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कुछ कमी सी है

Posted On: 21 Aug, 2010 में

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सब खामोश है

दिल की धड़कन, सांसो की सरगम….

बस तन्हाई है

न कोई हमसाया, न हमदम….

कुछ कमी सी है

होंठो पे हंसी और है ऑंखें नम….

आसमान सूना है

चाँद भी छुप गया, और तारे है कम…..

ढूढती है नज़रे

तुझ को या खुद को हर जनम…

मेरे दामन में है

कुछ हंसी यादें और कुछ गम……..

रौशनी मद्धम सी है

बुझ गया सूरज, आ भी जाओ कहा खो गए हो तुम

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1005 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Pooja के द्वारा
September 16, 2010

awesome lines…

    roshni के द्वारा
    September 16, 2010

    Thanks a lot pooja ji …

    Luck के द्वारा
    July 12, 2016

    Sie erhalten zu wählen, wer lebt in deinem Haus. Warum kann Gott nicht die gleiche Wahl? Es ist nicht wie Er sagt könnt ihr nicht leben ihre. Alles, was er sagt, ist, dass, wenn Sie wählen, um unter seinem Dach leben, Sie halten seine Regeln. Es ist ein relsbanoe Anfrage.

yogesh के द्वारा
September 11, 2010

दिन ढल गया है बढ़ रही है बेकरारी, तुम्हारी याद में तनहा जिंदगी है गुजारी, तुम्हारे आने का एहसास दिल में लिए बैठे है, लगने लगा है की “कुछ कमी सी है “…………………. 

    roshni के द्वारा
    September 13, 2010

    बहुत सुन्दर पंक्तिया योगेश जी

yogesh के द्वारा
September 11, 2010

वैसे आपकी य़े कविता मेरी हकीकत से मिलती है, ईसीलिए मैने आपसे पूछा कि हो सकता है हम दोनो एक ही कश्ती के सवार हो, पर तो आप एक शब्दो के रचनाकार हो, मैने आपसे य़े question पूछा इसके लिए क्षमा चाहता हूं…

    roshni के द्वारा
    September 12, 2010

    योगेश जी क्षमा शब्द का उपयोग करने की जरुरत ही नहीं … क्युकी हर किसी के जीवन में ऐसा मोड़ आता है जब किसी की कमी दिल को महसूस होती है कई बार किसी खास शख्स की और कई बार किसी अजनबी की …कई बार अपनों की तो कई बार पता ही नहीं चलता की आखिर वोह कमी है क्या? सच पूछिए तो हम सब एक ही कश्ती के सवार है …

manishgumedil के द्वारा
September 5, 2010

मेरा दिल कहता है – ना कोई संदेसा ना कोई पाती, ढूढती है नज़रें ना जाने कहाँ हो तुम….

    roshni के द्वारा
    September 5, 2010

    मनीष जी प्रतिक्रिया के लिए बहुत शुक्रिया और आपका दिल बहुत खूब कहता है … सुन्दर पंक्तिया आभार सहित

yogesh के द्वारा
September 5, 2010

वैसॆ आप की कविता तो बहुत अच्छी है, पर   ये कल्पना है या हकीकत,

    roshni के द्वारा
    September 5, 2010

    योगेश जी जब भाव मन में जगे तो फिर कल्पना और हकीकत में अंतर नहीं किया जा सकता … अब आप बताये आप को कल्पना लगी या हकीकत .. प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

    yogesh के द्वारा
    September 11, 2010

    वैसे आपकी य़े कविता मेरी हकीकत से मिलती है, ईसीलिए मैने आपसे पूछा कि  हो सकता है हम दोनो एक ही कश्ती के सवार हो, पर तो आप एक शब्दो के रचनाकार हो, मैने आपसे य़े question पूछा इसके लिए क्षमा चाहता हूं…

Abuzar osmani के द्वारा
September 2, 2010

shayar का शेर अर्ज़ है चाँद आँखों से रग ओ पै में उतर जाता है, शब् का मंज़र मुझे बेख्वाब सा कर जाता है, किश्ते वीरान कभी सैराब नहीं हो पाती, जी उमड़ता है तो पल भर को ठहर जाता है, उससे मिल कर भी हैं दीदार की प्यासी आँखें, जैसे दरया किसी सहरा में उतर जाता है, जब भी यादों की महक आती है मैं सोचता हूँ, वक़्त फूलों की तरह खिल के बिखर जाता है. शुक्रिया

    roshni के द्वारा
    September 3, 2010

    Abuzar Osmani जी आपका शेर बहुत ही खुबसूरत है …. शेर के रूप में टिप्पणी के लिए तहे दिल से धन्यवाद

jalal के द्वारा
August 31, 2010

ढूंढें नहीं मिलता वोह शब्द जो शायद इस हालत को बता सके. बहुत अच्छे.

    roshni के द्वारा
    September 1, 2010

    शुक्रिया जलाल जी….. युही अपने कीमती विचार देते रहियेगा ! आभार सहित

    gopalramani के द्वारा
    September 3, 2010

    पता ही नहीं चला कब सुबह हो गई

    roshni के द्वारा
    September 3, 2010

    गोपाल जी टिप्पणी के लिए धन्यवाद

    Chasmine के द्वारा
    July 12, 2016

    I enjoy reading about Mayim. She seems so doewnto–arth especially after I saw her on “What Not to Wear”. She makes some parenting choices that differ from mine but I totally respect her decisions.

Deepak Jain के द्वारा
August 31, 2010

बेहतरीन कविता रोशनी जी

    roshni के द्वारा
    September 1, 2010

    दीपक जैन जी, धन्यवाद आपको कविता पसंद आयी .. इसी तरह आगे भी अपने विचार देते रहियेगा !

Rakesh के द्वारा
August 28, 2010

बहुत सुन्दर……..

    roshni के द्वारा
    August 29, 2010

    राकेश जी आपका कविता अच्छी लगी.. आपकी प्रतिर्किया के लिए धन्यवाद आभार सहित

vijendrasingh के द्वारा
August 26, 2010

सुन्दर रचना के लिए धन्यवाद !

    roshni के द्वारा
    August 26, 2010

    विजेंद्र सिंह जी .. आपकी प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से शुक्रिया आभार सहित

ajaykumarjha1973 के द्वारा
August 25, 2010

सुंदर सरल ….रचना…..

    roshni के द्वारा
    August 25, 2010

    अजय कुमार जी धन्यवाद !

syeds के द्वारा
August 25, 2010

रोशनी जी,बहुत खूबसूरत लिखा आपने. syeds.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    August 25, 2010

    धन्यवाद syeds जी

    Lettice के द्वारा
    July 12, 2016

    Unlaparleled accuracy, unequivocal clarity, and undeniable importance!

roshni के द्वारा
August 24, 2010

रीता जी, धन्यवाद टिप्पणी के लिए..

rita singh 'sarjana' के द्वारा
August 23, 2010

रौशनी जी अच्छी कविता बधाई l

    Malerie के द्वारा
    July 12, 2016

    Woah nelly, how about them applse!

rachna varma के द्वारा
August 23, 2010

यादों के चिरागों को जलाए रखिये , धडकनों में किसी को बसाये रखिये यह एहसास है खुबसूरत , इस एहसास को बस बनाये रखिये

    roshni के द्वारा
    August 24, 2010

    जी रचना जी ये अहसास बहुत खुबसूरत है… और इंसान इस अहसास के साथ खुद भी खुबसूरत हो जाता है…

anju के द्वारा
August 22, 2010

रौशनी मद्धम सी है .. आ भी जाओ कहाँ खो गए तुम… खुबसूरत अहेसास …

    roshni के द्वारा
    August 22, 2010

    धन्यवाद अंजू जी

soni garg के द्वारा
August 22, 2010

वाह रौशनी, एक बार फिर से कमाल कर दिया !

    roshni के द्वारा
    August 22, 2010

    सोनी जी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया …

R K KHURANA के द्वारा
August 22, 2010

प्रिय रौशनी जी, बहुत ही सुंदर रचना ! मुझे भी चार लाईने याद आ गयी ! हुए हैं करीब लेकिन है नसीब अपने अपने तेरे लब पे मुस्कराहट मेरी आँख में नमी है ! तुझे पा लिया है लेकिन फिर भी सोचती हूँ मेरी जिन्दगी में शायद किसी चीज़ की कमी है ! राम कृष्ण खुराना

    Piyush Pant के द्वारा
    August 22, 2010

    बहुत सुंदर रचना है आपकी ……… इसी तरह लिखती रहें ……….. शुभकामनाएं है…….

    soni garg के द्वारा
    August 22, 2010

    वाह खुराना जी आपकी चार लाइने तो बड़ी ही गजब की है !

    roshni के द्वारा
    August 22, 2010

    र. क. खुराना जी बहुत बहुत धन्यवाद… आपको कविता पसंद आयी… आपकी ये चार लाईने तो पूरी कहानी है ,,, बहुत ही बढ़िया है .. आभार सहित

    roshni के द्वारा
    August 22, 2010

    पियूष पन्त जी धनयवाद प्रोत्साहन के लिए.. युही प्रोत्साहित करते रहिएगा.. धन्यवाद सहित

    Rose के द्वारा
    July 12, 2016

    I want to to thank you for this good read!! I definitely enjoyed every little bit of it. I’ve got you book-marked to look at new things you poellhs&tip;

mansi के द्वारा
August 22, 2010

Beautiful poem.. beautiful feelings……… keep it up… waiting for more……

    roshni के द्वारा
    August 22, 2010

    thanks a lot mansi ji…

Dharmesh Tiwari के द्वारा
August 22, 2010

काफी सुन्दर शब्दों से नवाज़ा है रोशनी जी इसे आपने

    roshni के द्वारा
    August 22, 2010

    तारीफ के लिए बहुत शुक्रिया धर्मेश जी… धन्यवाद सहित

syeds के द्वारा
August 22, 2010

बहुत शानदार लिखा रोशनी जी,बधाई ढूढती है नज़रे तुझ को या खुद को हर जनम… मेरे दामन में है कुछ हंसी यादें और कुछ गम……..

    roshni के द्वारा
    August 22, 2010

    Syeds ji आपको लिखा पसंद आया.. इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया… धन्यवाद सहित युही होंसला बदते रहिये

    Lefty के द्वारा
    July 12, 2016

    Bethany — that’s good. I would almost recommend that singles spend less time focusing on the list of  wants” for a relationship, and only focus on a list of deal-breakers. If it’s a short list (and it should be) you can have a sense of focus that helps you make difficult decisions when they’re necessary.

anamika के द्वारा
August 22, 2010

बहुत ही अच्छा लिखा है आपने …………शब्दों पर आपकी पकड़ अच्छी है ………….

    roshni के द्वारा
    August 22, 2010

    Anamika ji धन्यवाद … आप की प्रतिक्रिया पढ़कर बहुत अच्छा लगता है .. आभार सहित

Ramesh bajpai के द्वारा
August 22, 2010

न कोई हमसाया, न हमदम…. कुछ कमी सी है होंठो पे हंसी और है ऑंखें नम……………….रौशनी जी ……5/5

    roshni के द्वारा
    August 22, 2010

    रमेश बाजपाई जी ५/५ देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया .. मुझे इतने आचे नंबर दिए बहुत अच्छा लगा .. धन्यवाद सहित

chaatak के द्वारा
August 21, 2010

क्या बात है रौशनी जी, आपने तो महफ़िल लूट ली वो भी इतने शोख अंदाज़ में| सूरज बुझा नहीं करते ढल कर फिर से जवान होने को आँखों से दूर भले ही हों| उस पर भी बुलाने वाले का अंदाज़ ऐसा हो तब तो बिलकुल भी नहीं| खूबसूरत रचना पर हार्दिक बधाई!

    roshni के द्वारा
    August 22, 2010

    चातक जी शुक्रिया … आप ने सही कहा सूरज बुझा नहीं करते पर कवी मन और कल्पना मिलकर ये काम भी कर जाते है, .. इतने दिनों बाद आपकी प्रतिर्किया जानकर अच्छा लगा… आप हमेशा खुले दिल से तारीफ करते है … जो बहुत अच्छी लगती है .. धन्यवाद सहित


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