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ख़ाली दामन

Posted On: 13 Sep, 2010 में

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क्यों दिले बर्बाद को उम्मीद है तेरे आने की
यु तो कसम खाए बैठा है फिर न तुझे बुलाने की
……

कैसे करेगा वो वफ़ा, कैसे निभाएगा वादे
उसको तो परवाह है लोगों की ज़माने की
……

भूल जा तू भी उसे समझा रहा हूँ दिल को मै
जरुरत क्या है तुझको जफ़ाओं पे अश्क बहाने की
…..

वो तो रुसवाइयों के डर से दामन छुडा कर बैठ गया
वो क्या जाने अदा इश्क में मरने की मिट जाने की
…..

उसके शहर से लौटा हूँ तनहा और ख़ाली दामन लेकर
उसके शहर में रीत नहीं है हर कदम साथ निभाने की
…..

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478 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

manishgumedil के द्वारा
October 25, 2010

उसके शहर से लौटा हूँ तनहा और ख़ाली दामन लेकर उसके शहर में रीत नहीं है हर कदम साथ निभाने की….. मेरा दिल कहता है – दर्द-ऐ-दिल बखूबी बयां किया है आपने “रौशनी जी”.

    roshni के द्वारा
    October 26, 2010

    मनीष जी धन्यवाद प्रतिक्रिया के लिए आभार सहित

    Ivy के द्वारा
    January 11, 2014

    That hits the target peleyctrf. Thanks!

    Chamomile के द्वारा
    July 12, 2016

    rien on dirait en tout cas que la méthode fonctionne (contrairement au check-in dans le di;.&r)lCersquoaest bon à savoir aussi pour la prochaine MAJ @everybodyEst-ce que quelqu’un aurait un lien pour comprendre le fonctionnement des MAJ OTA par google ? SFR ?

soni garg के द्वारा
September 29, 2010

waah bahut khub …….. sabse bada rog kya kahenge log … yahi hai zamaane ki rit …

    roshni के द्वारा
    October 23, 2010

    सोनी जी thank u for ur comment

roshni के द्वारा
September 21, 2010

योगेश जी, प्रतिर्किया के लिए बहुत बहुत ही धन्यवाद्

yogesh के द्वारा
September 18, 2010

वैसे mem आपकी ये पूरी कविता बहुत अच्छी है पर ये चार लाइन बहुत अच्छी है वो तो रुसवाइयों के डर से दामन छुडा कर बैठ गया वो क्या जाने अदा इश्क में मरने की मिट जाने की ….. उसके शहर से लौटा हूँ तनहा और ख़ाली दामन लेकर उसके शहर में रीत नहीं है हर कदम साथ निभाने की….. ……………………………इनमे ” ….रीत नहीं है हर कदम साथ निभाने की….” पूरी कविता की सारी पंक्तियों का रस ही निचोड़ क रख दिया है आपने.

nitindesai के द्वारा
September 16, 2010

रोशनी जी को सादर अभिवादन. वाह.. क्या बात है.. सुन्दर प्रस्तुति. शुभकामनायें और ढेर सारी बधाई.

    roshni के द्वारा
    September 16, 2010

    नितिन देसाई जी बहुत बहुत धन्यवाद शुभकामनायें और बधाई के लिए……..

Anju के द्वारा
September 15, 2010

रौशनी जी उसके शहर से लौटा हूँ तनहा और ख़ाली दामन लेकर उसके शहर में रीत नहीं है हर कदम साथ निभाने की… ये पंक्तिया सच में अपनी सी लगती है… सुन्दर भावपूर्ण रचना ..

    roshni के द्वारा
    September 16, 2010

    अंजू जी आपकी प्रतिर्किया पाकर बहुत अच्छा लगता है .. शुक्रिया

mansi के द्वारा
September 15, 2010

खाली दामन again a nice and touching poem.. Congratulations for such goods poems… Keep it up Roshni ji

    roshni के द्वारा
    September 16, 2010

    मानसी जी प्रतिक्रिया के लिए बहतु बहुत धन्यवाद

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
September 14, 2010

उसके शहर में रीत नहीं है हर कदम साथ निभाने की….. रोशनी जी, यह विरह रस से ओतप्रोत कविता कम शब्‍दों में बहुत कुछ कह रही है वह भी मौन रहते हुए। बहुत अच्‍छी रचना है। मेरी और से शुभकामनायें। दीपक जोशी

    roshni के द्वारा
    September 14, 2010

    दीपक जी बहुत बहुत शुक्रिया प्रतिक्रिया के लिए .. इसी तरह आगे भी अपनी राय देते रहियेगा! धन्यवाद सहित

    Doughboy के द्वारा
    July 12, 2016

    it7&;21#8s amazing how 1 little thing they got wrong has completely overtaken the great upgrades they did (I’m thinking the panoramic photo thingy). Fingers crossed that Google maps get an app out there ASAP

आर.एन. शाही के द्वारा
September 14, 2010

वाह रोशनी जी, बहुत बेहतरीन रचना … बधाई । इन सदाओं की आह पर वो तो क्या, उसके फ़रिश्तों को भी कुछ उसी तरह नंगे पैर दौड़ते हुए आ ही जाना चाहिये, जैसे गज को ग्राह से तारने के लिये स्वयं मधुसूदन । विरह और बेवफ़ाई की पीर से छटपटाते प्रेमी की तस्वीर एकदम जीवन्त हो गई है आपकी कविता में ।

    roshni के द्वारा
    September 14, 2010

    आर.एन. शाही जी आपकी टिप्पणी पाकर मन खुश हो गया… कितने सुन्दर लफ्जों से आपने कविता का सार बयाँ कर दिया … बहुत बहुत धन्यवाद… आपने विचरों से युही अवगत कराते रहियेगा .. एक बार फिर से तहे दिल से शुक्रिया

    Trish के द्वारा
    July 12, 2016

    PUP: Parti de l&qruso;Unité Prolétarienne issu de scissions au PCF et à la SFIO (1930-1937). Jacques Doriot était de ceux-là — les pupistes — avant de faire la carrière qu’on connaît.

R K KHURANA के द्वारा
September 14, 2010

प्रिय रौशनी जी, उसके शहर से लौटा हूँ तनहा और ख़ाली दामन लेकर उसके शहर में रीत नहीं है हर कदम साथ निभाने की….. बहुत ही सुंदर कविता ! मन प्रसन्न हो गया ! बहुत खूब ! मेरी और से शुभकामनायें राम कृष्ण खुराना

    roshni के द्वारा
    September 14, 2010

    आदरनिये खुराना जी आपकी शुभकामनायें पाकर मेरा मन भी बहुत खुश होता है … अच्छा लगता है जब कोई बड़ा आशीर्वाद दे … इसी तरह अपना आशीर्वाद देते रहिएगा .. आभार सहित

    Jacie के द्वारा
    July 12, 2016

    Olá, Vany!1ª vez aqui no seu blog, muito bom, gostei das dicas com os esmaltes, relnteame, os mais escuros são bem mais difíceis de lidar rsrs estou com aquele rosa choque poderoso rsrsSore ja.XD

Aakash Tiwaari के द्वारा
September 14, 2010

हमने तो रात दिन आंसू बहाए उनको पाने के लिए, उन्हें तो पहचान न थी आंसू और पानी की..

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    September 14, 2010

    बहुत ही अच्छी रचना पर बधाई आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    September 14, 2010

    आकाश जी बहुत बहुत शुक्रिया प्रतिक्रिया के लिए.. शेर के अंदाज में प्रतिक्रिया अच्छी लगी .. और शेर भी

RASHID के द्वारा
September 14, 2010

रौशनी जी हकीकत है की अब कसमे, वादे निभाना, मुहब्बत सब बस अपने फायेदे के लिए ही की जाती है,, कौन किसका साथ निभाता है !! दुनिया को आइना दिखाती हुयी अच्छी प्रस्तुति !! राशिद http://rashid.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    September 14, 2010

    राशिद जी, आपकी प्रतिर्किया को पढकर मुझे उपकार फिल्म का गाना याद आ गया कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बाते है बातों का क्या?? सची मोह्बात भी होती होगी दुनिया में .. क्युकी अगर नहीं होती तो आज प्यार का नाम भी न होता.. उम्मीद पे ही दुनिया कायम है .. ये जानते हुए भी की कोई साथ नहीं निबटा हम फिर भी एक हमसफ़र की तलाश में लगे रहते है टिप्पणी के लिए तहे दिल से शुक्रिया

    RASHID के द्वारा
    September 16, 2010

    रौशनी जी,, सच्ची मुहब्बत सिर्फ किताबो में ही शेष है,, उम्मीद है आपने ने मेरा लेख “मै तुम्हे कभी भूल नही पाऊगा!!”  पढ़ा होगा.. शायद दिल टूटने के लिए ही होते है !!! http://rashid.jagranjunction.com/2010/06/14/%E0%A4%AE%E0%A5%88-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%8A%E0%A4%97/ राशिद http://rashid.jagranjunction.com

soni garg के द्वारा
September 14, 2010

वाह रौशनी आज तो आपने काफी कुछ कह दिया और वो भी इतनी गहराई से ! पढ़ कर अच्चा लगा !

    roshni के द्वारा
    September 14, 2010

    सोनी जी धन्यवाद … आपको कविता अच्छी लगी… भावों को इतनी गहराई से समझने के लिए शुक्रिया आभार सहित

    Infinity के द्वारा
    July 12, 2016

    Well done Lyn, I’m sure your waste paper basket was lovely, its good to be able to make things though isn’t it? Maybe I ought to think of making something with all my willow and dogwood cuttings from the garden, now th71e&#82re;s a thought!!

Piyush Pant के द्वारा
September 14, 2010

खूबसूरत पंक्तियों से भावनाओं की अभिव्यक्ति. ………….. बहुत सुन्दर…………… यूँ ही लिखती रहें ………………….. हार्दिक बधाई …………….

    roshni के द्वारा
    September 14, 2010

    पन्त जी , आप सब आपनी प्रतिक्रिया से हमेशा प्रोतसाहित करते है .. धन्यवाद सहित..

    Maryellen के द्वारा
    July 12, 2016

    In addition to the features I hieghilhtgd previously, Ryan has details on his blog about the improved support for SSL, and some new helper functions which will be useful for plugin and theme authors. And the official

Ramesh bajpai के द्वारा
September 14, 2010

वो तो रुसवाइयों के डर से दामन छुडा कर बैठ गया वो क्या जाने अदा इश्क में मरने की मिट जाने की ….. क्या बात है रौशनी जी बहुत सुन्दर . बधाई

    roshni के द्वारा
    September 14, 2010

    रमेश बाजपाई जी … बहुत बहुत शुक्रिया… युही अपने विचार देते रहिएगा.. धन्यवाद सहित

chaatak के द्वारा
September 13, 2010

रौशनी जी, आज पहली बार लगा जैसे कोई मेरे ही अलफ़ाज़ में मेरे ही जज़्बात बयां कर रहा है| पंक्तियों की क्या बात करें हर हर्फ़ हर ज़ेर हर ज़बर लाजवाब है| सुभानअल्ला!

    coolwarrior के द्वारा
    September 14, 2010

    माशा-अल्लाह,क्या बात है ,लाजवाब .             

    roshni के द्वारा
    September 14, 2010

    चातक जी, आपको अपने जज्बात अपने अलफ़ाज़ जैसी लगी ये रचना , जानकर खुशी हुयी, क्युकी आपकी रचनाओ की तो मै खुद ही कायल हूँ… आप की तरफ से ये टिप्पणी मेरे लिए बहुत ही अमूल्य है… धन्यवाद सहित

    roshni के द्वारा
    September 14, 2010

    असीम आप को पोस्ट अच्छी लगी और अपने टिप्पणी दी ..इसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया


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