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परछाईयाँ

Posted On: 22 Sep, 2010 में

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वो मुझे समझा गया जिन्दगी की ये सचाईयाँ,
छोड़ देते है सभी रहती है संग परछाईयाँ…….
मै तुमे समझा ना पाई और तुम समझे नहीं,
कितनी गहरी होती है दिल के ये गहराईयाँ……..
है यंकी तुम पर मुझे रखना तुम भी मुझ पर यकीं,
खुश रहो तुम नाम मेरे कर दो ये रुस्वाईयाँ……….
है ये आंसू और गम उम्र भर के साथी मेरे,
है दुआ की तुम सुनो ख़ुशी भरी शहऩाईयाँ………
मेरी फिकर में न तुम खुद को जगाना रात भर,
साथ मेरे है तेरी यादे और तनहाईयाँ……..
हाँ समझ गयी हूँ मै जीवन की ये सचाईयाँ ,
छोड़ देते है सभी रहती है संग परछाईयाँ………

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817 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chadndra kailash के द्वारा
November 2, 2010

jindgi ki vo sachchai chahte nahi hum janna jahan har kadam par judai ka nam likha ho pyar ka ahsas rahe ahsas rahe unki charat ka , yadon ka unki aise ik sapna bhi muhhe apna lage dill mai jiskie ahsas nahi vo khud ko bhi kab janega humne mitaya hai khud ko unki yadon ke liye

chadndra kailash के द्वारा
October 27, 2010

jindgi ki vo sachchai chahte nahi hum janna jahan har kadam par judai ka nam likha ho pyar ka ahsas rahe ahsas rahe unki charat ka , yadon ka unki aise ik sapna bhi muhhe apna lage dill mai jiskie ahsas nahi vo khud ko bhi kab janega humne mitaya hai khud ko unki yadon ke liye

Soni garg के द्वारा
September 28, 2010

काफी दिनों से आपकी कविताये मिस कर रही थी आज आना हुआ यहाँ पढ़ बस एक शब्द निकला मुह से वाह यार इतने इमोशंस लाती कहा से हो ! सीरियसली हेट्स ऑफ़ तो यू ! कभी अपने इमोशंस भी आपकी कवितायों के माद्यम से बयान करवाना चाहूंगी ! उम्मीद है आप स्विकारेंगी !

    roshni के द्वारा
    September 28, 2010

    Dear सोनी जी जरुर आप जब चाहे आपका स्वागत है……. इतने ज्यादा सम्मान के लिए तहे दिल से शुक्रिया धन्यवाद सहित

    Nyanna के द्वारा
    July 12, 2016

    I want to send you an award for most helpful inetrnet writer.

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
September 26, 2010

बहुत सुन्दर ग़ज़ल रोशनी जी …… आपकी ग़ज़ल के भावो के लिए दो शब्द मेरी और से .. रास्ते पर जो लगीं उन ठोकरों का क्या गिला, जानिब – ए – मंजिल चले थे, बढ़ चली हैं खाइयाँ | तुम हमारी जुस्तजू के ख्वाब की ताबीर हो, सूनेपन में बांच लेंगे, हम तेरी पुरवाईयाँ | (meaning : बातचीत) बधाई ..

    roshni के द्वारा
    September 27, 2010

    शैलेश कुमार जी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद…….. और आपके दो शब्द तो क्या कहने बहुत बढ़िया धन्यवाद सहित

    Carlee के द्वारा
    July 12, 2016

    Next time I read a blog, I hope that it does not fail me as much as this one. I mean, Yes, it was my choice to read, however I genuinely believed yo&1;82u7#d have something interesting to talk about. All I hear is a bunch of whining about something that you could possibly fix if you were not too busy searching for attention.

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
September 26, 2010

रोशनी जी, बहुत अच्‍छी कवीता है, जो जीवन के सच को उजागर करती है एक पंक्ति में यहां जोडना चाहूंगा – बढ़ता हूं जब में रोशनी की तरफ (कुछ नया करने की चाहत) तो मुझ से भी बड़ी हो जाती है मेरी यह परछाईयां ….. वो मुझे समझा गया जिन्दगी की ये सचाईयाँ, छोड़ देते है सभी रहती है संग परछाईयाँ……. दीपक जोशी

    roshni के द्वारा
    September 27, 2010

    दीपक जोशी जी, प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुर्किया…….. आपकी कही गयी पंक्तिया बहुत अच्छी लगी.. धन्यवाद सहित

mansi के द्वारा
September 24, 2010

Dear Roshni very nice touchy lovely poem… keep it up……. best wishes from me

    roshni के द्वारा
    September 27, 2010

    Thanks Mansi ji………. for ur comment…….

    Carlee के द्वारा
    July 12, 2016

    You get a lot of respect from me for writing these helpful arlestic.

Sumi के द्वारा
September 24, 2010

रौशनी जी जिन्दगी के सचाई से रूबरू करवाती कविता… तनहाईयाँ यही है शयद जीवन का सच… मेरी और से शुभ कमाना सहित

    roshni के द्वारा
    September 27, 2010

    सुमी जी आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत धन्यवाद आभार सहित

Aseem के द्वारा
September 24, 2010

hhiii Roshni…..wonderful poem once again….specially these lines touched me a lot…… मेरी फिकर में न तुम खुद को जगाना रात भर, साथ मेरे है तेरी यादे और तनहाईयाँ…….. absolutely mind blowing…….congrates for another glorious addition in ur book.All the best & keep writing

    roshni के द्वारा
    September 27, 2010

    Aseem thanks for ur appreciation……… thanks a lot

    Jucelia के द्वारा
    January 11, 2014

    I told my kids we’d play after I found what I neddee. Damnit.

Aakash Tiwaari के द्वारा
September 23, 2010

बहुत ही खूबसूरत रचना रोशनी जी..अपनी तो सिर्फ ये परछाईयाँ ही होती है.. दो शब्द मेरी तरफ से.. “हर किसी के दामन में खुशियाँ भरी है हमने, पर मिली हमेशा मुझे बेवफाईयां. साथ थी साथ है ये मेरी परछाईयाँ”… आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    September 23, 2010

    आकाश जी आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया……. आपके दो शब्द अच्छे लगे……. धन्यवाद सहित

Aakash Tiwaari के द्वारा
September 23, 2010

बहुत ही खूबसूरत रचना रोशनी जी..अपनी तो सिर्फ ये परछाईयाँ ही होती है.. दो शब्द मेरी तरफ से.. “हर किसी के दामन में खुशियाँ भरी है हमने, पर मिली हमेशा मुझे बेवफाईयां. साथ थी साथ है ये मेरी परछाईयाँ”…

Manoj Khatri के द्वारा
September 23, 2010

रोशनी जी, आपने बहुत सुंदर कविता लिखी है. बधाई. दिल को छूने वाली ऐसी कविताएं ही जीवन के कडवे सच को हमारे सामने लाती हैं. एक बार पुनः बधाई हो.

    roshni के द्वारा
    September 23, 2010

    मनोज खत्री जी टिप्पणी के लिए बहुत शुक्रिया.. जानकर अच्छा लगा की आपको कविता पसंद आई धन्यवाद् सहित

Arvind Pareek के द्वारा
September 23, 2010

सुश्री रोशनी जी, एक बार फिर बहुत बेहतरीन ढ़ंग से आपनें जीवन की सच्‍चाई को बयां किया है – हाँ समझ गयी हूँ मै जीवन की ये सचाईयाँ , छोड़ देते है सभी रहती है संग परछाईयाँ……… एक अच्‍छी कविता । अरविन्‍द पारीक

    roshni के द्वारा
    September 23, 2010

    पारीक जी प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से शुक्रिया… आगे भी युही अपने विचारों से अवगत करवाते रहिएगा आभार सहित

    Candy के द्वारा
    July 12, 2016

    My hat is off to your astute command over this tovr-cbiapo!

rameshbajpai के द्वारा
September 23, 2010

हाँ समझ गयी हूँ मै जीवन की ये सचाईयाँ , छोड़ देते है सभी रहती है संग परछाईयाँ… बहुत ही सच कहा आपने रोशनी जी , ये परछाईया ही हमारा साथ देती है . रौशनी जी मेरी पोस्ट अक्सर आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया से दूर रहती है कोई नाराजगी ?

    roshni के द्वारा
    September 23, 2010

    आदरनिये वाजपई जी आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद….

NIKHIL PANDEY के द्वारा
September 23, 2010

बढ़िया रचना है ..अच्छा लिखती है आप ..सच ही कहा है छोड़ देते है सभी रहती है संग परछाईयाँ………

    roshni के द्वारा
    September 23, 2010

    निखिल पाण्डेय जी प्रतिर्किया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    Buffy के द्वारा
    July 12, 2016

    Ryan Keising, as a teen suffering with Gynecomastia, spent all of his free time trying to figure out how to get rid of man boobs without spending thousands of dollars on surgery or drugs. Now, several years later, he continues to lecture on, and publish, the latest techniques for natural male breast reduction. Visit his site at threonboabscume.com for all of the latest and greatest approaches for how to get rid of man breasts

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
September 22, 2010

मै तुमे समझा ना पाई और तुम समझे नहीं, कितनी गहरी होती है दिल के ये गहराईयाँ… इस खूबसूरत कविता के लिए हार्दिक बधाई…………

    roshni के द्वारा
    September 22, 2010

    पियूष जी बहुत बहुत धन्यवाद आपकी प्रतिक्रिया के लिए…… युही आगे भी आपके विचारों की प्रतीक्षा रहेगी धन्यवाद सहित

chaatak के द्वारा
September 22, 2010

रौशनी जी, आपकी कविता एक बार फिर मानो मेरे मनोभावों को जीवंत कर रही हैं| आपकी इस रचना की तारीफ़ में बस दो पंक्तियाँ कहना चाहूंगा- आइनों ने इस कदर मेरे अक्स को छलनी किया, न रहा साया न अपने साथ हैं परछाइयाँ ! बेहद खूबसूरत रचना पर ढेरों बधाईयाँ!

    roshni के द्वारा
    September 22, 2010

    चातक जी दो पंक्तियों के रूप में टिप्पणी मन को छु गयी… ये साथ रहने वाली परछाइयाँ भी कभी कभी साथ छोड़ देती है … और आईने अक्सर टूट कर तोड़ देते है…… क्या कहे यही जीवन की सचाई है…… हर मोड़ पर इम्तेहान हर मोड़ पर सवाल.. आपकी बधाईयाँ के लिए तहे दिल से धन्यवाद

RaJ के द्वारा
September 22, 2010

वो मुझे समझा गया जिन्दगी की ये सचाईयाँ, छोड़ देते है सभी रहती है संग परछाईयाँ…क्या खूब लिखा है धन्यवाद एक संवेदन शील कविता के लिए रोशनी जी

    roshni के द्वारा
    September 22, 2010

    राज जी आपको कविता अच्छी लगी …. शुक्रिया .. टिप्पणी के लिए तहे दिल से धन्यवाद

    Karinthia के द्वारा
    July 12, 2016

    I found myself nodding my noggin all the way thurogh.


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