहिएगा आभार सहित

danishmasood के द्वारा
December 26, 2010

एक बात तो इस्पष्ट हो गई परिस्थितयां किसी को भी शायर बना सकती है बस व्यक्ति भावुक हो ………….. शुक्र है , ब्लॉग पर कुछ लोग अच्छा भी लिखते…………….

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    दानिश जी , धन्यवाद

आर.एन. शाही के द्वारा
December 26, 2010

रौशनी जी, समझ नहीं पा रहा कि पहले किसकी तारीफ़ की जानी चाहिये । उस खुदा की, जिसकी इल्तज़ा में आपने इतनी सुन्दर रचना गढ़ दी, या खुदा की उस रचना की, जो आज हमारे सामने ब्लाग अवेटर पर नई तस्वीर के रूप में एक नई ताज़गी का एहसास करा रही है । काव्य रचना तो खैर हमेशा की तरह अपनी पूर्ववर्ती पर भारी पड़ ही रही है । तस्वीर की तारीफ़ की जगह ये पंक्तियां अर्ज़ हैं — रंगों में तेरा अक्स ढला, तू ना ढल सकी, सांसों की आंच ज़िस्म की खुशबू ना ढल सकी, तुझमें जो लोच है मेरी तहरीर में नहीं, तहरीर में नहीं, जो बात तुझमें है, तेरी तस्वीर में नहीं ॥ … रौशनी जी, गीत की लाइनों में जो ग़ुस्ताखियां हैं, उनके लिये क्षमाप्रार्थी भी हूं । क्या करूं, गानों के अतिरिक्त कुछ आता नहीं, और गाने किसी मशहूर शायर के लिखे हुए हैं, मेरे नहीं । बधाई ।

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    आदरनिये शाही जी नमस्कार बस उस खुदा की तारीफ कीजिये जिसके लिए ये रचना लिखी है क्युकी हम तो मामूली से इंसान है ……. इंसान की खुदा के सामने क्या पेश ………… और आपकी गीत की पंक्तियाँ के लिए और प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद आभार सहित

ashwini के द्वारा
December 26, 2010

रोशनी ने खुदा की रोशनी का बढिया चित्रण किया है। अच्‍छा लगा।

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    अश्विनी जी , दुआ है की सब पर खुदा की ये रहमत होती रहे ….. धन्यवाद सहित

Harish Bhatt के द्वारा
December 26, 2010

रोशनी जी नमस्ते, मेरे खुदा ये रौशनी तेरी रहमत से रोशन है , तेरा ही नूर है जो मंजिल का पता देता है बहुत ही बेहतरीन दिल को छू जाने वाली कविता के लिए हार्दिक बधाई.

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    हरीश जी नमस्कार , आप को रचना पसंद आई जानकर अच्छा लगा , आपके द्वारा दी गयी टिप्पणी के लिए तहे दिल से शुक्रिया …….

rajeev dubey के द्वारा
December 26, 2010

वाह, रोशन रहे आपकी जिन्दगी खुदा की रहमत से, मंजिलें आप तक खुद चलकर आती रहें…

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    राजीव जी ……. बहुत बहुत धन्यवाद

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
December 26, 2010

फिर भी मै खुश हो तेरे साये के नीचे, जब कश्ती डगमगाती है तू पार लगा देता है………. ये भगवान की सह्र्द्यता ही है की वो हमें हमारी समर्थ से अधिक दुख नहीं देता किन्तु योग्यता से अधिक खुशी जरूर दे देता है……….. सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई………….

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    पियूष पन्त जी , भगवन जनता है किस को कब क्या देना है ……. दुःख भी हमारे बरदाश के भीटर और खुशी हद से ज्यदा वह तभी तो वो हम सबसे ऊपर है ……. धन्यवाद सहित

    Kaeden के द्वारा
    July 12, 2016

    Well, after fighting with this for a couple of hours, I finally got it all working. Thanks for taking the time to do all this work, Mikko, and for sharing.My glitch was that I was running “Visual C++ 2005 SP1 Restaiributdble Package (x86)” and just needed to install “Visual C++ 2008 SP1 Redistributable Package (x86)” instead.Now it appears all is good. Thanks again,-D-

Rashid के द्वारा
December 26, 2010

जब कश्ती डगमगाती है तू पार लगा देता है……….. मेरे खुदा ये रौशनी तेरी रहमत से रोशन है , तेरा ही नूर है जो मंजिल का पता देता है — रौशनी जी ,, बहुत ऊँचा फलसफा बयान करती है यह लाइन !!, आप की तस्वीर देखकर भी अच्छा लगा, और कुछ पंक्तिया याद आ गयीं ( please बुरा मत मानियेगा !!) — जिसकी रचना इनती सुन्दर वह कितना सुन्दर होगा !! — राशिद

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    रशीद जी , ज्यदा क्या कहू आपकी प्रतिक्रिया के लिए और तारीफ के लिए शुक्रिया ……. और बुरा माने वाली कोई बात नहीं है ………… धन्यवाद सहित

kmmishra के द्वारा
December 26, 2010

मै इल्तजा करता हु चाँद बना दे मुझको, मगर वो सूरज सा बनाकर मुझको जला देता है ……….. . रोशनी बहन नमस्कार । बहुत ही खूबसूरत, परमेश्वर से संवाद करती और कविता के लिये आभार । उसके मन में क्यसा है कोयी नहीं बता सकता । बस एक ही रास्ता है, सब कुछ उसके हवाले कर दो । तुम जानो और तुम्हारा काम । पर ऐसा कौन कर पाता है ।

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    मिश्रा जी नमस्कार ……….. परमेश्वर के हवाले सब करना ही पड़ता है क्युकी उससे लड़े भी तो कौन और कैसे ……. बस उससे शिकायत ही कर सकते है और फिर दुआ …….. बाकि उसका काम ………… प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

nishamittal के द्वारा
December 26, 2010

रोशनी जी,सच उसका अपना कानून है ,अगर वो मात्र हमारी सुने तो पता नहीं क्या हो जाये.परन्तु उस पर आस्था रख कर ही हम इस संसार में दुःख सुख सब को सहन कर पाते हैं.बहुत अच्छी कविता.

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    निशा जी नमस्कार , सच उसका कानून है तभी तो कहते है न की वोह जो करता है अच्छे के लिए ही करता है …… आज रुला रहा है तो कल हँसा भी देगा वो , किसी इंसान को भगवन कबी अकेला नहीं रहने देता खुद साथ रहता है …….. आपके विचारों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

Arunesh Mishra के द्वारा
December 26, 2010

अच्छी ग़ज़ल रौशनी जी…इबादत का एक नया सलीका…

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    अरुणेश मिश्र जी ……… इबादत तो बस इबादत है चाहे मंदिर या मस्जिद में कर लो या उस पर वाले से सीधा सीधा बात करके …….. आप को ग़ज़ल पसंद आयी और प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    Holland के द्वारा
    July 12, 2016

    Hey, that’s the grettesa! So with ll this brain power AWHFY?

Ramesh bajpai के द्वारा
December 26, 2010

फिर भी मै खुश हो तेरे साये के नीचे, जब कश्ती डगमगाती है तू पार लगा देता है… बहुत खूब रौशनी जी क्या बात है आस्था का , भावो का इतना समर्पित सहज स्वाभाविक और अदभुद प्रवाह | कितना सकून देता है | बहुत बहुत बधाई 5/5

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    आदरनिये रमेश बाजपाई जी नमस्कार आप से ५/५ अंक पाकर अति हर्ष हुआ ………….. आप इतनी अच्छे कवी है और आप की ये प्रतिक्रिया अमूल्य है …… धन्यवाद सहित

Syeds के द्वारा
December 26, 2010

वो तेज आंधी बनकर लौ को बुझा देता है……….. खिलोने की तरह खेलता है फिर तोड़ देता है, दर्द से तडपता हु जो, तो धीरे से मुस्कुरा देता है……….. रौशनी जी ,बेहद सुन्दर कविता …आपकी सारी कवितायें एक दूसरे से बढ़ कर हैं… ब्लॉग पर आपकी पिक्चर देखने के बाद पता चला माशाल्लाह आपने सूरत भी बहुत अच्छी पायी है… आपकी अगली रचना का इंतज़ार रहेगा….

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    Syeds जी, आपको रचना पसंद आयी और अपने दिल से तारीफ की उसके लिए और हर शब्द के लिए धन्यवाद …..

    Kylia के द्वारा
    July 12, 2016

    There are no words to describe how bocioadus this is.

December 25, 2010

“रोशनी, ये महफ़िल तेरी रौशनी से ही रोशन है , तेरा ही नूर है जो दिलों में रोशनी करता है” रोशनी आज आपकी तस्वीर आपके ब्लाग में देखकर बहुत खुशी हुई है. भले ही ये आपने अपनी मर्जी से लगाई है पर कहीं मुझे भी ये भ्रम है कि इस चेहरे को सामने लाने में मेरा भी शायद कुछ योगदान है. लिखती तो आप हमेशा ही अच्छा हैं और माशाअल्ला सूरत भी अच्छी पाई है. परदे से बाहर आने के लिए धन्यवाद.

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    रतूड़ी जी , आप के द्वारा कहे गए विचार भी याद थे, उनपर भी सोचा था और आपके योगदान के साथ साथ बस कुछ अपनों ने भी कहा की अब परदे से बाहर आना चहिये ………. रचना की तारीफ के लिए तहे दिल से शुक्रिया………….. आपका शेर बहुत अच्छा है ……..

    December 30, 2010

    ‘रोशनी’ अब ये लोगों को क्या पता, कि जो मिली है रोशनी उन्हें, हमने भी एक सुराख़ किया था उस रोशनी के लिए.


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