lets free ur mind birds

Just for Soul

53 Posts

37859 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 591 postid : 250

इंसान तो बन जा

Posted On: 30 Sep, 2010 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हिन्दू, सिख या चाहे तो मुसलमान तू बन जा,
मगर ऐ आदमी पहले जरा तू इंसान तो बन जा.. !!!!!!!

धर्म के नाम पर तूने तोड डाले है कितने घर,
उन उजड़े ख़ाली घरों का इक बार सामान तो बन जा..!!!!!!

दिलो को, रूहों को जखम देना है आसान तेरे लिए
जरा दुखते हुए दिलों का इक बार आराम ही बन जा..!!!!!!

किस लिए मंदिर मस्जिद की ताबीर करता है,
सहारा दे के बेसहारों को तू इनका भगवान ही बन जा..!!!!!!

धर्म की, जात की, गहरी खाई से निकल कर तू,
आने वाली नस्ल के लिए इक पहचान तू बन जा..!!!!!!

चल अब छोड़ सब गिले बहुत देर हो चुकी
उदास चेहरा लिए जो इंतज़ार में है तेरी,
उन उदास होठों की मुस्कान तू बन जा..!!!!!!
ऐ आदमी पहले ज़रा इंसान तो बन जा..!!!!!!

| NEXT



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

479 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    roshni के द्वारा
    October 30, 2010

    मनीष जी, रचना का मर्म जब किसी को अच्छा लगे और उसे कुछ अच्छा सोचने पर मजबूर करे तो लिखना सार्थक हो जाता है ….. आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

chadndra kailash के द्वारा
October 27, 2010

iltja jis se ki hai apne insan ban ne vo insan hua hi kab hai aise bhut si kissy sune honge apne jisme isi insan ne insaniyat ko sharminda kiya hai khud ko insaniyat ka rahnuma kahne wala khud ko bhagwan ki aulad kahne wala khud ko pujari aur mulla kahne wala ye insan hamesha se dillon ko todne ka kam karta aya hai ise haq nahin insaniyat ka nam lene ki phir bhi vo hi is jamane ki khudai ka badshah hai kab hoga insaniyat ke is shetan ka khatma kab hogi muskane ye ajad kab hoga mandir aur masjid ajad kab hoga unme insaniyat ka raj kab hoga insano ke dillon main sachcha pyar

    chadndra kailash के द्वारा
    October 29, 2010

    iltja jis se ki hai apne insan ban ne vo insan hua hi kab hai aise bhut si kissy sune honge apne jisme isi insan ne insaniyat ko sharminda kiya hai khud ko insaniyat ka rahnuma kahne wala khud ko bhagwan ki aulad kahne wala khud ko pujari aur mulla kahne wala ye insan hamesha se dillon ko todne ka kam karta aya hai ise haq nahin insaniyat ka nam lene ki phir bhi vo hi is jamane ki khudai ka badshah hai kab hoga insaniyat ke is shetan ka khatma kab hogi muskane ye ajad kab hoga mandir aur masjid ajad kab hoga unme insaniyat ka raj kab hoga insano ke dillon main sachcha pyar

    roshni के द्वारा
    October 30, 2010

    जी कैलाश जी, बहुत बार सुना है पड़ा है जब इंसान ही इन्सनित्यत को मिटा देता है शेतन बन जाता है …….घरों को तोडा है दिलों को तोडा है और जब इससे भी दिल नहीं भरता तो मंदिर मसिज्द को भी तोडा है …… मगर इंसान में एक अच्छी चीज़ है आशा .. इतना कुछ होने पर भी वोह आशा का दामन नहीं छोड़ता .. एक न एक दिन तो सब ठीक हो जायेगा शायद इसी उम्मीद पे दुनिया कायम है ….. धन्यवाद आपके विचारों के लिए

    Cayden के द्वारा
    July 12, 2016

    That’s an apt answer to an inrnsettieg question

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
October 1, 2010

हिन्दू, सिख या चाहे तो मुसलमान तू बन जा, मगर ऐ आदमी पहले जरा तू इंसान तो बन जा.. !!!!!!! धर्म के नाम पर तूने तोड डाले है कितने घर, उन उजड़े ख़ाली घरों का इक बार सामान तो बन जा.. खूबसूरत कविता…………. विलम्ब से प्रतिक्रिया के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ……….

    roshni के द्वारा
    October 1, 2010

    पन्त जी धन्यवाद प्रतिक्रिया के लिए ………….

    Nelda के द्वारा
    July 12, 2016

    Well I guess I don’t have to spend the weekend firuging this one out!

anju के द्वारा
October 1, 2010

प्रिय रौशनी आपकी कविता इंसान बन जा बहुत भायी……. आज इंसान बहुत कम है शेतन ज्याद है युही अच्छे अच्छे विचार लिखते रहिये

    roshni के द्वारा
    October 1, 2010

    अंजू जी आपके विचारोनो का कब से इंतज़ार था … धन्यवाद्

Mansi के द्वारा
October 1, 2010

hiii another good oneeeee .. keep it up

    roshni के द्वारा
    October 1, 2010

    Thank u Mansi

nishamittal के द्वारा
October 1, 2010

रौशनी जी, इन्सान को अज्ञान रूपी अंधकार में रोशनी दिखने वाली आपकी पंक्तियाँ बहुत सुन्दर,सामयिक,सटीक है.बधाई

    roshni के द्वारा
    October 1, 2010

    निशा जी टिप्पणी के लिए अति धन्यवाद…… आगे भी अपने विचारों से अवगत कराते रहियेगा … धन्यवाद सहित

    Nevaeh के द्वारा
    July 12, 2016

    Keep these arelcits coming as they’ve opened many new doors for me.

आर एन शाही के द्वारा
October 1, 2010

खेद है रोशनी जी, थोड़ी देर से देख पाया । आपकी यह बेहतरीन रचना एक समयानुकूल संदेश है … बधाई ।

    roshni के द्वारा
    October 1, 2010

    शाही जी, बस सब इस सन्देश को समझ ले और जीवन में उत्तर ले तो हर तरफ शांति और खुशाली हो जाये प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्

daniel के द्वारा
September 30, 2010

रौशनी जी ! मैं कवि नहीं हूँ इसलिए कवियों के अंदाज़ में तारीफ नहीं कर सकता, सिर्फ इतना ही कहूँगा ” आज कल के हालात में इंसान बनना ही पहली ज़रूरत है ” ***शुभकामनायें ***

    roshni के द्वारा
    October 1, 2010

    Daniel जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्……

chaatak के द्वारा
September 30, 2010

रौशनी जी, आपकी इस कविता पर चाँद पंक्तियाँ कहना चाहूंगा- इंसानों की दुनिया में एक इंसान न मिला, “पत्थर के बीच कोई भगवान् न मिला; सदियाँ गुज़र गई है बे-रूह भटकते, इस जिस्म को अभी कोई फरमान न मिला|” तलाश जारी है लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है | इंसानी तलाश की टीस एक बार फिर जगा दी आपने| सारगर्भित पंक्तियों पर बधाई!

    roshni के द्वारा
    September 30, 2010

    चातक जी कोशिश जारी रखिये इंसान जरुर मिल जायेगे … सब पत्थर नहीं हो सकते किसी न किसी में तो मोम का दिल होगा वही इंसान होगा … प्रतिक्रिया के लिए आभार

Ramesh bajpai के द्वारा
September 30, 2010

चल अब छोड़ सब गिले बहुत देर हो चुकी उदास चेहरा लिए जो इंतज़ार में है तेरी, उन उदास होठों की मुस्कान तू बन जा..!!!!!! ऐ आदमी पहले ज़रा इंसान तो बन जा..!!!!!! रौशनी जी बहुत खूब .क्या बात है ”ये आदमी पहले जरा इन्सान तो बन जा ” क्या जज्बात है , बहुत बहुत धन्यवाद बधाई

    roshni के द्वारा
    September 30, 2010

    बाजपाई जी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद…… आज आदमी के पास सब कुछ है बस इंसानियत ही नहीं उसे ही जगाने की कोशिश है ये …. धन्यवाद सहित

samta gupta kota के द्वारा
September 30, 2010

रौशनी जी, भावनाओं की अच्छी अभिव्यक्ति ,एक शेर अर्ज है,यूँ तो लाखों सालों से है इस जमीं पर इंसान का वजूद,फिर भी आँखें तरस जाती हैं आज,देखने इक इंसान को,

    roshni के द्वारा
    September 30, 2010

    समता जी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……. शायद हम सब एक इंसान को तलाश करते है… बस खुद को इंसान बन ले तो शायद किसी और की तलाश पूरी हो जाये …. धन्यवाद सहित

syeds के द्वारा
September 30, 2010

ऐ आदमी पहले ज़रा इंसान तो बन जा बहुत खूबसूरत लिखा रोशनी जी आपने,दिल को छू गयी,आज हम मे से ज़्यादातर हिन्दू है मुसलमान है सिख है इसाई है मगर इन्सान बहुत कम है.

    roshni के द्वारा
    September 30, 2010

    Syed जी सही कहा अपने आज हम इंसान न होकर अलग अलग नामों में बाँट कर रह गए है … काश की एक दिन सब एक हो जाये …

    Artem के द्वारा
    January 12, 2014

    Your answer lifts the innlceigetle of the debate.

Soni garg के द्वारा
September 30, 2010

रौशनी हम तो इंसान ही है लेकिन बिना दिमाग वाले जो आज राजनेताओ के हाथो की कठपुतलियां बनते जा रहे है और लगे है इनके वोट बैंक भरने और हम ही है जो इनकी सत्ता की भूख को बढ़ाये जा रहे है ! आज हम इंसानों को सबसे ज्यादा ज़रूरत है इन सत्ताधारियों की चालो को समझने की ना की आपस में लड़ने की ! जिस दिन हम ये समझ जायेंगे उस दिन हम इंसान ही कहलायेंगे वर्ना तो है ही हम कठपुतली !

    roshni के द्वारा
    September 30, 2010

    प्रिय सोनी कठपुतली ही तो बन गए है हम… क्यों नहीं हम सही निर्णय लेकर व्यक्ति चुनते….. क्यों दूसरों के कहने पर वोट करते है ……… इंसान जिसे भगवान ने इतना दिमाग दिया है इस विषय पर आकर बेवकूफ बन जाता है … एक दिन तो आयेगा ही जब सब ठीक हो जायेगा और इंसान बच जायेगा …

    Ziggy के द्वारा
    July 12, 2016

    Tallinn! I’ve heard that it’s quite different from Vilnius and Riga, and it’s a place that I’d love to go to. Did you visit anywhere else in Estonia, or stick with Tallinn? Either way, those pancakes alone sound like th7;2#8&1eyre worth justifying staying solely in the Estonian capital.


topic of the week



latest from jagran