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लिबास

Posted On: 27 Nov, 2010 में

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अचानक से कभी तू सामने आ और दिल को धड़का दे,

मेरी गमगीन आँखों को ख़ुशी के अश्कों से नहला दे….

मेरे कहने से तू आत्ता है मुलाकात के लिए,

कभी खुद मुझसे मिलने आ के, तू मुझको चौका दे …..

तेरी ऑंखें बयाँ करती है राज कई गहरे,

लबो को खोल और राज को लफ़्ज़ों के लिबास पहना दे …..

तू परेशान जो हो तो मेरे दो जहान बेचैन रहते है,

रूह सकून पाती है जो तू खुल के मुस्कुरा दे…..

कभी जुगनू कभी तारा कभी तू चाँद बन जाता है,

किसी सवेरे तू सूरज की पहली किरण बन के मुझको  जगा दे…….

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498 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Coolbaby के द्वारा
December 25, 2010

जो उतर के जीना ए शाम से तेरी चश्मे खुश में समा गये , वही जलते बुझते महर ओ माह मेरे बाम ओ दर को सजा गये , ये अजीब खेल है इश्क का मै ने आप देखा ये मोजिज़ा, वो जो लफ्ज़ मेरे गुमान में थे वो तेरी जुबा पे आ गये , तेरे बेरुखी के दयार में मैं हवा के साथ हवा हुआ , तेरे आईने की तलाश में मेरे ख्वाब चेहरे गवा गये , मेरी उम्र से न सिमट सके मेरे दिल में इतने सवाल थे , तेरे पास जितने जवाब थे तेरी एक निगाह में आ गये ……………. this is a further step :) bless you god

    roshni के द्वारा
    December 26, 2010

    Cool baby , जी बहुत खूब शेर कहा अपने वाह

    rahul dwivedi के द्वारा
    January 17, 2011

    bahut achchi kavita hai roshni didi thoda aur koshish karna mehnat jarur rang layegi god bless you apke jajbat nirale hai apke har dard nirale apko apka pyar mile yahi duva ham dil se nikale hai

    roshni के द्वारा
    January 17, 2011

    राहुल भाई धन्यवाद ……. तुम्हारी प्राथना के लिए

chadndra kailash के द्वारा
December 6, 2010

रोशनी जी आपने जो इंतजार की कामना की है वो ख़तम हो जाए और आपको आपकी चाहत का दीदार हो जाए खूब सूरत कामना है आपकी खुदा करे पूरी हो दुआ करेंगे हम खुदा से

    roshni के द्वारा
    December 7, 2010

    chandra kaisah ji , धन्यवाद हरेक दुआ के लिए … .. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया

    Mattie के द्वारा
    July 12, 2016

    When you think about it, that’s got to be the right anserw.

syeds के द्वारा
December 1, 2010

रौशनी जी बेहद सुन्दर कवित तू परेशान जो हो तो मेरे दो जहान बेचैन रहते है, रूह सकून पाती है जो तू खुल के मुस्कुरा दे….. http://syeds.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    December 1, 2010

    Syeds जी कविता आपको अच्छी लगी जानकर अच्छा लगा प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

Aakash Tiwaari के द्वारा
November 30, 2010

रौशनी जी, बहुत ही अच्छी कविता पेश की है आपने बधाई… कुछ लाइने मेरी तरफ से… बरसों तेरी याद में आंसू बहाए हमने आज तू मुझको हँसा दे, लगा ले सीने से सारे गम भुला दे. तेरी परछाई भी साथ दे मेरा जिंदगीभर अपने दिल में अब तू मुझको ऐसी ज़गह दे… अपने दिल में अब तू मुझको ऐसी ज़गह दे… आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    December 1, 2010

    आकाश जी धन्यवाद .. आपकी ये लाइने बहुत खुबसूरत लगी एक बार फिर से शुक्रिया

Amit kr Gupta के द्वारा
November 30, 2010

नमस्कार रौशनी जी, कविता पढ़कर दिल खुश हुआ. अच्छी कविता .आप मेरे लेख पढ़ने के लिए इस add पर जा सकते हैं. http://www.amitkrgupta.jagrajunction.com

    roshni के द्वारा
    December 1, 2010

    अमित जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

K M Mishra के द्वारा
November 30, 2010

रोशनी बहन नमस्कार । मन को छूती कविता के लिये आभारी हूं ।

    roshni के द्वारा
    December 1, 2010

    आदरणीय मिश्रा जी नमस्कार ……… प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से धन्यवाद

anju के द्वारा
November 29, 2010

तेरी ऑंखें बयाँ करती है राज कई गहरे, लबो को खोल और राज को लफ़्ज़ों के लिबास पहना दे …. बहुत सुन्दर रचना

    roshni के द्वारा
    December 1, 2010

    अंजू जी धन्यवाद्

allrounder के द्वारा
November 29, 2010

रोशनी जी, एक बार बेहतरीन रचना के लिए बधाई !

    roshni के द्वारा
    November 29, 2010

    सचिन जी धन्यवाद

    Carli के द्वारा
    July 12, 2016

    Michael,I am not an expert on the details of what you allege – in order to confirm or not, but it saddens me that it has the ring of truth. There are many things I read that do not, but this does. The evil is almost overhwelming.

anamika के द्वारा
November 28, 2010

बहुत सुन्दर रचना …………..शब्दों को सुन्दरता से सजाया है आपने …अच्छा लगा

    roshni के द्वारा
    November 29, 2010

    अनामिका जी बहुत बहुत शुक्रिया

    roshni के द्वारा
    November 29, 2010

    राजीव दुबे जी प्यार के बारे में आपकी परिभाषा बहुत अच्छी है धन्यवाद सहित

abodhbaalak के द्वारा
November 28, 2010

रौशनी जी आपकी इस ग़ज़ल पर दो पंक्तिया कहना चाहूंगा अँधेरा था मेरा जीवन में, चारो तरफ फैला के लेकिन रौशनी की एक किरण ने सब कुछ बदल डाला रौशनी आखिर रौशनी ही है, फैलती है तो हर तरफ ….. सुन्दर रचना के लिए बंधाई हो

    roshni के द्वारा
    November 28, 2010

    अबोध जी, आपकी ये दो पंक्तियाँ बहुत सुन्दर है ………. जीवन में प्रकाश सब कुछ बदल डालता है और उजाला भर देता है …….. तहे दिल से शुक्रिया

आर.एन. शाही के द्वारा
November 28, 2010

रोशनी जी, तारीफ़ के लिये शब्द ही नहीं मिल रहे । सारी की सारी टिप्पणियां चीख-चीख कर कह रही हैं, कि रोशनी में वो ताक़त है, जो शब्दों के जादू बिखेर कर मुर्दों को भी कब्र से निकलकर कसरत और शीर्षासन करने पर मजबूर कर दे । चांद और तारे तो फ़िर भी कवियों के लिये हमेशा ही काम आते रहे हैं । बधाई स्वीकार करें ।

    roshni के द्वारा
    November 28, 2010

    शाही जी … कैसे धन्यवाद करू मै इतनी तारीफ के लिए मुझे भी शब्द नहीं मिल रहे है …… जब अनुभवी और बड़े लेखक इस तरह तारीफ करते है तो बस क्या कहू ……. बस सब आपका आशीर्वाद, स्नेह और प्रोत्सहन है बहुत बहुत धन्यवाद

November 28, 2010

ये सच है दुनिया में उजाला करने के लिए, रोशनी जरूरी है, और ये भी सच है कि, दिलों में उजाला करने के लिए भी, रोशनी जरूरी है. अच्छी कविता के लिए बधाई.

    roshni के द्वारा
    November 28, 2010

    राजेंद्र रतूड़ी जी शेर के रूप में बहुत अच्छी टिप्पणी दी आपने मन को भा गयी ……… बहुत अच्छा लिखा है ……. तारीफ के लिए धन्यवाद

    Zyah के द्वारा
    July 12, 2016

    I do not even know the way I ended up here, however I assumed this submit used to be good. I don’t recognize who yo&128#u7;re but certainly you’re going to a famous blogger should you are not already Cheers!

nishamittal के द्वारा
November 28, 2010

रौशनी जी,फिर एक बार आप इतनी अच्छी रचना के साथ.सच बहुत अच्छा लगता है.इस सन्दर्भ में जागरण के आभारी हैं हम उसने ये सुअवसर प्रदान किया है.बधाई आपको.

    roshni के द्वारा
    November 28, 2010

    Nisha ji आभारी तो मै हु जो मुझे इतने अच्छे साथी मिले जो इस कदर दिल खोल कर साथ देते है ….. आपका बहुत बहुत आभार

Harish Bhatt के द्वारा
November 28, 2010

तू परेशान जो हो तो मेरे दो जहान बेचैन रहते है, रूह सकून पाती है जो तू खुल के मुस्कुरा दे… रोशनी जी, दिल को छू जाने वाली बहुत ही अच्छी कविता के लिए हार्दिक बधाई.

    roshni के द्वारा
    November 28, 2010

    हरीश जी आप को ये रचना अच्छी लगी ……. जानकर बहुत ख़ुशी हुई ……आप जैसे महानुभावी की प्रातक्रिया के लिए दिल से शुक्रिया

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 28, 2010

कभी जुगुन कभी तारा कभी तू चाँद बन जाता है, किसी सवेरे तू सूरज की पहली किरण बन के मुझको जगा दे…… खूबसूरत पंक्तियाँ ………… बधाई…….

    roshni के द्वारा
    November 28, 2010

    पियूष जी बहुत बहुत शुक्रिया

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 28, 2010

रोशनी जी,दो लोगों के बिच नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश करती ये लाईने बेहद सुन्दर नजर आती है,धन्यवाद!

    roshni के द्वारा
    November 28, 2010

    धर्मेश जी , आपके विचार जानकर अच्छा लगा ……… प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

    Derex के द्वारा
    July 12, 2016

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Rashid के द्वारा
November 28, 2010

रौशनी जी ,, आप की कविता में छुपा दर्द सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है ,, इसको बयां करने के लिए या कमेंट्स के लिए शब्दों का चुनाव मेरे बस का काम नहीं है,, राशिद http://rashid.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    November 28, 2010

    Rashid जी कुछ न कह कर भी सब कुछ लिख दिया अपने, शब्दों की नहीं भावनाओ का ही असिस्तव होता है .. आपकी इस टिप्पणी के लिए धन्यवाद

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
November 28, 2010

रोशनी जी प्रणाम, भई चातक जी तो कवीता आदि के जौहरी है और उन्‍होंने भी आप की काव्‍य प्रतिभा को निखरा हुआ बताया है यह कबिले तारिफ है, इसी तरह लिखते रहिऐ, इस बहाने हम पाठकों को कुछ अच्‍छा तो पढने को मिलेगा। बधाई।

    roshni के द्वारा
    November 28, 2010

    दीपक जी आपके विचार से तो मै सहमत हु और चातक जी की कविताओं की खुद बहुत बड़ी प्रशंसक हूँ …… उनकी तारीफ और आपकी तरफ से ये विचार जानकर अच्छा लगा … इसी तरह प्रोत्हासन देते रहिये … टिप्पणी के लिए धन्यवाद

chaatak के द्वारा
November 27, 2010

रौशनी जी, आपकी काव्य प्रतिभा दिन ब दिन निखरती जा रही रही है| जिस खूबसूरत भाव को आपने यहाँ इन पक्तियों में पिरोया है वह काबिले-तारीफ़ है| एक बहुत ही खूबसूरत कविता पर आपको कोटिशः बधाई!

    roshni के द्वारा
    November 28, 2010

    चातक जी बस आप सब जागरण साथियों का धन्यवाद है क्युकी आप सब समय समय पे प्रोत्सहन देते रहते है… बाकि आप जैसे अच्छे लेखकों से कुछ न कुछ तो सिखने को तो मिलता ही रहता है …….. प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

    Lyndall के द्वारा
    July 12, 2016

    Haha, I guess I’m one of those early morning birds! It’s actually pretty early (for Weds) where I live. I love Tabata workouts, but I always feel like I’m thisclose to dying when I do th30m#82e&; my husband also comments on the amount of swear words that come out of my mouth! To make up for my extremely short workout yesterday, I did twenty minutes of cardio (somewhat plyo-style) and your Workout 3. Should I do Tabata tomorrow (Thursday), or should I wait another day?

NIKHIL PANDEY के द्वारा
November 27, 2010

तू परेशान जो हो तो मेरे दो जहान बेचैन रहते है, रूह सकून पाती है जो तू खुल के मुस्कुरा दे….. रौशनी जी बहुत खुबसूरत एहसासों से भरी गजल…. बढ़िया बहुत खूब

    roshni के द्वारा
    November 28, 2010

    निखिल जी आपको ग़ज़ल अच्छी लगी धन्यवाद


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