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सजा

Posted On: 30 Oct, 2010 में

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saja ये दिल रोता है तेरी मोहब्बत को याद कर के
ये आंखे बरसती है कभी तेरी बेवफाई पे,
ये सोचता हूँ मै कि किस तरह भूलू तुझे
ये जानता हूँ की उम्र भर न भुला पाउगा तुझे,
न जाने क्यों मै एक फैसला नहीं कर पाता
न जाने क्यों मै खुद को ये सजा देता हूँ,
निकालता हूँ हर बार तुझ को दिल से
और फिर भी तेरी यादों में खोया रहता हूँ,
तू दगा देकर तनहा छोड़ गया है मुझे
फिर भी ये दिल दुआ देता है तुझे,
ऐ सनम तू साथ है मेरे मेरी हर तन्हाई में
कोई गम नहीं की तुमने वफ़ा नहीं की
इतना ही बहुत है की तू शामिल है मेरी तबाही में,

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1986 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chadndra kailash के द्वारा
December 6, 2010

कशिस मोहब्बत की सजा पाने को भी बेक़रार रहती है बस उसे केवल मौहब्बत की चाहत रहती है उसके दीदार की चाहत रहती है खुदा करी हर दिल की हो तमन्ना पूरी मैं खुश हूँगा उनको देखकर सजा मिले मोहब्बत मैं तो सजा मैं हमारा दिलवर मिले उसके सिवा हमे किसी की चाहत नहीं

    roshni के द्वारा
    December 7, 2010

    चन्द्र जी आपके विचारों के लिए शुक्रिया ….. मोह्बात में सजा ये वफ़ा सब एक है .. वोह खुशकिस्मत होते है जीने मोहब्बत के गम मिलते है ..

anju के द्वारा
November 18, 2010

.रौशनी जी ,बहुत आछे से दिल के जज्बातों को बयाँ किया है आपने की तू दगा दे कर बी …………मन को छूती रचना

    roshni के द्वारा
    November 26, 2010

    अंजू जी धन्यवाद

    Lyzbeth के द्वारा
    July 12, 2016

    Oh yeah, fauulobs stuff there you!

Amit kr Gupta के द्वारा
November 17, 2010

रौशनी जी, आपकी यह रचना मुझे बहुत ही पसंद आई. मैंने कुछ नए ब्लॉग लिखे हैं भारत में बैंकिंग सेवा और नारी की समस्या यदि कभी समय मिले तो उन्हें पढ़कर अपने शिकायतों सुझाव से मुझे अवगत करावे. http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    November 17, 2010

    अमित जी धन्यवाद आपके विचारों के लिए और आपके लेख पढ़कर कर अति हर्ष होगा

chaatak के द्वारा
November 12, 2010

रौशनी जी, आपने एक बार फिर हमें वाह-वाह! कहने पर मजबूर कर दिया| ‘दर्द सारे तेरी रहमत समझ के सह लूँगा, कोई भी दे-दे सजा मुझको, जिंदगी के सिवा !’ अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    roshni के द्वारा
    November 12, 2010

    चातक जी धन्यवाद ….. काफी समय बाद आप मंच पर दिखे ….. और आपकी प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से शुक्रिया

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
November 4, 2010

दीपावली का यह पावन पर्व आपकी व आपके परिवार की खुशियों के रंग दूगनें कर दें और सारे दुख-दर्द जिस तरह रोशनी में अंधकार दूर होता है उस तरह विलीन हो जाएं । दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं । अरविन्‍द पारीक

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
November 4, 2010

सुश्री रोशनी जी, सारे विशेषण कविता की प्रशंसा में आपको प्राप्‍त हो चुके हैं । नया कुछ लिखनें को बचा ही नहीं । फिर भी एक अच्‍छी रचना के लिए बधाई । अरविन्‍द पारीक

    roshni के द्वारा
    November 12, 2010

    अरविन्द जी धन्यवाद …….. कुछ व्यस्त होने के कारन प्रतिक्रिया का उत्तर देने में देरी हो गयी ……… दिवाली की शुभ कामना के लिए धन्यवाद ..आशा है की आप की दिवाली भी खूब बढ़िया रही होगी .. आभार सहित

    Romby के द्वारा
    July 12, 2016

    These topics are so cofnusing but this helped me get the job done.

Manish Singh "गमेदिल" के द्वारा
November 4, 2010

एक और भावुकता से भरी खूबसूरत कृति के लिए बधाई…………………. इतना ही बहुत है की तू शामिल है मेरी तबाही में,……………………. कितना दर्द समेटती यह पंक्तियाँ……………..

    roshni के द्वारा
    November 12, 2010

    मनीष जी धन्यवाद

chadndra kailash के द्वारा
November 4, 2010

dear आपकी कविता पडकर ise main rojana sham ko padta hoon ye mere liye inspiration hain आपकी कविता dwara diye gaye message ka ये सोचता हूँ मै कि किस तरह भूलू तुझे न जाने क्यों मै एक फैसला नहीं कर पाता जाने क्यों मै खुद को ये सजा देता हूँ, दगा देकर तनहा छोड़ गया है मुझे फिर भी ये दिल दुआ देता है तुझे, तू साथ है मेरे मेरी हर तन्हाई में कोई गम नहीं की तुमने वफ़ा नहीं की इतना ही बहुत है की तू शामिल है मेरी तबाही में, त्याग का जो जज्बा हैं वो ही सच्ची मोहब्बत की पहचान हैं खुदा से दुया हैं के आप इसी जज्बे के साथ लिखते रहो

    roshni के द्वारा
    November 12, 2010

    चन्द्र कैलाश जी जान कर एकच लगा की इस रचना से आपको inspiration मिलती है …….. ऐसा लगता है जैसे कितनी गहराई से पढकर आप अपने विचार लिखते है ……. आपका बहुत बहुत धन्यवाद

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 1, 2010

कोई गम नहीं की तुमने वफ़ा नहीं की इतना ही बहुत है की तू शामिल है मेरी तबाही में, खूबसूरत पंक्तियों से सजी इस रचना के लिया हार्दिक बधाई……….

    roshni के द्वारा
    November 1, 2010

    पन्त जी धन्यवाद ……. बहुत बहुत धन्यवाद सराहना के लिए आभार सहित

    Alyn के द्वारा
    July 12, 2016

    Sharp thkniing! Thanks for the answer.

NIKHIL PANDEY के द्वारा
November 1, 2010

इतना ही बहुत है की तू शामिल है मेरी तबाही में… क्या बात है बहुत खूब रोशनी जी ….

    roshni के द्वारा
    November 1, 2010

    निखील जी धन्यवाद …… युही आगे भी आपके विचारों का इंतज़ार रहेगा धन्यवाद सहित

    Affinity के द्वारा
    July 12, 2016

    It’s a joy to find soneome who can think like that

Coolbaby के द्वारा
November 1, 2010

Listen this pain ! The breeze whispers through the pine bringing her soft voice to me. It is carried ever lightly as I sit alone ‘neath sad snow laden boughs. The trees, tall in their majesty with arms upraised, ask for love. For their boughs do bend as a shoulder shrug. Love me, they cry silently, as stalwart they stand. The trees sigh in the breeze with the song of ‘her’ melody. A longing sigh for love lost long ago And they stand and listen in silent hope. for the return of the one. And the breeze continues its journey Lightly touching each bough with her voice. And the boughs forever remain saddened With the loss of yet another. Until, alone, they break and fall.

    roshni के द्वारा
    November 1, 2010

    Coolbaby ji The trees sigh in the breeze with the song of ‘her’ melody. A longing sigh for love lost long ago And they stand and listen in silent hope. for the return of the one. wonderful touchings lines. thanks for sharing this lovely poem

    Maralynn के द्वारा
    July 12, 2016

    Das ist ja eine richtig tolle Idee. Da hat sich das ei-nunWolf-sechen doch gelohnt. Bin seit Ewigkeiten auf der suche nach Windlichtern, die individuell (und dabei auch noch schön) gestaltet werden können. Vielen, vielen Dank!!Viele Grüße, Nora

Aakash Tiwaari के द्वारा
November 1, 2010

वाह-वाह-वाह-वाह…अब इससे ज्यादा क्या कहूँ..आदरणीय मिश्र जी ने तो इकदम सही कहा की “बहुतों को अपनों बीता हुआ कल याद कराया होगा इन पंक्तियों ने” आपकी इन लाइनों के एक-एक शब्द ने शरीर में जो तरंग दौड़ाई है ,एक आग जो की लगभग बुझ ही रही थी उसको ऐसा धधकाया है आपने की क्या कहूँ,,ज्यादा बोलता हूँ तो लोग गलत समझेंगे…कम बोलता हूँ तो भी……. मगर इतना जरूर कहूँगा….की आपकी ये कविता मुझे सैकड़ों कविता लिखने पर मजबूर करेंगी….क्योंकि ज्यों-ज्यों बातें याद आएगी हर एक लम्हा…नयी रचना कर डालेगी…..आप की इन पंक्तियों पर आपको तहे दिल से बधाई भगवान करे आपकी कलम की श्याही हमेशा बनी रहे,,,… सोचता हूँ इस बार भी दो शब्द कहूँ मगर आपकी रचना के आगे फीके ही नजर आयेंगे…. “नासूर बना है जीवन मौत का ख़्वाब हर पल मेरे मन में है, वो जख्म देने वाली बेवफा आज भी मेरे दिल में है”… आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    November 1, 2010

    आकाश जी ….. जानकर अच्छा लगा की मेरी इस रचना से आपको बहुत सी और कविता लिखने को प्रेरित करेगी … मन की आग को युही प्रजव्लित रखिये तभी रचना लिखी जा सकेगी …आपकी आने वाली रचनाओ का इंतज़ार रहेगा…….. और ये सब आप मित्रजनों की दुआओं और प्रोत्साहन का असर है …….. और आपकी ये दो शब्द फिर से बहुत सुन्दर है…..

KMMishra के द्वारा
November 1, 2010

ये दिल रोता है तेरी मोहब्बत को याद कर के ये आंखे बरसती है कभी तेरी बेवफाई पे, ये सोचता हूँ मै कि किस तरह भूलू तुझे ये जानता हूँ की उम्र भर न भुला पाउगा तुझे, बहुतों को अपनों बीता हुआ कल याद कराया होगा इन पंक्तियों ने आभार.

    roshni के द्वारा
    November 1, 2010

    K.M Mishra जी…….. चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है हम को अब तक आशिकी का वोह जमाना याद है … गीत की तर्ज पर हो सकता है बहुत लोगों ने अपने वोह दिन याद कियों हो … लगता है आप को भी कुछ न कुछ याद आ गया…… चलिए एक शाम यादों के नाम भी होनी चहिये … धन्यवाद सहित

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
November 1, 2010

रोशनी जी, प्रणाम बहुत ही अच्‍छी पंक्तियों में सजा को सजाया है – कोई गम नहीं की तुमने वफ़ा नहीं की इतना ही बहुत है की तू शामिल है मेरी तबाही में । अभिव्‍यक्‍ती बहुत सुन्‍दर एवं शयराना है। इसी तरह लिखते रहें। धन्‍यवाद।

    roshni के द्वारा
    November 1, 2010

    दीपक जोशी जी .. सजा को भी प्रेमी मन अपनी खुशकिस्मती मानते है क्युकी इश्क के गम भी सभी को मय्सर नहीं होते …… आपको ये शायराना अंदाज अच्छा लगा धन्यवाद

    Judith के द्वारा
    July 12, 2016

    Sky: “Inter frestade av Meireles”Sky: “Inter tempted by Raul Meireles”">Bra värvning om det sker….löpstark spelare som Guarin, bÃ¥de offensiv och denv.sie…f.missa…

Alka Gupta के द्वारा
November 1, 2010

रोशनी जी ,बहुत अच्छी रचना है तू दगा देकर छोड़ गया है मुझे,फिर भी ये दिल दुआ देता है तुझे बहुत सुंदर अभिव्यक्ति……

    roshni के द्वारा
    November 1, 2010

    अलका जी टिप्पणी के लिए शुक्रिया … एक टूटे हुए दिल की भावनाओ को बयाँ करने की कोशिश है …. धन्यवाद सहित

    Githa के द्वारा
    July 12, 2016

    Clear, intmroafive, simple. Could I send you some e-hugs?

mihirraj2000 के द्वारा
November 1, 2010

तू शामिल है मेरी तबाही में…कुछ ख़ास अंदाज़ में कह गयी आप ये बात. माजा आया पढ़ कर. शुभकामनाये.

    roshni के द्वारा
    November 1, 2010

    मिहिर्राज जी आपको रचना अच्छी लगी जानकर ख़ुशी हुई … आपकी टिप्पणी और शुभ कमाना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    Infinity के द्वारा
    July 12, 2016

    Submitted on 11-8-2010 at 07:34amThanks for your co8mmnts&#e230;I can’t help remember this lesson everytime I wash my clothes.I hope you all find a good balance and enjoy your children. They grow up so fast.

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
October 31, 2010

बहुत सुन्दर रचना रोशनी जी ! यूँ ही लिखती रहें बधाई

    roshni के द्वारा
    October 31, 2010

    शैलेश कुमार पाण्डेय जी आपके प्रोत्सहन और टिप्पणी के लिए कोटिश धन्यवाद …..

abodhbaalak के द्वारा
October 31, 2010

रौशनी जी क्षमा चाहता हूँ की इसके पहले किसी और पर किया गया कमेन्ट आपके पोस्ट पर डाल दिया, प्यार शायद इसी को कहते हैं की आदमी चाह कर भी जिसे प्यार करता है उसका बुरा नहीं सोच पाता. बहुत ही सुन्दरता से आपने एक प्रेमी की भाव को व्यक्त किया है, जिसकी प्रेयसी ने उसके साथ बेवफाई की है. सदा की भांति सुन्दर रचना, बंधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    October 31, 2010

    अबोध जी कोई बात नहीं कभी कभी गलती हो जाती है …….. कविता के बारे में आपके विचार जानकर अच्छा लगा …….बस जरा सा प्रयास किया है एक प्रेमी के मन को बयाँ करने का धन्यवाद सहित

abodhbaalak के द्वारा
October 31, 2010

विनय जी, आजे बदलते परिवेश पर लिखी सुन्दर रचना, बंधाई हो, ऐसे ही लिखते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com

R K KHURANA के द्वारा
October 31, 2010

प्रिय रौशनी जी, तुस्सी ग्रेट हो ! कोई गम नहीं की तुमने वफ़ा नहीं की इतना ही बहुत है की तू शामिल है मेरी तबाही में, बहुत ही सुंदर कविता ! मोहब्बत ऐसी किताब है की उसे ही छुट्टी न मिली जिसने सबक याद किया ! राम कृष्ण खुराना

    roshni के द्वारा
    October 31, 2010

    Respected Khurana ji, बस छोटी सी कोशिश है और आप लोगों का स्नेह और शुभमनाए है जो मेरी रचना को और भी अच्छा बना देती है …… और ये सबक जिन्दगी मई हर कोई एक न एक बार तो जरुर याद करके जाता है ……. और फिर सारी उम्र उस सबक को याद रखता है धन्यवाद सहित

Rashid के द्वारा
October 31, 2010

वाह रौशनी जी , इतनी सुन्दर कविता ! लगता है मेरा लेख “मैं तुझे भूल नहीं…” को किसी ने कविता का रूप दे दिया हो !! कमाल की रचना है यह आप की !! राशिद

    roshni के द्वारा
    October 31, 2010

    रशीद जी मैंने भी आपका लेख “मै तुझे भूल नहीं……” पढ़ा था और अभी जब आपने याद दिलाया तो लगा की हाँ जैसे कविता में भी वही याद है वही दुःख है और इंतज़ार है ….. ये दो पंक्तिया आप के लिए रीत है जाने कैसी यह ज़माने की जो सजा मिलती है दिल लगाने की न बसाना दिल मैं किसी को इतना की फिर दुआ मागनी पड़े भुलाने की . धन्यवाद सहित

    Rashid के द्वारा
    November 1, 2010

    बहुत शुक्रिया रौशनी जी …. राशिद

    Rosabel के द्वारा
    July 12, 2016

    Das letzte Mal als ich Usenet getestet habe, bekam ich ne Abmahnung wegen Urfgednnkälschunu, ist also schon ein paar Jahre her (8 Jahre oder so, war natürlich keine 18. )Aber ich bin gespannt, wie es heute aussieht.

chadndra kailash के द्वारा
October 31, 2010

roshni ji jo tasbir apne poetry ke sath lagai hai, use dekhkar koi bhi use akela nahi dekh sakta kam se kam main to nahin , kyonki kisi ko gamgin dekhna , ya pareshan mujhe manjoor nahin kisi bhi tarah ise mera jnoon samjhen ya insaniyat ke liye meri mohabbat , ye sach hai ki aise logon ko pagal kahti hai duniy par mujhe duniya ki parwah kahan main to us roti hui moorat ko khus karna chahta hoon, shabdon ke jal main humein nahin padna dill ki bat hamei sun ni hai main janta hoon dill galat nahin kahta pyar ka perokar hota hain dill vo kisi ko rula nahin sakta

    roshni के द्वारा
    October 31, 2010

    Kailash ji , kisi ko gamhin dekhna bahut dukh deta hai sahi kaha apne.. magar dukh hi aisi chiz hoti hai jo samay ke saath saath kam hokar bhi dil me kahi bs jati hai …. aur kisi rote hue ko hasna to bahut sundar vichar hai ……. acche log hi ye kar skte hai ……..

    Belle के द्वारा
    July 12, 2016

    “I wonder how it stacks up against Reel Tape from Avd2&gi.i#8i21;Not bad. Interesting to compare it to the ‘US’ machine in RT, as it is a 3M 79 emu. Kinda similar. I still prefer RT, but it’s a nice additional color in the palate…

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 31, 2010

नमस्ते रौशनी जी……………..न जाने क्यों मै एक फैसला नहीं कर पाता न जाने क्यों मै खुद को ये सजा देता हूँ……………..आदरणीय शाही जी ने बिलकुल सही ही कहा है रौशनी जी आपकी लिखी लाईने अन्दर तक हिला देती है,क्या खूब है ये लाईने,धन्यवाद!

    roshni के द्वारा
    October 31, 2010

    नमस्ते धर्मेश जी … जो रचना पढकर इंसान थोड़ी देर सोचने लगे और उसके दिल में शब्द दस्तक दे वो रचना सच में सफल है .. आपके विचारों के लिए शुक्रिया

    Jailen के द्वारा
    July 12, 2016

    Super intifmarove writing; keep it up.

nishamittal के द्वारा
October 31, 2010

प्यार को कलंकित करने वाले यदि आपकी कविता के मर्म को समझ सकें तो प्यार सदा पावन प्रेम बनारहे.

    roshni के द्वारा
    October 31, 2010

    निशा जी सही कहा अपने प्यार का मर्म आजकल समजने वाले बहुत काम है .. आजकल इसे एक टाइम पास मन जाता है .. जो लोग प्यार का ढोंग करते है ….. कभी दिल से प्यार करे तो पता चले कितना खुबसूरत एहसास है ये आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

    Journey के द्वारा
    July 12, 2016

    Una domanda: ma tra qtesui due giorni in programma per caso c&87#18;eࢩ anche la serata in programma tipo venerdc3ac sera o sabato sera magari con una cena oppure un giro tra pubs? Chiedo giusto per capire perchc3a9 in tale caso quel giorno verrc3b2 a Milano in macchina in modo da tornare comodamente anche sul tardi e l’altro giorno invece in treno

Ramesh bajpai के द्वारा
October 31, 2010

ये जानता हूँ की उम्र भर न भुला पाउगा तुझे, रौशनी जी बहुत ही जज्बाती पोस्ट .यादो का सैलाब झरने सा बहा . फिर बहता ही गया कवि का मन . लेकिन यही बहाव जब ठहरेगा तो अनगिनत कोपले उगा लेगा जो समय पाकर कली , फिर फूल बन अपनी जादुई खुसबू से फिजा को महका देगे

    roshni के द्वारा
    October 31, 2010

    नमस्कार बाजपाई जी . कवी मन जब बहना शुरू करता है तो सच में रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है …. इस भाव में सब कुछ साथ बहा ले जाने का मन होता है …. मगर कही न कही थोड़े से समाये के लिए रुकना पड़ता है ……..सच लिखा अपने अपनी प्रतिक्रिया में …… इतने सुन्दर भावों से सजी प्रतिक्रिया पाकर मन खुश हो जाता है ……. आपका बहुत बहुत धन्यवाद आभार सहित

    Jakayla के द्वारा
    July 12, 2016

    oct11 Gran persona, Viole.Un real encanto y gusto haberte conocido he.i!nitarBesmtosaY venga! Que el camino continúa y es maravilloso! Jodé! xDOs veo a la tarde, también x)

आर.एन. शाही के द्वारा
October 31, 2010

रोशनी जी आपकी लाइनें अंदर तक हिलाकर रख देती हैं । इतने दर्द की क्या ज़रूरत है, आपकी लेखनी से जब कभी प्यार के बोल बरसते हैं तो फ़िज़ां में बहार आ जाती है । यद्यपि आपने दर्द ही अधिक दिये हैं । घूम-घूम कर प्यार की ज्योत जगाती हैं, लेकिन कलम उठाती हैं तो न जाने क्या हो जाता है । लेकिन खैर, आपकी भावनाएं जिस तरह भी आएं, दिल को छूकर गहरे उतरने की क्षमता रखती हैं । बधाई ।

    roshni के द्वारा
    October 31, 2010

    शाही जी नमस्कार…… आपकी प्रतिक्रिया का क्या जवाब दू समझ नहीं आ रहा .. बस ये दो शब्द कहुगी … यु तो जिन्दगी से कोई शिकायत नहीं है न जाने फिर भी क्यों दिल को राहत नहीं है तलाश करती हूँ तो मिलता नहीं कोई भी अपना यु तो किसी से भी अदावत नहीं है … ये मै नयी कविता लिख रही थी बस आपकी प्रतिक्रिया पाकर यही पे लिख दी धन्यवाद सहित

    आर.एन. शाही के द्वारा
    October 31, 2010

    आपका कवि हृदय और जज़्बाती मन साक्षात कविता है । रचनाएं तो झड़ती रहती हैं । दूसरी नई कविता बनते कोई देर थोड़े ही लगेगी । धन्यवाद ।

chadndra kailash के द्वारा
October 30, 2010

app khon itna dardnak likhti hain jis se dil ro deta hai ye dard a dil hi humain likhne ko majboor karta hai hal a dil byan apna aur unka , jo dil a dard dene ke bad bhi apna hai if u dont mind apke likne mai jo dard jo dard hai vo apke dil ka hal kahne ke liye kaphi hai ye dard a dill itna ho ki unki yaden kabhi rukhsat na hon dill se mere har dum chahra a noor rahe mari ankhon main

    roshni के द्वारा
    October 31, 2010

    dard me likhe geet hi sbse acche hote hai shyad ye apne suna hoga jis tarh pyar ke ahsas ko kabhi puri tarah words me nahi likha ja skta usi tarah dard ki gehrayon ko bhi nahi … fir bhi ek choti si kosish hai shbadon me likhne ki ……. kailsah ji apke vichron ke liye bahut bahut thanks

October 30, 2010

कोई गम नहीं की तुमने वफ़ा नहीं की इतना ही बहुत है की तू शामिल है मेरी तबाही में, खूबसूरत पंक्तियों से सजी इस कविता के लिए हार्दिक बधाइयाँ…….

    roshni के द्वारा
    October 31, 2010

    पन्त जी.. प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    Fanny के द्वारा
    July 12, 2016

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