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कुछ चाहती है आजादी .....

Posted On: 14 Aug, 2010 Others में

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मै आजादी हूँ! आज मेरी भारतवर्ष में तिरसठवीं वर्षगांठ है ! मै आज अपने मन की बात अपने बच्चों से करना चाहती हूँ और आज उनसे एक वादा भी चाहती हूँ !……..

तो मेरे प्यारे भारत के बच्चों अतीत में कुछ बाहरी ताकतों ने मुझे मेरे भारत से अलग कर दिया और गुलामी की जंजीरों से बांधकर मुझे किसी काल-कोठरी में कैद कर लिया! फिर लंबे समय के बाद देश के लोगों में आजादी के लिए प्रेम जगा… उन्हें अहसास हुआ की किस तरह भारत आजादी के लिए छटपटा रहा है! बस उनके दिल में भी मेरे लिए यानि आजादी के लिए न मिटने वाली आग जल उठी और इस आग से उन्होंने अंग्रेजों को सबक सिखाया! तब हिन्दू मुसलमान, सिख और इसाइ एक हो गए… ऐसा लगता था सब एक माला में पिरो दिए गए हों! खून बहा, जाने गयी , स्वदेश के नारे लगे.. कभी अहिंसा से तो कभी युद्ध से जंग लड़ी गयी… मुझे गर्व है उन सब बहादुरओं पर जिन्होंने भारत को गुलामी की जंजीरों से आजादी दिलवाई ! आजादी फिर से अपने भारत के पास लौट आई ! बहुत सी खुशियों साथ और एक दुःख के साथ …. दुःख ये की उसकी माला से कुछ मोती अलग करके नए देश बना दिये गए !………..

आज वर्तमान में मेरे भारत ने बहुत उन्नति की है ! सारी दुनिया मै अपनी ताकत का , विकास का तिरंगा लहरा दिया है ! शिक्षा में, विज्ञानं में, कृषि में , हर श्वत्र में बहुत तरक्की की है ! विश्व में नाम उच्चा किया है ! मगर मै आज खुश नहीं हूँ क्युकी मेरे जिन बेटों ने मर कर मुझे भारत से मिलाया था उन्हें भुला दिया गया है ! उनके आजादी के मकसद को मिटा दिया गया…आज मेरे भारत पर जोंक जैसे लोग शासन कर रहे है ! जो भारत के बारे में नहीं सिर्फ अपने बारे में सोचते है ! आजादी का मतलब उनके लिए सिर्फ शासन, शक्ति और पैसा है ! वो भूल गए है मेरे प्यारे बच्चे किस तरह भूख, महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी से झुलस रही है! भष्टाचार ने आजादी को कलंकित कर दिया है! आपसी कलह ने मेरी माला के मोती बिखेर दिए है! मै आज मायूस हूँ …………… उदास हूँ ………… और चिंतित हूँ …………….

मै इंतज़ार कर रही हूँ की कब मेरे बच्चे इन अंदरूनी दुश्मनों से मेरे भारत को आजाद करवायेगे.. कब आजादी का सदुपयोग करेगे… ये प्रश्न मुझे विचलित करता है! और भविष्य के लिए चिंतित भी………….

पर जब नयी आने वाली पीढ़ी को देखती हूँ तो सोचती हूँ के शायद ये पीढ़ी आजादी के वास्तविक महत्व को जानेगी! मेरे युवा बच्चे आज के भष्टट मतलबी नेता रूपी दाग को मेरे आँचल से धोकर मुझे उज्जवल करेगे और भारत का नाम वास्तव में रोशन करेगे! हर आदमी को गरीबी मज़बूरी के जिन्दगी से निकाल कर एक वो अच्छी जिन्दगी देगे, जिसका सपना मेरे शहीद बच्चों ने देखा था!…..

मै आजदी अपनी युवा पीढ़ी को आगे आने का आमन्त्रण देती हूँ और कहती हूँ की जिस तरह अतीत में मेरे बेटों ने मेरे लिए आवाज उठाई , आज तुम भी उसी जज्बे से उठो और लड़ो … ये लड़ाई लम्बी चलेगी, क्युकी दुश्मन घर के लोग है ,,, उन्हें सही राह तुम ही दिखा सकते हो.. मुझे तुम पर पूरा विश्वास है… आज मेरे भारत के आजादी दिवस पर मेरे लिए बस यही एक प्रण करो ———— आगे बढ़ो —————- आवाज उठाओ ———— और भारत का भविष्य संवर दो ————-

जय हिंद !!!!!!!

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182 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Amit kr Gupta के द्वारा
November 2, 2010

रोशनी जी ,बहुत दिनों के बाद आज आपका लेख पढ़ा .आजादी के 63 साल बाद भी हमारे देश के अधिकतर लोग BPL(BELOW POVERTY LINE ) नीचे रहने को विवश हैं. बिजली पानी जैसी मुलभुत सुविधाओ की अब भी जरुरत बनी हुई हैं. मेरा ऐसा नहीं कहना हैं विगत वर्षो में विकास नहीं हुआ विगत वर्षो में विकाश के बहुत से कार्य हुए हैं लेकिनजिस रफ़्तार से होने चाहिए थे नहीं हुए हैं .वैज्ञानिक स्वामीनाथन ने कहा था की यदि विकास कार्य सही से होते तो आठवी पंचवर्षीय योजना की जरुरत ही नहीं पड़ती .उनके कहने का मतलब की हर जगह भ्रष्टाचार हैं .राजीव गाँधी ने कहा था की केंद्र से चला एक रुपैया जिला से पंचायत तक पहुचते-पहुचते इतना कम हो जाता हैं की उतना में विकास हो पाना मुस्किल हैं. भ्रष्टाचार ने हमारी व्यवस्था को दीमक की तरह चाटता जा रहा हैं. हमारे नेतागण भी वाही कर रहे हैं. इसके लिए युवा वर्ग को जगाना होगा. क्यूँ की परिवर्तन तो युवा ही करते हैं. बढ़िया पोस्ट बधाई अमित कुमार गुप्ता हाजीपुर ,वैशाली , बिहार आप मेरे लेख पढ़ने के लिए इस ADD पर जा सकते हैं. . http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    November 2, 2010

    अमित जी आप ने सही कहा अगर सही तरह विकास होता और ईमानदारी से होता तो आज के भारत की तस्वीर सुखद होती … धन्यवाद सहित

ARVIND PAREEK के द्वारा
August 25, 2010

सुश्री रोशनी जी, आजादी के विचारों को हम तक पहूँचानें का शुक्रिया । लेख वाकई बहुत अच्‍छा है । लेंकिन इसी मंच पर माननीय श्री ओ.पी.पारीक ने अपने ब्‍लॉग http://oppareek43.jagranjunction.com में लिखा है और मैं उसे उद धृत कर रहा हूँ कि – 63 साल बाद भी हम नहीं सुधरे. याने आज भी सियासतदानों की चाल में आ कर फिरकापरस्ती की और रुख कर लेते हैं. 15 अगस्त सिर्फ आज़ादी का जश्न भर नहीं है बल्कि उस बर्बादी से सबक लेने का जश्न भी है जिसके घाव अभी तक नहीं भरे हैं.. आज हम आज़ाद जरूर हैं पर इस आज़ादी का दुरुपयोग निश्शंक हो कर कर रहे हैं मसलन :- आगे उन्‍होंनें करीब 10 कारण गिनाएं हैं । जहां आजादी की यही पीड़ा व्‍यक्‍त होती नजर आती है जो आपके लेख में है । तथापि आपके लेख का अंत एक पाजिटिव सोच के साथ होता है । बहुत अच्‍छा लेख है । अरविन्‍द पारीक (भाईजी कहिन)

    roshni के द्वारा
    August 25, 2010

    अरविन्द पारीक जी आपके विचार जन कर अच्छा लगा… आज हम आजादी का दुरपयोग कर रहे है और कभी इसे पाने की लिए लाखों शहीद हो गए थे… क्युकी हमे ये विरसत में और बिना कुछ गवाए मिली है .. इस लिए हम इसका सदुप्याग नहीं कर रहे .. और positive सोच तो हर देश वासी को रखनी पड़ेगी तभी जाकर कुछ देश के लिए कर पायेगे.. आभार सहित

chaatak के द्वारा
August 21, 2010

रौशनी जी, इस रंग की आशा काफी दिनों से आपसे थी, आज पढ़कर बहुत अच्छा लगा| जज्बे को इसी तरह बनाए रखियेगा| देर से कमेन्ट करने के लिए माफ़ी चाहूंगा| अच्छे लेख पर बधाई! वन्दे-मातरम!

    roshni के द्वारा
    August 24, 2010

    धन्यवाद चातक जी .. वन्दे-मातरम

    Idana के द्वारा
    July 12, 2016

    I ONLY KNEW PROOF LIKE EVOERYNE ELSE NOT IN PERSON JUST WHAT I SEEN ON TV OR READ ABOUT HIM BUT I WAS STILL TOTALLY GUTTED WHEN I HEARD WHAT HAPPENED TO HIM

vijendrasingh के द्वारा
August 18, 2010

आपके शब्दों में बहुत ताक़त है जज्बा है जूनून है पढकर अच्छा लगा !

    roshni के द्वारा
    August 18, 2010

    विजेंद्र सिंह जी आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया… आपको विचारे अच्छे लगे जान कर अच्छा लगा.. धन्यवाद सहित

Deepak Jain के द्वारा
August 18, 2010

रोशनी जी , बिल्कुल ठीक कहा आपने – ये लड़ाई लम्बी चलेगी, क्युकी दुश्मन घर के लोग है ,,, परन्तु लड़ाई की शुरुवात तो करनी पड़ेगी http://dipakjain.jagranjunction.com/ दीपक जैन रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

    roshni के द्वारा
    August 18, 2010

    धन्यवाद दीपक जी.. आपके प्रोत्सहन के लिए..और लड़ाई की शुरवात तो अब करनी ही पड़ेगी… पर किस बात का इंतज़ार कर रहे है हम .. आभार सहित

    Lorren के द्वारा
    July 12, 2016

    I know how that feels. I have a strong fear and anxiety of death. Myself and my children. It’s awful. I would also hope that if I were no longer here someone would provide my words to them so they could know more of mes8nei.e&#D217;s last awesome post…

R K KHURANA के द्वारा
August 16, 2010

प्रिय रौशनी जी, स्वतंत्रता दिवस पर आपकी यह रचना बहुत अच्छी बन पड़ी है ! शुभकामनायें राम कृष्ण खुराना

    roshni के द्वारा
    August 17, 2010

    आदरनिये खुराना जी आपकी शुभकामनाऔ के लिए बहुत बहुत शुर्किया.. आपका रचना पसंद आई ये जान कर बहुत खुशी हुई .. इसी तरह अपने बहुमूल्य विचारों से अवगत करवाते रहिएगा . धन्यवाद आभारी सहित

mansi के द्वारा
August 16, 2010

Hi roshni ji good thoughts .. aur apne sahi kaha ki dushman abke ghar ke log hai … so une bahar to nikal nai skte bs virod krke aur khud aage aa kar hi yuva desh ko bacha skte hai Jai hind

    roshni के द्वारा
    August 17, 2010

    Mansi ji thanks for ur comment…

anju के द्वारा
August 16, 2010

रौशनी जी जय हिंद .. अच्छे विचार पढ़ कर अच्हा लगा … हम लोगो को भी आजादी और भारत के लिए कुछ करना चाहिए बस शिकायते ही करते है हम लोगो की आजादी से क्या मिला पर हमने खुद क्या दिया …

    roshni के द्वारा
    August 17, 2010

    अंजू जी जय हिंद… आपके विचार जन कर अच्छा लगा .. की हमने क्या दिया??? अगर हम सब ऐसा सोचे तो शायद हमारा आजाद भारत आज कुछ और होता.. आपकी टिप्पणी के लिए धन्यवाद

    Lyzbeth के द्वारा
    July 12, 2016

    Als Vater eines Sohnes in der zweiten Klasse, der nach dem Nintendo DS die Wii für sich entdeckt hat, sind diese AuÃu¼shrfngen sehr hilfreich. Vielen Dank!

Aakash Tiwaari के द्वारा
August 16, 2010

वाह क्या बात आप के विचारों को पढने के बाद बहुत अच्छा लगा . Aakash

    roshni के द्वारा
    August 17, 2010

    आकाश तिवारी जी धन्यवाद

    Rain के द्वारा
    July 12, 2016

    purtroppo che dire,che vorrei proc;rlo&#8230aanvora non ho trovato nessuna padrona..pero se me la immaggino,sarebbe bello una padrona,vestita di pelle,ed io disteso,nudo,mentre lei,mi sorride,prima di sedersi sopra di me,facendomi provare la sottomissione…e di cio è felice…magari dopo gli abiti in pelle,potrebbe toglierseli,e magari darmi le spalle…..

ajay verma के द्वारा
August 14, 2010

आज शाम से ही काफी अच्छे अच्छे विचार पढने को मिले पहले एक लेख, मासूम को सजा और इस लिंक पे http://piyushpantg.jagranjunction.com और फ़िर http://listenme.jagranjunction.com/2010/इस लिंक पर आज तिरंगा छाया है। जैसे लेख पढ़े अच्चा लगा. जहा एक और मासूम को सजा से आँख नाम हो आये वही आपके और आज तिरंगा छाया है जैसे लेखों से साहस सा मिला. की इस देश को चाहने वालो के विचारों में अभी भी गर्मी है….. अच्छे लेखो के लिए आप सभी को शुक्रिया……..

    roshni के द्वारा
    August 17, 2010

    अजय वर्मा जी आपकी प्रतिक्रिया जान कर अच्छा लगा… जहाँ लिखने वालों ने तो आजादी के लिए लिखा पर आजादी के बारे में लोग पढ़ते भी बहुत ही कम है.. धन्यवाद सहित


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