lets free ur mind birds

Just for Soul

53 Posts

37859 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 591 postid : 101

उदास शाम

Posted On: 7 Aug, 2010 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

sad evening

जाने कैसे सुबह से शाम हो गई,
ये जिन्दगी बस यु ही तमाम हो गई ………

करते रहे हम कोशिशे मंजिल को पाने की ,
हर कोशिश लेकिन आज तो नाकाम हो गई …..

मन के किसी कोने में छुपाया था आपको ,
फिर उल्त्फत मेरी कैसे बदनाम हो गई ……….

जिस खुशी के लिए उठाया था हर एक ग़म ,
वो खुशी आज मुझसे अनजान हो गयी ……..

ये जिन्दगी बस यु ही तमाम हो गयी ………
मेरा वजूद हस्ती मेरी बेनाम हो गयी ……..
जाने कैसे सुबह से शाम हो गयी …………

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (28 votes, average: 4.71 out of 5)
Loading ... Loading ...

33 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Amit kr Gupta के द्वारा
September 7, 2010

रोशनी जी नमस्कार ,आपकी रचनाओ का जवाब नहीं हैं. बेशक अच्छी रचना . http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    September 8, 2010

    अमित कुमार जी नमस्कार … प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..

manishgumedil के द्वारा
September 5, 2010

मेरा दिल कहता है – तोड़ कर दिल मेरा एक सबक दे दिया, ता-उम्र के लिए “रौशनी” आराम हो गयी…………….

    roshni के द्वारा
    September 5, 2010

    मनीष जी बहुत खूब क्या शेर अर्ज किया अपने.. बहुत ही बढ़िया …. टिप्पणी के लिए धन्यवाद आभार सहित

    Vinny के द्वारा
    July 12, 2016

    As a frustrated father of one of the five undrafted catchers from your list of top 30 college catchers, do you have an idea why Iglesias, Wiif,eckibSchaefrer, Bullock, and Smith went undrafted? All were starters in D1 programs who hit over .300 with decent power numbers.

brijeshkumar के द्वारा
August 22, 2010

पढ़ रहा था आपकी कविता जाने कैसे उनकी यद् आ गयी

    roshni के द्वारा
    August 22, 2010

    यादे तो हवा के झोकें सी है बस कभी भी आ जाती है .

jovi के द्वारा
August 11, 2010

jise dard ko bhule barso bit gaye wo aaj apki kabita ne mujhe ek baar phir se taro-taza kar diya. mai apko tahe dil se sukriya ada karna chahta hun ki ek baar phir se apne mujhe gujre hue palo me le ke aaye. thanks vikash

    roshni के द्वारा
    August 11, 2010

    vikas ji आपको गुजरे हुए पल याद आ गए कविता पढ़ कर.. या यु कहिये कही मन में छुपी यादें ताजा हो गयी… दर्द कही दिल में छुप के बैठ जाता है और अचानक ऐसे ही सामने आ जाता है… दर्द या खुशी जो भी पल है उन्हें संभल कर रखियेगा ये बहतु ही कीमती होते है … आभार सहित

allrounder के द्वारा
August 9, 2010

रोशिनी जी, एक बार फिर से उत्तम उदगार ! मन की गहराईयों से निकलते इन शब्दों के मोतियों को कविता रूपी माला मैं पिरोने के लिए एक बार फिर से बधाई !

    roshni के द्वारा
    August 9, 2010

    सचिन जी… शुक्रिया आपकी प्रतिक्रियां हमेशा हमे और अच्छा लिखने के लिए प्रेरित करती है… हमेशा होंसला अफजाई बढ़ने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया…. आभार सहित

Yogesh के द्वारा
August 9, 2010

Dear Roshni ji really It is very nice poem which touch to my hurt well done keep it up. yogesh

    roshni के द्वारा
    August 9, 2010

    Yogesh ji thanks a lot for ur precious comment.. thanks again

Anita Paul के द्वारा
August 8, 2010

 करते रहे हम कोशिशे मंजिल को पाने की , हर कोशिश लेकिन आज तो नाकाम हो गई ………………….ये तो मेरे जीवन की कविता लगती है बहुत सुन्दर लिखा आप ने दिल को छू गई ……………….सुन्दर अति सुन्दर

    roshni के द्वारा
    August 9, 2010

    अनीता पौल जी तारीफ के लिए शुक्रियां… और ये कविता आपको अपने जीवन के करीब लगी .. ये जानकर मै यही दुआं करुगी की आपकी मंजिल आपको जरुर मिले… धन्यवाद सहित

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
August 8, 2010

बहुत अच्छी रचना रोशनी जी | बहुत अच्छे उदगार ……… यूं ही लिखते रहिये बधाई

    roshni के द्वारा
    August 8, 2010

    शैलेश जी आप ने अपने कीमती विचारं दिए धन्यवाद .. युही होंसला अफजाई करते रहिएगा.. आभार सहित

mansi के द्वारा
August 8, 2010

roshni …… very nice pome. पद कर दिल के करीब लगी

    roshni के द्वारा
    August 8, 2010

    Mansi ji thanks a lot for ur comment…..

anju के द्वारा
August 8, 2010

करते रहे हम कोशिशे मंजिल को पाने की , हर कोशिश लेकिन आज तो नाकाम हो गई रौशनी बहुत आछी कविता लिखी , ये पंक्तियाँ मरे दिल को छु गई

    roshni के द्वारा
    August 8, 2010

    अंजू जी जब कोई पंक्ति किसी के दिल को छु जाती है ये सुन कर बहुत अच्छा लगता है … धन्यवाद

soni garg के द्वारा
August 8, 2010

कविता कहू या गजल ! जो भी है खुबसूरत है ! रौशनी जी एक बात पूछनी है कृपया अन्यथा मत लेना ये मेरी एक छोटी सी शंका है जिसे मैं दूर करना चाहती हूँ दरअसल ये रचना शायद मैं पहले भी पद चुकी हूँ तो क्या मैं गलत हूँ ??? कृपया बताईये !

    roshni के द्वारा
    August 8, 2010

    सोनी जी आपकी शंका दूर करे देती हूँ .. ये मेरी खुद की ही रचना है .. यहाँ पोस्ट करने से पहले मैंने इसे ऑरकुट पर shayari community में पोस्ट किया था … क्युकी यहाँ पर लिखने से पहले मै वही पर लिखती थी… आप मेरे ऑरकुट अकाउंट roshnidhir @yahoo .com पर जाकर वहां पर my community में जाईएगा वहां पर आपको शयरी कम्युनिटी दिखिए पड़ेगी बस उसी मे है ये मेरी कविता…. वहां पर रौशनी नाम से check करियेगा और वहां पर ये कविता Adhuri Jindgi ke naam se posted hai… आशा है की आप की शंका स्वयं ही दूर हो जाएगी…. इस मंच पर मे किसी और की पोस्ट अपने नाम से डालना बिलकुल भी पसंद नहीं करुगी क्युकी ये मेरे असूलों के खिलाफ है .. आभार सहित …

    Soni garg के द्वारा
    August 8, 2010

    aapka bahut bahut dhanyvaad Roshni , aapne keh diya bas itna hi mere liye kaafi hai aur mujhe koi account chek nahi karna bas meri sari shanka dur ho gayi ………aur agar mere saval se aapko koi taklef hui ho to maaf kijiyega ………..aur vastav main aapki poetry bahut achchi hai

    roshni के द्वारा
    August 9, 2010

    Soni ji आप के सवाल से मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई… और बस आपकी शंका दूर हो गयी जानकर अच्छा लगा … आपने मुझसे पुच्छा था इसलिए सारी डिटेल दी… और इस मंच पर अगर किसी को भी कोई शंका हो तो उसे पूछने का पूरा अधिकार है…. आप यु भी हमारी well wisher है … आप हमेशा प्रेरित करती है अच्छा लिखने के लिए… उसके लिए धन्यवाद… आभार सहित

Aakash Tiwaari के द्वारा
August 8, 2010

सुन्दर कविता बहुत अच्छा लगा पढ़कर . Aakash Tiwaari

    roshni के द्वारा
    August 8, 2010

    आकाश तिवारी जी आपको कविता पढ़कर अच्छा लगा ये जानकार खुसी हुई… इसी तरह अपने विचार देते रहिएगा धन्यवाद

Ramesh bajpai के द्वारा
August 8, 2010

मन के किसी कोने में छुपाया था आपको , फिर उल्त्फत मेरी कैसे बदनाम हो गई ………. जिस खुशी के लिए उठाया था हर एक ग़म roshni जी सुन्दर भाव अच्छी रचना बधाई एक बार लिखा पोस्ट नही हुआ

    roshni के द्वारा
    August 8, 2010

    रमेश बाजपाई जी आप को कविता पसंद आई.. ये जानकर खुसी हुई…आपकी टिप्पणी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आभार सहित

syeds के द्वारा
August 8, 2010

बहुत अच्छा लिखा रोशनी जी! विशेष रूप से यह पँक्तियाँ! जिस खुशी के लिए उठाया था हर एक ग़म , वो खुशी आज मुझसे अनजान हो गयी ……..

    roshni के द्वारा
    August 8, 2010

    Syeds जी धन्यवाद….आप को ये पंक्तियाँ अच्छी लगी इस के लिए तहे दिल से शुक्रियां युही अपनी कीमती टिप्पणी देते रहिएगा धन्यवाद

chaatak के द्वारा
August 8, 2010

अति उत्तम! रौशनी जी, इस नगीने को कहाँ छिपा के रखा था चुपचाप ऐसे निकला जा रहा था कि नज़र ही ना पड़ी| वैसे देखने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं| देखिये पहुँच गए हम| आपकी सबसे बेहतरीन रचनाओं में से एक लगी मुझे| तारीफ़ के लिए शब्द नहीं हैं| बधाई! ५/५

    roshni के द्वारा
    August 8, 2010

    चातक जी, आपने पहले ही इतनी तारीफ कर दी और लिख रहे है की तारीफ के लिए शब्द ही नहीं है …. वैसे आपकी नज़र से कोई रचना बच ही नहीं सकती.. क्युकी आपकी टिप्पणी हमारे लिए बहुमूल्य है … आपने आज फिर ५/५ दिए इस रचना को.. तहे दिल से धन्यवाद…


topic of the week



latest from jagran