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वह इंतज़ार कर रही है

Posted On: 18 Nov, 2010 Others में

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Enjoy_the_Silenceबहुत बोल लिया बहुत लिख लिया .. कभी किसी टीवी चैनल के ऊपर कभी किसी व्यक्ति पर .. ये सही नहीं है- ये गलत है- ये ख़राब है …… बस इसी बहस में हम सब उलझे रहते है… दुसरो की गलतियाँ तलाशते है, उनके कहे का बुरा मानते है , अपने विचार जो अपने लिए होते है उनके दूसरों के नापसंद किये जाने पर भड़क जाते है …… चलिए अब छोडिये ये सब इतनी सारी tensions क्यों ले रहे है आप हम .. कुछ वक़्त अपने लिए भी तो निकालना चहिये … कुछ देर के लिए इन सब से निकल कर चलो कुछ पल खामोशी के साथ बिताये जाये … न जाने वह कब से इंतज़ार कर रही है … ख़ामोशी हम सबको कुछ देना कहती है .. वह सुनहरे पल जो और कही से नहीं मिल पायेगे .. हम और खामोशी कितना सुन्दर लगता है ये शब्द .. किसी एकांत में खामोशी के साथ डेट पे जाकर तो देखिये खुद से ही प्यार हो जाता है … मन को एक गहरा सकून मिलता है … उन सवालों के जवाब मिलते है जो हम बाहर जाकर तलाश करते है … खामोशी कितना कुछ कहती है … हमारे बारे में हमे याद कराती है … सब खुशी के पल उस एक ख़ामोश लम्हे में कैद हो जाते है …….. फिर हम खुद पे हँसते है की किस तरह बच्चों की तरह छोटी छोटी बातों पे बहस करी थी, किस तरह न लड़ने वाली बातों पे लड़े थे … और किस तरह विचारों के शोर में खो गए थे …… खामोशी के साथ कुछ पल बिता कर एहसास होता है की कितना कुछ खोया है इस भीड़ में- मन की शांति खुद से खुद की पहचान… अपने मन के घर से कितने दिनों दूर रहे और रास्तों में भटकते रहे … कुछ पल अपने लिए न जिए तो क्या जिए, जिन्दगी यु भी चार दिन की होती है और इन चार दिनों में क्या एक दिन अपने खुद के लिए नहीं निकाल सकते हम, सिर्फ अच्छा ही नहीं सोच सकते क्या? परेशानियों को एक दिन की छुटी भी नहीं देते हम .. और खुद उमर भर इनसे छुटकारा पाना चाहते है ……. कितने स्वार्थी हो जाते है हम …… अपने भीतर की आवाज को ख़ामोश कर देते है और खुद दूर भागते है उसकी तलाश में …..खामोशी का मतलब तन्हाई या उदासी तो नहीं … इसे जीना सीखो … इसे महसूस करो , शब्दों को आवाज को कुछ आराम दो.. और खामोशी के साथ बात करो… एक शेर अर्ज है
कभी उन्ही को हो जाती है किसी को पाने की चाहत ,
पर हर चाहत का मतलब दीवानगी नहीं होता ….
तेरी यादों मै हम ख़ामोश जो हैं …
हर ख़ामोशी का मतलब नाराजगी नहीं होता ….

मेरे लिए खामोशी सबसे सुन्दर पल है … जब में ख़ामोश होती हु तो सिर्फ अपने साथ होती हूँ, किसी का होना या न होना कुछ असर नहीं करता… क्या पाया क्या नहीं कुछ मलाल नहीं होता… दिमाग और दिल दोनों खामोशी के साथ ख़ामोश हो जाते है परेशान नहीं करते …. ..
ये वह पल होगे जब हम सच्ची खुशी महसूस करेगे- जब हम खामोशी के साथ कुछ वक़्त बिताना शुरू कर देगे …. आखिर कब तक अपने मन को उसके प्रिय से दूर रख पायेगे … उन्हें आपसे में मिला दो तुम्हे भी सब मिल जायेगा ……….न जाने कब से वह हमारा इंतज़ार कर रही है, तो आइये एक दिन खामोशी और खुद के साथ बिताये….. यकीं मानिये ये आपकी जिन्दगी का सबसे खुबसूरत दिन होगा…
.अंत में यही कहुगी…….
खामोशी जिन्दगी के सफ़र में मुसाफिर की मंजिल है
खामोशी खुद ही महफ़िल है ख़ामोशी खुद का हांसिल है

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194 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepak joshi के द्वारा
November 24, 2010

रोशनी जी, प्रणाम भई मान गए, खामोशी को एक नई परिभाषा में उकेर कर उस को एक नया रूप  दिया है, और भटकों को एकाकी पन या अकेलेपन का सही मायना बता कर। और अंत में कही पंक्तियां तो सारी बातों का निचोड या सारांश है – खामोशी जिन्दगी के सफ़र में मुसाफिर की मंजिल है खामोशी खुद ही महफ़िल है ख़ामोशी खुद का हांसिल है बहुत ही अच्‍छे लेख के बधाई। -दीपकजोशी63

    roshni के द्वारा
    November 24, 2010

    दीपक जी प्रणाम …….बहुत देर से आना हुआ आपका कही आप भूल तो नहीं गए थे……. नहीं वैसे भूल नहीं सकते आप हाँ जरुरु कुछ नया लिखने में व्यस्त होगे …….. आपकी प्रतिक्रिया और बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद …….. आभार सहित

anju के द्वारा
November 22, 2010

रौशनी जी बहुत सुन्दर विचार दिए

    roshni के द्वारा
    November 23, 2010

    अंजू जी धन्यवाद

rpraturi के द्वारा
November 20, 2010

रौशनी जी, सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहता हूँ कि आप अपनी फोटो अपने ब्लॉग पर डालें, हो सकता है कि मैं देख नहीं पा रहा हूँ, पर अगर नहीं डाली है है तो कृपया डालें क्योंकि हाल ही में हम कुछ दोस्तों कि फेसबुक पर बहस हो चुकी है कि हमें अपनी पहचान नहीं छुपानी चाहिए. तभी मैं आपके लेख पर कमेन्ट कर सकूंगा.

    roshni के द्वारा
    November 21, 2010

    rpraturi जी , फोटो का लेख से क्या सम्बन्ध है??? वैसे भी मेरे ब्लॉग पे उड़ते हुए पंछियों की तस्वीर है जो मुझे बहुत ही पसंद है ….. ब्लॉग पे उड़ते हुए बहुत सुन्दर लगते है …… और जो चीज़ मन को अच्छी लगे नारों को सकूं दे उसे मै कैसे दूर करू ??? बस एक फोटो न लगने के कारन टिप्पणी न देना तो गलत होगा …….. आपके जवाब का इंतज़ार करेगे , आप इस बात पर थोड़ी सी रौशनी डालेगे तो अच्छा रहेगा … धन्यवाद सहित

    November 23, 2010

    ठीक है रौशनी जी, लोकतंत्र में सबके अपने व्यक्तिगत अधिकार हैं. आपके विचार काफी सुन्दर हैं और एकांत में बैठ कर आपका लेख पढने से इस भागम भाग और कोलाहल भरी जिन्दगी में एक ठंडी हवा के खुशबूदार झोंके की तरह दिल को सुकून मिलता है. कृपया यूं ही विचारों. की महक बिखेरते रहें.

    roshni के द्वारा
    November 23, 2010

    rpraturi जी अपने तो लोकतंतर का हवाला दे दिया .. चलिए ठीक है ..पर मै इस बारे में आपके विस्तृत विचार जानना चाहती थी .. की फसबूक पर जो बहस हुई उसका क्या निष्कर्ष निकला और ये क्यों जरुरी है मगर आपने हमारे ज्ञान में वृद्धि नहीं की …… वैसे कोशिश करुगी की अपनी फोटो यहाँ पर लगाऊ .. आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

    November 23, 2010

    रोशनी जी, अभी किसी सज्जन ने २-३ दिन पहले ही जागरण जंक्शन पर ही संपादक मंडल को लिखा था की लोग फेक आइ. डी. से ब्लॉग बना लेते हैं और हाल ही में हम कुछ लोगों की फेसबुक पर भी चर्चा हुई थी की लोग अपने प्रोफाइल पर किसी सेलेब्रिटी की या कोई और फोटो लगा कर लिखते हैं, इसलिए ऐसा आपको लिख दिया. इसका कोई और अभिप्राय नहीं था. फेसबुक के मित्रों की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए मैं किसी का नाम तो नहीं लिख सकता लेकिन कुछ मित्रों के विचार आपको भेजने की कोशिश कर रहा हूँ. और उसका निष्कर्ष यह था की जिनको लेकर यह चर्चा शुरू हुई थी, उन्होंने इस बात को स्वीकार कर लिया था. लेकिन जरूरी नहीं की आप भी इसे माने. कुछ चुनिन्दा टिप्पणियां जिनमे पुरुष और महिलाएं दोनों हैं निम्न प्रकार हैं- -mujhe bahut koft hoti hai aise logon se jo facebook me dost to banana chahte hain , par apni asli photo lagane se bhi ghabrate hain ya fake foto laga kar sabko gumrah karte hain, aap sab bhi sayad mere saath sahmat honge. -मैंने अपना फ़ोटो लगा लि‍या, अब मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ । -maine ek model ka photo net se lift karke lagaya kyonki iske gestures achchhe लगे. -Ye log facebook ke liye jashushi karte hain sayad. Bhesh badal badal kar prakat hote hain. -Ek photo ko leker itne bawal ki jarurat kya hai, dosti to dil se hoti hai jab dil he nahi mila to photo kya karegi. Har insan apne hi najariye se sochta hai, galt insan galt najariye se aur sahi insan sahi najariye se. -………… ji tabhi to ………. ji ne likaha hai ki sahi photo lagane se darr kyon..? jab dosti dil se hoti hai. Jab lagani hi hai to kisi or ki photo kyon..? -bilkul aap sahi kah rahe हैं -chehra insan ka vyaktitva ko jahir kartee hai. nam se kya information se kya ? jab dost banna hai to muh chipa kar q .. -main aapse ekdam sahmat हु -Bilkul sahi kaha aapne. Khastaur par mahilayen pata nahi kyon apni soorat dikhane se ghabraati hain. Bhagwan ne sabhi ko sundar banaya hai aur jaisa banaya hai use sweekar karna chahiye. -Aap ne to mere man ki कही -i am agree with you Sir….and i think this is not a good habbit….and they are a low mind person….. -…………….ji lagta hai aap logo ne than liya hai ki mujhe ghar se bahar nikal kar hi dam lege, thik hai dosti ke liye sab karna pdta hai. Lekin photo lagane ka dar se kya rishta hai ye to man ki bat hai. -hum sab koi na koi vichar rakhte hain, yeh theek hai ki hum alag alag social, political & economical background se aate hain , isiliye vicharon me bhi bhinnta hai, par adhikans ne kaha ki jab hum social site par ho to khyal rakhe ki social riste nibhayen aur social riste muh chupa kar nahi nibhaye ja सकते

    November 23, 2010

    हाँ रोशनीजी मुझे वह लेख भी मिल गया है जिसका जिक्र मैंने अभी किया था. इसे नीचे पेस्ट कर रहा हूँ. जागरण ब्लॉग के सम्पादकों को एक शिकायत पत्र पोस्टेड ओन: November,18 2010 कविता में आदरणीय संपादक महोदय, जैसा की आपको पता है की आजकल जागरण मंच का माहौल ठीक नहीं चल रहा है उसी सम्बन्ध में मई ये पत्र आपको लिख रहा हूँ….और उम्मीद करता हूँ की इस ओर अवश्य ध्यान दिया जाएगा..आपके सामने मै कुछ नाम प्रस्तुत करने जा रहा हूँ जैसे..Zhanqidbcomu,,,,jqebumcf….urlnoad….paitbhulmr क्या आप सब नहीं देख रहे है या फिर देखते हुए भी कुछ कर नहीं पा रहा है..आजकल कोई भी पोस्ट डालिए और दस से पन्द्रह मिनट में वो पोस्ट तीसरे पन्ने पर पहुँच जाता है और फिर कुछ घंटों बाद उसका अस्तित्व ही ख़तम हो जाता है और जब हम सभी पाठक जो की लगभग सभी अपने व्यस्त समय में से समय निकाल कर जब ब्लॉग पर पहुँचते है तो उने कुछ उलटे सीधे नामो से पटा जागरण ब्लॉग एक शोशल नेटवर्किंग साईट की तरह दिखाई पड़ता है…और हम सब अपनी मेहनत से बनाये गए किसी पोस्ट को पोस्ट करने के बाद उसकी धज्जी उड़ते हुए देखते है…..आप तो जानते ही होंगे की एक रचनाकार की अगर रचना को कूड़े में फेंक दिया जाए जो की अगर उस काबिल न हो तो उसके लिए उससे बुरा कुछ भी नहीं हो सकता क्योंकि एक रचनाकार की साँसे उसकी रचनाओं में बसी होती है…अगर मै या फिर यहाँ पर मौजूद सभी लोग चाहे वो आदरणीय शाही जी हो..श्री बाजपाई जी या फिर चातक जी….बहुत से बहत ही उत्कृष्ट रचनाकार है जो की अपनी किसी भी लेखनी को अगर जागरण मंच पर डालते है तो कुछ सोच समझ कर ही डालते है उन्हें पटा होते है की उनके डाले हुए पोस्ट को उचित सम्मान मिलेगा…मगर ये क्या रचना कब आई कब गयी किसी को पटा भी नहीं चला अगर रचना फीचर हो गयी तो ठीक अन्यथा रचना पहुँच गयी कूड़ेदान में….. मेरा मानना है की इस समस्या से सभी लोग परेशान होंगे..तो मै जागरण मंच के सम्पादक जी से सीधे तौर पे पूछता हूँ की इसका निराकार होगा या नहीं .क्योंकि अगर इसका निराकरण न हुआ तो मै तो जागरण मंच से चला जाऊंगा….. मै जागरण मंच के सभी पाठको से अनुरोध करता हूँ की वो मेरे सुर-से-सुर मिलाये और जब तक इस समस्या का निराकरण नहीं hota tab tak apni koi bhi lekhni post n kare ……maine to bahut dino se apni koi rachna post nhi ki….aaj samay nikaal kar ye ptra likh raha hun… Aakash Tiwaary

abodhbaalak के द्वारा
November 20, 2010

रौशनी जी, जगजीत सिंह जी की एक ग़ज़ल सुनी थी, की ख़ामोशी खुद अपनी सदा है ऐसा भी हो सकता है, और सन्नाटा भी बोल रहा है ऐसा भी हो सकता है, आपके इस लेख में भी कुछ ऐसा ही है, आपने ख़ामोशी को एक आवाज़ दे दी हैं, बहुत सुन्दर रचना, बंधाई ना देना तो ना इंसाफी होगी http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    November 21, 2010

    अबोध जी आप सब की प्रतिक्रियाए हमेशा और उतसाह भरती है … और आप नाइंसाफी तो कर नहीं सकते इसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया …..युही अपने विचार देते रहिएगा आभार सहित

allrounder के द्वारा
November 20, 2010

रोशनी जी एक बेहतरीन लेख के लिए बहुत – बहुत बधाई ! आपका ये लेख कम से कम मेरे लिए काफी प्रेरणास्पद है, क्योंकि मेरी लिखने की आदत छूट गई है, और दिमाग मैं आईडिया भी नहीं आ रहे हैं है, ऐसे मैं तन्हाई मैं बैठकर, ख़ामोशी से कुछ सोचने पर ही कुछ न कुछ आईडिया तो आएगा! सचमुच ख़ामोशी और अकेलेपन का अपना ही एक मजा है, जिसका आनंद सिर्फ वे ही ले सकते है जिन्हें इसकी आदत हो ! एक अच्छे लेख के लिए एक बार फिर से बधाई !

    roshni के द्वारा
    November 21, 2010

    सचिन जी ….. आप तो बहुत जल्दी ही जागरण पर bouncer फेखने लग जायेगे …… और सच मानिये आपके पिछले सरे bouncer पढ़े थे कमाल के थे …बस उसी तरह के हास्य bouncers का इंतज़ार है ….. आपको लेख अच्छा लगा ये जानकर खुशी हुई .. बहुत बहुत धन्यवाद

Coolbaby के द्वारा
November 20, 2010

Some joys are better expressed in silence as a smile holds more meaning than words,Yes lonelyness feels to us suffering but to be alone with my desire to find my self makes me full of joys ……The beautiful nature speaks in words of silence …..When the green woods laugh with the voice of joy……..The drops of rain fall on fresh leaves and kiss the floor with a beautiful rhythm……..that s devine song and among them I am ……..Wow

    roshni के द्वारा
    November 21, 2010

    Coolbabay ji “The beautiful nature speaks in words of सिलेंस” very nice lines….. thanks for ur comment

K M Mishra के द्वारा
November 19, 2010

“हम और खामोशी कितना सुन्दर लगता है ये शब्द .. किसी एकांत में खामोशी के साथ डेट पे जाकर तो देखिये खुद से ही प्यार हो जाता है … मन को एक गहरा सकून मिलता है … उन सवालों के जवाब मिलते है जो हम बाहर जाकर तलाश करते है” रोशनी बहन नमस्कार, बहुत सही कहा अपने. खामोश हो कर ही हम अपने आप पर एक नज़र डाल सकते हैं और अपनी गलतियों पर विचार कर सकतें हैं. इसके अलावा ख़ामोशी या शांति या विचार सुन्या हो जाना कुछ देर के लिए हमें ईश्वर के करीब भी ले जाता है. सुन्दर पोस्ट के लिए आभार.

    roshni के द्वारा
    November 19, 2010

    आदरनिये मिश्रा जी नमस्कार ….. कुछ पल की खामोसी ईश्वर के करीब भी ले जा सकती है इस बात से मै पूरी तरह सहमत हु .. आखिर ईश्वर भी तो कहता है की पहले खुद के अन्दर के मानव को जानो फिर मेरी प्राप्ति भी सरल है ……. आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार और धन्यवाद

ashvinikumar के द्वारा
November 19, 2010

रौशनी जी, तथ्य परक एवं चिंतन करने योग्य लेख अगर जीवन में इसका अंश मात्र भी हम अनुकरण कर ले तो जीवन धन्य हो जाए,, सुंदर प्रस्तुति………जय भारत

    roshni के द्वारा
    November 19, 2010

    अश्विन कुमार जी आपके विचार जान कर अति हर्ष हुआ ….. इसी तरह अपनी कीमती टिप्पणी और विचारो से अवगत कराते रहिएगा धन्यवाद सहित जय भारत

R K KHURANA के द्वारा
November 19, 2010

प्रिय रौशनी जी, आपके इस लेख ने सिद्ध कर दिया है की आप बहुत ही अच्छी और सुलझी हुई लेखिका है ! मौन में बहुत ताकत होती है ! इसीलिए हमारे पुराने ऋषि मुनि मौन धारण करते थे ! कहते है न कि – एक चुप सौ सुख – फिर आपकी शायरी ने मन मोह लिया ! खामोश निगाहों से लोग कितना कुछ कह जाते है ! बहुत सुंदर लेख ! राम कृष्ण खुराना

    roshni के द्वारा
    November 19, 2010

    आदरनिये खुराना जी नमस्कार एक चुप सो सुख पुराने समय में कहे गए ये वाकये सचाई के बहुत करीब है ……. अपने जो तारीफ करी है उसके लिए क्या कहू बहुत अच्छा लगा .. अपने से बड़े , अनुभवी और सफल लेकः से तारीफ सुन कर किसे न अच्छा लगेगा … बहुत बहुत धन्यवाद युही अपने प्यार और आशीर्वाद से हमे धन्य करते रहे ! आभार सहित

priyasingh के द्वारा
November 19, 2010

मैंने तो कल से ही ख़ामोशी अख्तियार कर रखी है………और आज आपका ये लेख पढ़ा ऐसा लगा जैसे मेरे लिए ही आपने इसे लिखा है ………. सही कहा आपने विचारो के मंथन के लिए, अपने आप में खोने के लिए, खामोश होना बहुत जरुरी है …………..

    roshni के द्वारा
    November 25, 2010

    Priya ji shama chahti hun apki टिप्पणी का जवाब नहीं दिया … पता नहीं कैसे रह गया ……. आपके विचारों को जानकर अति हर्ष हुआ धन्यवाद सहित

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
November 19, 2010

सुश्री रोशनी जी, जिंदगी के सबसे खुबसूरत दिन को पानें के लिए सोचा खामोशी अख्तियार कर लूँ लेकिन फिर ध्‍यान आया कि टिप्‍पणी ना लिखी तो लगेगा कि………..। लेकिन जिंदगी का सबसे हसीन दिन छोड़ना भी नहीं चाहता…….। बहुत सुंदर लेख । अरविन्‍द पारीक

    roshni के द्वारा
    November 19, 2010

    अरविन्द जी खामोशी अख्तियार जरुर करिये मगर log out होने के बाद .. जब तक यहाँ है तब तक तो साथ देना ही पड़ेगा .. फिर कोई एक दिन सोच लीजिये अपने लिए .. और उस जी लीजिये कुछ लम्हे आपे खुद के साथ टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 19, 2010

नमस्ते रोशनी जी…………कभी उन्ही को हो जाती है किसी को पाने की चाहत , पर हर चाहत का मतलब दीवानगी नहीं होता …. तेरी यादों मै हम ख़ामोश जो हैं … हर ख़ामोशी का मतलब नाराजगी नहीं होता ……….बेहद सुन्दर लाईने बस इतना ही कहने कोशिश करूँगा-एक सुन्दर प्रस्तुती-,धन्यवाद!

    roshni के द्वारा
    November 19, 2010

    धर्मेश जी नमस्ते टिप्पणी के लिए धन्यवाद …….. आपको प्रस्तुति अच्छी लगी जानकर ख़ुशी हुई आभार सहित

nishamittal के द्वारा
November 19, 2010

रोशनी जी, आप कहीं मुझसे नाराज है क्या? किसी पर कोई दोषारोपण नहीं न नाराजगी.यदि मेरे विचारों से आपको कोई ठेस लगी तो क्षमा प्रार्थी हूँ.वैसे विचार तो अलग अलग होते ही हैं इसमें कैसी नाराजगी कैसा मोह. आपकी प्रस्तुति बहुत अच्छी लगी.बधाई पुनः sorry

    roshni के द्वारा
    November 19, 2010

    निशा जी ये क्या कह दिया आपने मै आपसे क्यों नाराज हूगी कोई कारण नहीं है! अगर आप मुझसे कुछ कहती भी है या मेरे विचारों से सहमत नहीं है तो मै क्यों नाराज हूगी बल्कि आप के विचार सुन कर आतम विश्लेष्ण करुगी .. आपने Sorry कह कर अब मुझे ठेस पंचैये है … आप बहुत अनुभवी लेखिका है मेरी senior है मुझे बस आप सब से ही सीखना है अगर बड़े छोटों को कुछ कह भी दे तो हँसकर सविकारीय है .. एक नर्म निवदेन है आप को कभी मेरी कोई बात अच्छी न लगें तो नारज मत होयिगा …… मै आपकी फेन हु बस और आपके प्यार और मार्गदर्शन की जरूरत है … आशा की ये सब मिलता रहेगा ………… धन्यवाद सहित

chaatak के द्वारा
November 19, 2010

रौशनी जी, इस पोस्ट को पढ़ते-पढ़ते चुप हो गया हूँ ये खामोशी लम्बे अरसे से साथ देती आई है| आज आपकी जुबानी, इसकी शिद्दत को थोडा और बढ़ा गई| “चुप साध ‘कृष्ण’ बैठा अब देख रहा हलचल, तूफ़ान ले हिलोरें, बीच ताल कौन जाने !” खूबसूरत प्रस्तुति पर बधाई!

    roshni के द्वारा
    November 19, 2010

    चातक जी , आप पढ़ते-पढ़ते चुप हो गए मै समझ सकती हु क्यों होता है ये… पर कई बार तो आपसे ही जानने की इच्छा होती है क्यों है ये खामोसी लम्बे अरसे से आपके साथ ……. बस यही कहुगी ये ख़ामोशी जो साथ है मेरा प्यार है मेरा यार है शोर में सकून है पतझड  में बहार है धन्यवाद सहित …..

    Nonie के द्वारा
    July 12, 2016

    Grade A stuff. I’m unaubstionqely in your debt.

Aakash Tiwaari के द्वारा
November 19, 2010

रौशनी जी सबकुछ तो श्री शाही जी और श्री पियूष जी ने ही सब कुच्ग कह डाला अब मै क्या कहूं..मै तो बस यही कहूँगा…शान्ति में अकेले बैठने का अपना अलग ही मजा है………… आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    November 19, 2010

    आकाश जी शांति में बैठ कर ही असली मज़ा आता है जब खुद ही सवाल करते है हम अपने आप से और खुद ही जवाब देते है …….. आपके विचारों के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 18, 2010

इस भीड़ भाड़, शोर शराबे से भरी दुनिया में हम भूल ही गए है……..की हमारा अपना भी कोई वजूद है. …….. हमारी अपनी आवाज़ कहीं दब सी गयी है…………… किसी शांत स्थल पर बैठ कर (रात्री में क्योकि दिन में चिड़ियों का संगीत भी आपको उस अवस्ता तक नहीं पहुचने देता है…) आप ध्यान दें तो आपको अपने भीतर से एक आवाज सुनाई देती है………….. और वो है आपकी धड़कन की आवाज़ जो हम कभी सुन ही नहीं पाते…………. पर जब आप उसको सुनते हैं तो आपको अहसास होता है की इस बाहर की दुनिया से अलग भीतर भी कुछ है…………….. बढ़िया प्रस्तुति ………….. बधाई………

    roshni के द्वारा
    November 19, 2010

    पियूष जी, बस ये छोटी सी कोशिश थी अपने अहेसास को बाटने की, कि बाहर की दुनिया से अलग भी एक दुनिया है जो सिर्फ हमारी है और हमारा इंतज़ार कर रही है …….. धन्यवाद सहित

    Sailor के द्वारा
    July 12, 2016

    I’m impressed by your writing. Are you a professional or just very knblaedgelowe?

आर.एन. शाही के द्वारा
November 18, 2010

रोशनी जी, आपकी खामोशी ने जैसे एक कानफ़ाड़ू शोर के साथ टेक आँफ़ करते विमान को आकाश के हज़ारों फ़ीट ऊपर के बियाबान में पहुंचा दिया हो, जहां पहुंचने के बाद सब कुछ थम कर शान्त और निर्विकार हो जाता है । कहां वह शोर और सीट बेल्ट का बंधन, और फ़िर एकाएक ही सारे बंधनों से मुक्ति के साथ चारों ओर रुई के गालों जैसे स्थिरचित्त बादलों के बीच तैरने की अनुभूति । फ़िर मधुर संगीत के अतिरिक्त सब कुछ बेहद खामोश, और खामोशी की चादर में लिपटी जीवन-यात्रा, चन्द लमहों की ही सही । यही तो असली चाहत होती है हमारी, जिसकी तलाश में हम एक नामालूम सी भागमभाग और छीना झपटी में व्यस्त हैं । रोचक और प्रेरणास्पद आलेख । साथ ही आपकी एक नई प्रतिभा से परिचय भी । बधाइयां ।

    roshni के द्वारा
    November 19, 2010

    शाही जी, आप ने कितने विस्तृत शब्दों में सब बयाँ किया … जिन्दगी की जरूरत चंद सकूं के लम्हे ही तो होते है .. इसी सकूं की तलाश में जिन्दगी ता उम्र भागती है…. आपके प्रोत्साहन के लिए तहे दिल से शुक्रिया… धन्यवाद सहित

    Turk के द्वारा
    July 12, 2016

    I haven’t heard of Color Me Rad! I’ll have to look into it. Yes, I definitely believe the energy of the crowd really helped energize me through! I hope to participate in the Color Run again, as well as the Glow Run (a night-time 5k with body paint and gl7c1tiwks!)It&#82so;s amazing to hear your inspirational story! Stay colorful!


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