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..मेरे लिए..

Posted On: 29 Aug, 2010 में

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6550

तुम आज मुस्कुराओ मेरे लिए बस
तुम गीत कोई बनाओ मेरे लिए बस

कितने रिश्तों में कितने रूपों में बंट जाते हो तुम
अपने वजूद में आओ मेरे लिए बस

दुनिया के दामन में भर दो लाख बहारे
वफ़ा का एक फूल रखना मेरे लिए बस

नहीं चाहिए चाँद तारे और सूरज
एक जुगनू ले आना मेरे लिए बस

कितनी रातों से इन आँखों ने देखा नहीं है ख़वाब
तुम स्वपन बनकर आ जाओ मेरे लिए बस

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46 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chadndra kailash के द्वारा
November 2, 2010

वफ़ा का एक फूल रखना मेरे लिए बस नहीं चाहिए चाँद तारे और सूरज एक जुगनू ले आना मेरे लिए बस कितनी रातों से इन आँखों ने देखा नहीं है ख़वाब तुम स्वपन बनकर आ जाओ मेरे लिए बस दिलको चूने वाली लाइन हैं आपके शब्दे मैं जो दर्द है वो कल्पना करने के लिए bahut अच्छा है

    roshni के द्वारा
    November 3, 2010

    चंद्रा कैलाश जी धन्यवाद

    Kalie के द्वारा
    July 12, 2016

    Meaghan – Beautiful piecsrtu!! I love them! I love what you have done with the pictures too! I now know what I am going to do with the wedding ones since I have so many to choose from !!

sanjukhan के द्वारा
September 8, 2010

dear roshni sahiba adaab upar wala kare ki aap hameshan yunhee roshni bankar kai andhere dilon ko roshan karti rhain achchi koshish hai ——wafa ka ek phool mere liye bas our khaskar tasweer bohat pyari lagai he duwaon se saath sanju

    roshni के द्वारा
    September 9, 2010

    Sanjukhan जी आपने जो इतने सुन्दर अल्फाजो से तारीफ की है उसके लिए दिल से शुक्रिया … आगे भी युही आपकी प्रतिक्रिया मिलते रहे धन्यवाद् सहित

smile4udps के द्वारा
September 5, 2010

नहीं चाहिए चाँद तारे और सूरज एक जुगनू ले आना मेरे लिए बस ………. हर लड़की बस येही चाहती है …..बहूत अछी पंक्तिया लिखी है आपने…..

    roshni के द्वारा
    September 5, 2010

    Smile जी आपने सही कहा हर लडकी यही चाहती है .. प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार सहित

    Lissa के द्वारा
    July 12, 2016

    DEBEN ENTENDER QUE TANTO OPERADORES Y RED DE CHOFERES DE AUTOS SON UN EQUIPO, SI EXISTEN CORTOCIRCUITOS, EL FUNCIONAMIENTO SE TORNA INGRATO Y OCURREN ESTAS CUESTIONES POCO FELICES QUE DERIVAN EN DESATENCIONES HACIA LOS CLFEETES.REILNXION; HAY QUE DIVERTIRSE TRABANDO, HAY QUE SENTIR LO QUE UNO HACE. SALUDOS

manishgumedil के द्वारा
September 5, 2010

नहीं चाहिए ये दौलत ये सोहरत, तुम वापस आ जाओ मेरे लिए बस…….. मेरा दिल कहता है – थोड़ी से गुस्ताखी माफ हो……… एक और खूबसूरत रचना……….

    roshni के द्वारा
    September 5, 2010

    मनीष जी आपने कोई गुस्ताखी तो की ही नहीं हाँ मगर बहुत सुन्दर पंक्तियों से प्रतिक्रिया दी है बहुत बहुत शुक्रिया

नितिन देसाई के द्वारा
September 3, 2010

रोशनी जी, सादर नमस्कार, सुन्दर रचना, सुन्दर चित्र,पढ़कर बहुत अच्छा लगा. ऐसी ही रचनाये आगे भी अपेक्षित है. नितिन देसाई

    roshni के द्वारा
    September 3, 2010

    नितिन देसाई जी नमस्कार रचना और चित्र आप को अच्छा लगा जान कर अति खुशी हुई… युही होंसला बढ़ाते रहियेगा ! धन्यवाद सहित

Piyush Pant के द्वारा
September 3, 2010

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ………………. बहुत खूब……….. यों ही लिखते रहें…………..

    roshni के द्वारा
    September 3, 2010

    पियूष जी धन्यवाद … युही अपनी कीमती राय देते रहियेगा !

    Mikel के द्वारा
    July 12, 2016

    Es que lo mires por donde lo mires, si este gobierno fuera un coche, le sobraban todas las marchas menos la de atrás, con la marcha atrás tienen bat.lnse.t.Saaud

Nikhil के द्वारा
September 3, 2010

बहुत खूब, मैं इश्क हूँ से मेरे लिए तक, हर रचना एक से बढ़कर एक. रौशनी जी, आप जागरण के मंच पर अपने समकालीन कवियित्रियों में सबसे बेहतर हैं. इश्वर को यूँही ही कलम की धनि बनाये रखे. आभार, निखिल झा

    roshni के द्वारा
    September 3, 2010

    निखिल जी इतने दिनों बाद आपकी प्रतिक्रिया पाकर काफी अच्छा लगा… काफी दिनों बाद आप मंच पर वापस आये.. आपकी तारीफ और प्रोत्साहन के लिए तहे दिल से शुक्रिया…. आप का प्रोत्साहन युही मिलता रहे… धन्यवाद् सहित

Amit kr Gupta के द्वारा
September 1, 2010

रौशनी जी नमस्कार ,बहुत ही बढ़िया रचना .पंक्ति के माध्यम से सन्देश http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    September 1, 2010

    अमित गुप्ता जी प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से शुक्रिया … युही अपने विचार देते रहियेगा धन्यवाद सहित

vijendrasingh के द्वारा
August 30, 2010

बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ ………………..

    roshni के द्वारा
    September 1, 2010

    विजेंद्र सिंह जी आपकी प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से शुक्रिया .. युही आगे भी अपनी प्रतिक्रिया देते रहियेगा! आभार सहित

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
August 30, 2010

कितने रिश्तों में कितने रूपों में बंट जाते हो तुम अपने वजूद में आओ मेरे लिए बस बहुत खूबसूरत पक्तियां …….. आप बहुत अच्छा लिखती हैं .. बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति रोशनी जी …बधाई हो .

    roshni के द्वारा
    August 30, 2010

    शैलेश कुमार जी आपने बहुत दिनों बाद मेरी रचना पर टिप्पणी दी …. पढ़कर बहुत अच्छा लगा … आशा है की आप आगे भी इसी तरह से अपने विचार देते रहेगे … आभार सहित

    Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
    August 30, 2010

    रोशनी जी वास्तव में मैं २०-२५ मंच से दूर हो गया था, अतः न पढ़ने का अवसर आया न प्रतिक्रिया का …

Mansi के द्वारा
August 30, 2010

Very Beautiful poem.. with deep feeling… keep writing… i am always wait ur poems..

    roshni के द्वारा
    August 30, 2010

    Dear Mansi ji thanks a lot for ur comment.. u waits my poem its a lovely comment for me… thanks again…

Aakash Tiwaari के द्वारा
August 30, 2010

बहुत ही अच्छी कविता लिखी है आपने आपकी कविता सुबह सुबह ही पढ़ा मन को बहुत शांति मिली लेकिन बाद में दिल न जाने क्यों अशांत हो गया इसीलिए मेरी तरफ से दो शब्द…. न कीजिये इन्तेजार किसी का यूँ चाहत में बैठकर, प्यार करेगा कोई बेशुमार फिर चला जाएगा दिल तोड़कर… आकाश तिवारी

    roshni के द्वारा
    August 30, 2010

    आकाश जी .. बस इतना कहुगी .. ये पंक्तियाँ आपके लिए… किसी ने खूब कहा है की ……. उस ने कहा सुन एहेद निभाने की खातिर मत आना एहेद निभाने वाले अक्सर मजबूरी या मह्जूरी की थकान से लौटा करते हैं तुम जाओ और दरिया दरिया प्यास बुझाओ जिन आँखों मैं डुबो जिस दिल मैं भी उतरो मेरी तलब आवाज़ न देगी लेकिन जब मेरी चाहत और खवाइश की लो इतनी तेज़ और इतनी ऊंची हो जाये जब दिल रो पड़े तब लौट आना तब लौट आना आभार सहित

anju के द्वारा
August 30, 2010

रौशनी जी क्या बात है अति सुन्दर रचना भी और उसकी प्रस्तुति भी.. बधाई

    roshni के द्वारा
    August 30, 2010

    अंजू जी आपकी तारीफ के लिए तहे दिल से शुक्रिया …

    Stevie के द्वारा
    July 12, 2016

    Just home from a wonderful Thanksgiving dinner with our son and his family, as well as his wife’s parents–as always, an enjoyable ti#1&m82e1;grandchildren growing so fast! I want to thank you, Susan, for sharing your enthusiasm for life with us all, and all the girlfriends who join in with comments. I’m so glad I found your blog when I did–have been visiting here almost from the beginning. On a sad note, our daughter in Tx. just found that she is going to need more treatment for her breast cancer–such awful news to hear.

R K KHURANA के द्वारा
August 30, 2010

प्रिय रौशनी जी, सुंदर कविता के लिए बधाई ! राम कृष्ण खुराना

    roshni के द्वारा
    August 30, 2010

    आदरनीय़ खुराना जी .. आपकी टिप्पणी पाकर अति ख़ुशी होती है… आप जैसे अनुभवी जब अपने विचार व्यक्त करते है तो लगता है की हम सही जा रहे है ..

आर.एन. शाही के द्वारा
August 30, 2010

बहुत बढ़िया रोशनी जी … बधाई । फ़ोटो भी अच्छा चुना है ।

    roshni के द्वारा
    August 30, 2010

    धन्यवाद् शाही जी .. आपको रचना के साथ फोटो भी अच्छा लगा .. ये जानकर खुशी हुई क्युकि रचना का साथ देती ये फोटो तलाश करने में काफी वक़्त लग गया… तहे दिल से शुक्रिया

jalal के द्वारा
August 30, 2010

रौशनी जी किस लाइन की तारीफ करूँ सभी अपने में सबसे आला मुकाम पर हैं. कितनी रातों से इन आंखे ने देखा नहीं है ख़वाब तुम स्वपन बनकर आ जाओ मेरे लिए बस ऐसे ही मिलते रहे. बहुत बहुत शुक्रिया

    roshni के द्वारा
    August 30, 2010

    जलाल जी मन से की गयी जितनी भी तारीफ है मेरे लिए अमूल्य है… ये तारीफ ये टिप्पणिया ही आगे और होंसला बढाती है.. युही अपनी कीमती राय आगे भी देते रहियेगा… धन्यवाद सहित

Soni garg के द्वारा
August 30, 2010

वाह क्या खूब रचना लिखी है !

    roshni के द्वारा
    August 30, 2010

    सोनी जी धन्यवाद…

anamika के द्वारा
August 30, 2010

कितनी रातों से इन आंखे ने देखा नहीं है ख़वाब तुम स्वपन बनकर आ जाओ मेरे लिए बस इन पंक्तियों ने मन मोह लिया ….बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    roshni के द्वारा
    August 30, 2010

    अनामिका जी बहुत बहुत धन्यवाद आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा… इसी तरह अपने कीमती विचार देते रहियेगा.. धन्यवाद सहित

Ramesh bajpai के द्वारा
August 30, 2010

नहीं चाहिए चाँद तारे और सूरज एक जुगून ले आना मेरे लिए बस   रोशनी जी भावों की दरिया दरियाव बन बही है तिस पर भी आकांछा बूंद सी . बहुत सुन्दर भाव . बधाई

    roshni के द्वारा
    August 30, 2010

    रमेश बाजपाई जी आपको रचना अच्छी लगी जानकर बहुत ही ख़ुशी हुई… धन्यवाद सहित

    Emberlynn के द्वारा
    July 12, 2016

    Laurie,Interesting. As I read this post it occurred to me that it could be a great set of tips for *beginning* a story. A lot of the same principles apply I theeG.Cheersknorgi.-= Tumblemoose´s last blog post .. =-.

chaatak के द्वारा
August 29, 2010

रौशनी जी, लगता है एक अंतहीन इन्जार के लिए बहुत से रास्ते खोल रहीं हैं आप ताकि खुद से कोई शिकवा न रहे कि ‘काश वो खिड़की भी खोल देती शायद उसी खिड़की को बंद देख कर लौट गया होगा!’ बहुत ही खूबसूरत अंदाज़ है आपके इंतज़ार का भी | इन पंक्तियों के लिए आपको बधाई!

    roshni के द्वारा
    August 29, 2010

    चातक जी आपकी इतनी अच्छी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद .. आप बहुत ही गहरे अर्थ निकालते है कविता के तभी तो आपकी टिप्पणी अमूल्य होती है… तहे दिल से शुक्रिया… आभार सहित


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