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क्या आर्ट की पढ़ाई करना गलत है ?? हमे कब मिलेगी प्लेसमेंट ??

Posted On: 2 Aug, 2010 Others में

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आज सुबह सुबह हमारे पड़ोस की आंटी जी अपने बेटे की नौकरी लगने की ख़ुशी मे हमारा मुहँ मीठा करवाने के लिए घर आई ..मेरी मम्मी जी ने पूछा की.. अच्छा कहा लगी जॉब? क्या किया तुम्हारे लडके ने जो इतनी जल्दी नौकरी भी मिल गयी …. हमारी आंटी जो पहले ही हवा में उड़ रही थी बड़े गर्व से कहने लगी की कंप्यूटर का इंजिनियर है अभी तो रिजल्ट भी नहीं आया और पहले ही कंपनी वालों ने रख लिया उसको… अब मेरी मम्मी ने दूसरा सवाल किया अच्छा तो फिर तन्खवा क्या देगे … अब तो आंटी जी और भी चहकती सी बोली अरी वहां तो package मिलता है हैप्पी कह रहा था की ४-५ लाख का होगा …… आंटी जी तो चली गयी मगर अब मेरी बारी थी.. अपनी माता जी के कटु वचन सुनने की … मैंने सोचा आज तो सुबह सुबह बहस होगी…… बादल तो पड़ोस मे गरज गए मगर बारिश मेरे ऊपर होने वाली थी…. और मम्मी जी हो गयी शुरू……. “देखा अभी तो रिजल्ट नहीं आया और इतने पैसे कमा रहा है … तू बता तुने क्या किया अभी तक ६००० की नौकरी भी नहीं है तेरे पास… लोगों के बच्चे कितना कमा रहे है … तुने तो सारी पढाई बेकार मे ही की …. तू भी पढ़ लेती कंप्यूटर तो आज अछे से नौकरी तो मिल जाती……. अभी कल ही कोई तेरे रिश्ते की बात कर रहा था पर वही न वोह भी कंप्यूटर पढ़ी लड़की ही मांगते है…..” मैंने कहा मम्मी क्यों इतना गुस्सा करती हो.. मुझे भी मिल जाएगी नौकरी .. अब कितने बैंकों में पेपर दे तो रखे है .. कही न कही तो पास हो ही जाउगी…. माँ बोली हाँ कब से पेपर दे रही है अभी तक तो पास हुई नहीं….. कुछ न होगा तेरा …. पढ़ लिख कर गवा दिया तुने तो… आर्ट्स पढ़कर मिल गया तुजे चैन…… अरे माँ मुझे क्या पता था की आर्ट्स वालों को अब कोई पूछेगा ही नहीं… पर देखो न मेरी क्या गलती है अब हमे प्लेसमेंट नहीं मिलता तो.. कोशिश तो पूरी करती हु न … मम्मी बोली , “मुझे नहीं पता……. क्यों पढ़ा तुने आर्ट कुछ ओर पढ़ लेती जो काम आता… मेरे तो बच्चे ही नालायक निकले… चलो माँ अब चुप भी करो… और सुबह सुबह मेरा और अपना मूड मत ख़राब करो…….

वास्तव मे ये मेरी नहीं हर घर की कहानी है जहाँ आर्ट्स पढ़ कर अभी तक नौकरी की तलाश की जा रही है … मेरे बहुत से दोस्त अभी तक अच्छी नौकरी तलाश नहीं कर पाए क्युकी उन्होंने आर्ट्स लिया था … science , maths या कंप्यूटर नहीं…. अब जिसकी जो रूचि होगी वही पढ़ेगा ना.. और क्या पता था की ये सब करने के बाद भी जॉब नहीं मिलेगी….हाँ स्कूल में पढ़ाने की नौकरी जरुर मिल जाती है … पर कोई ज्यदा पैसे देने को तैयार ही नहीं होता .. बेचारे कितने पड़े लिखे युवा ऐसे ही बेकार घूम रहे है ……….. आप ही कहो क्या आज के high -tech ज़माने में आर्ट्स वालों की कोई value ही नहीं है… सभी आईटी, engineers जैसे विषयों की पढ़ने वालों को ही प्लेसमेंट की सुविधा क्यों दी जा रही है … आर्ट्स वालों को कब दी जाएगी ये सुविधा??? जब कोई आर्ट्स पढ़ने वाला नहीं बचेगा तब………. आज हर कोई माँ-बाप अपने बच्चे को आर्ट्स सुब्जेक्ट नहीं लेने देते क्युकी वोह जानते है की इसमे कोई भविष्य नहीं है… अगर जॉब मिल भी गया तो ज्यदा से जायदा १०-१५हज़ार ही तो कमाएगा… और इतनी मंहगाई में क्या खायेगा और क्या बचत करेगा…. और अगर आईटी इंजिनियर या डॉक्टर बन जाये फिर तो अगली सात पीढ़िया बैठ कर खाएगी.. भविष्य की चिंता ही न रहेगी… मगर क्या ये हम आर्ट्स वालों के साथ अन- न्याय नहीं??? अब आप ये न सोचियेगा की मै साइंस, आईटी वाले स्टुडेंट्स के खिलाफ हु…. मै तो बस मेरे जैसे बहुत से युवा लोगों के भविष्य को लेकर चिंतित हूँ… अगर आर्ट्स पढ़े स्टुडेंट न होगे तो देश का विकास अधुरा रह जायेगा…. क्युकी जितना साइंस, आईटी जरुरी है आर्ट्स भी उतना ही जरुरी….अगर ये सब विकास का ढांचा है तो आर्ट्स नीव है … और अगर नीव कमजोर पड़ गयी तो ढांचा भी गिर जायेगा….. मगर आज जिस तरफ समाज की रूचि हो रही है लगता है वो दिन दूर नहीं जब आर्ट्स वालों को दीया लेकर दूंढा जायेगा, आर्ट्स पढने के लिए scholarship भी दी जाएगी…. और फिर टीवी पर भी आर्ट्स के institutes की ऐड आया करेगी… और आर्ट्स पढने के लिए प्रचार किया जायेगा…….. कब जागेगी हमारी सरकार और कब भला होगा हम आर्ट्स वालो का…….हमारे लिए तो कोई आवाज भी नहीं उठाता…… काश की सब आर्ट्स वाले एक हो जाये और अपने लिए रास्ता खोजे…. हम भी गर्व से कहे न की धीरे से की हमने आर्ट पढ़ा है ……… क्या आर्ट की पढ़ाई करना गलत है ??  अब आप ही बताइए क्या मैंने कुछ गलत कहा??????? आप के क्या विचार है इस बारे मे????… अगर आप भी इसी दुःख से परेशान है तो क्यों न इसका कोई समाधान मिल कर तलाश करे…………

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377 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Levitra के द्वारा
January 13, 2012

Many thanks for providing really informative articles on your resource. How can I share it on Facebook?

khil के द्वारा
December 28, 2010

Dear Roshni, yeh sochna galat hoga ki Arts me koi life knahin hai . Aap mehnat kijiye safalta aapki kadam chumegi. Aur mai aapse sahmat bhi hun.

atharvavedamanoj के द्वारा
September 22, 2010

रौशनी जी आपका यह प्रयास निःसंदेह प्रशंसनीय है …बहुत बहुत आभार वन्देमातरम

    roshni के द्वारा
    September 22, 2010

    मनोज जी धन्यवाद प्रोत्सहन के लिए वंदेमातरम

manishgumedil के द्वारा
September 5, 2010

मेरा दिल कहता है – एक और आर्ट स्नातक आपकी ही तरह न केवल अपने घर वालों की बल्कि अपने आस – पडोश और मित्रगन की उपेषा का शिकार हूँ. मेरे कई क्लास मेटस आज इंजिनियर बन चुके है. उनसे बात करने से मैं कतराने लगा हूँ………. और मेरे आर्ट बंधू प्राइवेट अध्यापक बन कर बस अपने पेट भर रहें हैं…………….. आपकी बात से मैं पूर्णतया सहमत हूँ,

    roshni के द्वारा
    September 5, 2010

    मनीष जी मई तो बीएस यही कहुगी की निराश मत होवे क्युकी हो सकता है इसमें भी कोई उस खुदा की रजा है .. यु भी हर कोई एक अपने आप में खास है … और आप तो teacher है गुरु है गुरु तो भगवन से बढकर है … बाकि ये सब तो जिन्दगी में चलता रहता है … बस हमे अपने आप को सिद्ध करना होगा सबके सामने की हमने आर्ट्स पढकर कोई गलती नहीं की है …

    manishgumedil के द्वारा
    September 6, 2010

    मेरा दिल कहता है- रौशनी जी यहाँ पे मैं आपकी गलतफमी को दूर करना चाहता हूँ, गुरु मैं नहीं मेरे आर्ट’स बंधू है, मैं तो सिर्फ बिज़नेस करना चाहता हूँ, हाँ ये और बात है मैं कभी “मम तात सम” एक गुरु हुआ करता था, पर क्या बताऊँ “रौशनी” अब मैं कुछ अलग कर गुजरना चाहता हूँ.

    Howdy के द्वारा
    July 12, 2016

    If only there were more cleevr people like you!

satyam kumar के द्वारा
August 14, 2010

रोशनी जी आप ने खूब लिखा है, मै क्या हर कोई आप की बात से सहमत होगा . अब आप की बात पर विचार कर के कोई तरकीब सोचूँगा और ब्लॉग के माध्यम से आपको बताऊंगा. सत्यम sar

kajalkumar के द्वारा
August 13, 2010

जब तक स्वांत सुखाय. तभी तक ठीक. वर्ना पान की दुकान लगा लूं…सोचता हूं.

    roshni के द्वारा
    August 13, 2010

    काजल कुमार जी चाहे आर्ट का भविष्य अच्छा हो या न हो .. पर अगर हम logone इस विषये को चुना है तो हमे इसी में सफल हो कर दिखना भी है .. आभार सहित

Amit kr Gupta के द्वारा
August 12, 2010

नमस्कार रौशनी जी ,मैंने आज पहले बार आपका ब्लॉग पढ़ा. आर्ट्स विषय की पढाई करने के लिए आज अधिकतर युवा नहीं चाहते हैं .वे सोचते हैं की यह विषय समय बर्बाद करने वाला विषय हैं लेकिन वे यह नहीं समझते की यदि इसकी पढाई यदि सही से की जाये तो इसमे अच्छा किया जा सकता हैं .मै भी आर्ट्स से ही हूँ. यह बात सही हैं की उन विषयो के साथ स्नातक पास लोगो को जल्दी नौकरी मिल जाती हैं .आपकी चिंता जायज हैं. मैंने कुछ ब्लॉग लिखे हैं यदि समय मिले तो पढ़ कर अपने शिकायतों और सुझाव से मुझे अवगत करावे. आप मेरे ब्लॉग पढ़ने के लिए इस add पर जा सकते हैं .www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    August 13, 2010

    अमित गुप्ता जी… आपने सही कहा सही से की गई कोई भी चीज़ फायदा देती है . और आज का युवा आर्ट्स पढना ही नहीं चाहता… इसके लिए कौन जिमेदार है …??? और मै आपका ब्लॉग जरुर padugi … आभार सहित

anju के द्वारा
August 6, 2010

hamari सोच को दर्शाता लेख की हमारा युवा आज वास्तव मैं यही सोचता है की आर्ट्स का कोए भविष्य नहीं है और उसे लेने के बारे मैं सोचता भी नहीं है क्युकी उसे लगता ही नहीं की ये विषय उस को सफलता दिलवाएगा

    roshni के द्वारा
    August 6, 2010

    अंजू जी धन्यवाद अपने आर्ट्स के भविष्य के बारे में सोचा और अपनी कीमती राये जाहिर की… धन्यवाद सहित

anju के द्वारा
August 6, 2010

शुक्र है कोए तो आर्ट्स वालों के दुःख को समझता है और उस पर लिख रहा है उमीद है की सर्कार को भी एस बारे मैं कदम उठाना चाहिए

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
August 3, 2010

क्षमा कीजियेगा … को हम नकार सकते हैं, = {को हम नहीं नकार सकते हैं,} क्षारत = { क्षेत्र }

    roshni के द्वारा
    August 3, 2010

    क्षमा की कोई अवश्यकत नहीं है शैलेश जी क्यों की आपके भाव को समज गए है… मैंने ऊपर अपने लेख मई भी यही लिखा है की अगर तकनीकी स्टुडेंट्स हमारे देश का ढांचा है तो कला नीव .. फिर से धय्न्वाद सहित

    Janisa के द्वारा
    July 12, 2016

    Thanks for every other inirtmaofve site. Where else may I get that type of information written in such an ideal approach? I have a challenge that I am simply now operating on, and I’ve been on the glance out for such info.

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
August 3, 2010

रोशनी जी ! शिक्षा चाहे जिस किसी माध्यम से ले जाए \’आर्ट्स\’, \’विज्ञान\’, \’तकनीकी\’, \’व्यावसायिक\’, या \’प्रबंधन\’ कुल मिला कर जब शिक्षा का धरातलीय अनुप्रयोग होना होता है तब सब का एकीकार हो जाता है, किन्तु जैसे की आपने अवसरों की बात कही है, कला वर्ग के छात्रों को भी अनेक अवसर हैं, कला वर्ग के छात्रों का अनुपात प्रशासनिक सेवाओं, और लोक सेवा के क्षेत्रों में अन्य वर्ग के छात्रों से अधिक है, तो इस तरह हम उनके अवाषरों और उनकी सेवाओं के योगदान को हम नकार सकते हैं, जहाँ विज्ञान, तकनीकी और चिकित्सा के क्षारत समाज के लिए नयी सम्भावनाओं का सूत्रपात करने हैं, वही कला वर्ग के छात्र धरातलीय स्तर पर उनका क्रियान्वयन करते हैं | तो कोई कला वर्ग के छात्रों को पीछे कहने की भूल कौन कर सकता है | कला ही दर्शन है, सामाजिकता है, इतिहास है, अभिरक्षा है, आर्थिक विश्लेषण हैं, संसाधन प्रबंधन, मनोविज्ञान है, आंकिक विश्लेषण है और कला को मूर्त रूप में देखें तो कला ही जीवन है, विज्ञान भी प्रयोगों के प्रेक्षणों से निष्कर्ष पर पहुंचकर अन्वेषण करने की कला है | और प्रतियोगिता तो प्रकृति का नियम है, और शिक्षा के हर वर्ग में है | कैम्पस प्लेसमेंट भी तकनीकी शिक्षा, और प्रबंधन शिक्षा के कुल छात्रों के १०% को ही मिल पाता है, और शेष को संघर्ष करना पड़ता है | और संघर्षरत तकनीकी शिक्षा और व्यावशायिक शिक्षा के छात्रों पर भी इस बात का भारी दबाव होता है की उनके ऊपर उनकी पारिवारिक आय का बहुत बड़ा हिस्सा खर्च किया गया है, तो पारिवारिक दायित्वों का बोझ और उनके संघर्ष का बोझ भी उंके ऊपर कम नहीं होता , जो उनमे अपराध बोध का भाव पैदा करता है और तनाव की विषद स्तिथिति में धकेल देता है | शिक्षा रूचि के अनुसार ही ली जानी चाहिए | अरुचिपूर्ण ली गयी शिक्षा कभी भी शांत और सुखद भविष्य नहीं दे पाती है | इस लिए जो भी माध्यम अधिक पसंद हो वही शिक्षा लेनी चाहिए ……………… और उसी में भविष्य भी है | और अंत में \"सावन को आने दो\" के एक गीत की दो पक्तिया बताना चाहूँगा ………………… गगन ये समझे चाँद सुखी है, चंदा कहे सितारे सागर की लहरें ये समझे हमसे सुखी किनारे ओ साथी दुःख में ही सुख है छिपा रे … अच्छे लेख ले किये बधाई ……

    roshni के द्वारा
    August 3, 2010

    Shaliesh जी आपकी इतनी अच्छी टिप्पणी ने बहुत कुछ साफ़ क्र दिया……. ये सच है की संघर्ष सभी को करना पड़ता है किसी को कम और किसी को ज्यदा … मगर जहाँ तक शिक्षा में जायद पैसा खर्च करना या कम खर्च की बात है तो कई बार ऐसे भी स्टुडेंट होते है जिनके माँ-बाप उनपर ज्यदा पैसा नहीं खर्च सकते हाँ मगर अच्छी शिक्षा दिला कर उन्हें काबिल बने की पूरी कोशिश करते है और उनका जीवन के लिए संघर्ष मेरे लिए कही जायदा पैसा खर्च के पड़ने वालों के मुकबले ज्यादा मुश्किल है…… बाकि अंत तो वही है नौकरी मिल गयी तो ठीक वरना कुछ भी कर लो मूल्य न पड़ेगा ….. धन्यवाद इसी तरह अपने अमूल्य विचारों से अवगत करवाते रहियेगा.. आभार सहित

allrounder के द्वारा
August 3, 2010

रौशनी जी, आर्ट्स स्टुडेंट्स और दुसरे स्टुडेंट्स मैं बही फर्क है जो किसी ज़माने मैं आर्ट्स फिल्म्स और commercial फिल्म्स मैं हुआ करता था ! मगर आप चिंता न करें आपकी कविताओं का संग्रह अवश्य किसी दिन छपेगा और उस दिन आप भी इन सबकी दौड़ मैं काफी आगे निकल जाओगी ! बाकी अपने जो व्यथा आर्ट्स स्टुडेंट्स की लिखी है अद्वितीय है !

    roshni के द्वारा
    August 3, 2010

    सचिन जी, आप ने सही तुलना की आर्ट्स और commercial फिल्मों के जरिये… और आपकी ये लाइन की मेरा कविता का संग्रह अवश्य छपेगा उसके लिए धन्यवाद … मैंने तो ये अभी आस भी नहीं की थी और आपने लिख दिया … शुक्रिया तहे दिल से

    allrounder के द्वारा
    August 4, 2010

    रौशनी जी, देखिये मैंने कहा ही नहीं की आपकी कहानियों का संग्रह एक दिन अवश्य ही छपेगा, बल्कि अपने एक लेख मैं आपकी कुछ पंक्तियाँ छाप भी दिन, मगर अफ़सोस इस बात का है की ये उधार मैं छपी है, इसका भुगतान मैं आपको नहीं कर सकता, हाँ लेकिन आपकी कविताओं का संग्रह छपने की प्राथना प्रभु से अवश्य कर सकता हूँ, और आप सच मानिए मैंने जिसके लिए भी दिल से प्राथना की है, इश्वर ने अवश्य सुनी है, और अब तो सोनी जी ने भी मेरी बात मैं विश्वास दिखाया है, तो समझो हम सब साथियों की कामनाएं एक दिन अवश्य ही रंग लायेंगी ! मगर आप संग्रह छपने के बाद हम लोगों को भूल मत जाइएगा !

    roshni के द्वारा
    August 4, 2010

    सचिन जी अपने जो दुआ मेरे लिए मांगी है वोह किसी भी भुगतान से कही बढ़कर है … मेरे लिए ये बहुत ही अनमोल है जो अपने कहा….. और मै आपकी और सोनी जी शुकर गुजर हूँ जो मुझे इतना होंसला दे कर रहे है. आपका धन्यवाद नहीं कर सकती क्युकी जो आपके लिए दुआ करता है उसके लिए ये शब्द बहुत छोटे है … और यकीं मानिये ये बात मुझे हमेशा याद रहेगी…….

K M Mishra के द्वारा
August 3, 2010

बाबा आमिर खान ने कहा है ‘आल इज वेल’ । इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि वह काम चुनो जो तुम्हे सबसे अच्छा लगता है क्योंकि फिर उस काम को तुम दूसरों से बेहतर कर सकते हो । सिंपल । अपनी दिल की आवाज सुनो और दिल पर हाथ रख कर कहो आल इज वेल । बाकी कैंपस की तो नहीं जानता लेकिन आई ए एस और पी सी एस बनने वालों में सबसे बड़ा प्रतिशत आर्ट वालों का ही होता है जो देश चला रहे हैं । बाकी रोशनी जी आर्ट की पढ़ाई को बढ़ावा अंग्रेजों ने दिया था आई सी एस के परीक्षार्थियों के लिये । लार्ड मैकाले द्वारा निर्धारित हमारी शिक्षा पद्धत्ति सिर्फ क्लर्क और जी हुजूर कहने वाले अधिकारी वर्ग को पैदा करने के लिये बनाई गयी थी ।

    roshni के द्वारा
    August 3, 2010

    क.म. मिश्र जी Amair khan ने तो all is well कह बाकि का पता नहीं हाँ ये जरुर मालूम है की अंत भला तो सब भला और जब हम लोगों को भी कोई मंजिल मिल जाएगी हम भी यही कहेगे All is Well और अपने सही कहा अंग्रेजों ने ही आर्ट की पढ़ाई को बढ़ावा दिया था अपने फायदे के लिए … ये अंग्रेज लोग भी पता नै हमारे देश मे क्या क्या छोड़ गए है … आपकी इतनी अमूल्य प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद .

chaatak के द्वारा
August 3, 2010

रौशनी जी, दुखती रग पर हाथ रख दिया न आपने देखा सोनी का गुस्सा| क्या हो गया है दुनिया को पैसा और बस पैसा! जिंदगी पैसों की मोहताज़ हो चली है| मैं नहीं कहता कि पैसा बिलकुल बुरी बात है लेकिन सिर्फ पैसा बुरी बात है| आज कुछ बच्चों (किशोर वय) से बात हुई बेचारे पढ़ाई के बोझ तले लड़कपन दबाये बैठे हैं| किसी माता-पिता के पास पैसा है तो स्टेटस सिम्बल ने बचपन कुचल दिया| इतनी असभ्य बाते करते हैं कि लाल-बत्ती इलाके की बाते उनके सामने प्रवचन प्रतीत होती हैं| यही तरक्की की है हमने विज्ञान की पढ़ाई करके? रौशनी मम्मी से बताओ कि जीने के लिए पैसा होता है पैसे के लिए जीवन नहीं| अपने ही बच्चों के बीच तुलना करना अच्छा नहीं फिर पड़ोसियों की बात तो दूर है| आपको जरूर अच्छी नौकरी मिलेगी और सबसे अच्छी बात है कि आप हमेशा अच्छे इंसान बने रहेंगे| बहुत सारी शुभकामनाएं!

    roshni के द्वारा
    August 3, 2010

    चातक जी, सच कहा अपने दुनिया पैसों की मोहताज हो चली है… पैसे के आगे संस्कार , अच्छी सब बेकार है .. आजकल आपने भी देखा होगा की channels पैर ऐसे shows आते है जिन में बहुत पैसे मिलते है लेकिन दुनिया भर की गन्दी असभ्य भाषा बोल कर और ये सब युवा पैसे के नशे में चूर कुछ बी करने को टायर रहते है…. बाकि आर्ट्स के स्टुडेंट्स तो बेचारे ये सब भी नहीं कर पाते.. चातक जी आप इस समस्या का कोई हाल बताये की हम लोगों को प्लेसमेंट क्यों नहीं मिलती….. मेरा मूल प्रश्न यही है …….. कुछ तो समाधान दीजिये…. देखिये सोनी जी भी को इसी बात का गुस्सा है… और बहुत से जो आर्ट पड़ते है उन्हें भी इसी बात का मलाल है…….. क्या करे अब कोई हल ही नहीं है शायद .. आपके कीमती सुजाव का इंतज़ार रहेगा………. धन्यवाद सहित

    chaatak के द्वारा
    August 3, 2010

    रौशनी जी, मैं आपकी जिज्ञासाओं और समस्या का समाधान करने की कोशिश जरूर करूंगा| और चिंता मत करिए सोनी जी नाराज नहीं हैं उन्होंने आपसे अपनी सहमति और आपकी और आर्ट्स पढने वाले लोगों की बेचारगी पर असहमति दर्शाई है|

    soni garg के द्वारा
    August 3, 2010

    रौशनी डियर मैं खुद एक आर्ट्स स्टुडेंट रही हूँ और मुझे इस बात का कोई मलाल न तो कभी था और ना होगा और ना ही मेरे परिवार इस बात का मलाल रहा है ! इतिहास और राजनीति जो हमेशा से ही मेरे पसंदीदा विषय रहे है आज उसी के बलबूते पर अपनी पोस्टो में लिख पा रही हूँ और कमाल की बात ये है की आज ही मुझे अपनी इस राजनितिक नोलेज की वजह से ब्लॉग संसद जैसे ब्लोग्स का मेंबर बनने ऑफर भी मिला जो मेरे लिए तो गर्व की बात है तो इधर उधर की सुनना बंद करो और अप्नेकाम पर फोकस करो जैसे की सचिन जी ने कहा है कि आपकी कविताओ का संग्रह ज़रूर छपेगा तो बस उस पर फोकास करो और ये कोई मजाक नहीं कि आपकी कविता वास्तव मै काबिले तारीफ़ है और यहाँ मैंउन्हें ही पढने आती हूँ ! हर किसी में अलग टेलेंट होता है तो प्लेसमेंट छोड़ो और अपने टेलेंट को पहचानो ! वैसे भी एक विचारक (नाम अभी याद नहीं आ रहा ) ने कहा है हम जो स्कुल और विश्विध्यल्यो में पढ़ते है वो हमरा ज्ञान नहीं है हमारा ज्ञान वो है जो हम इन विद्यालयों से बहार आकर इस्तेमाल करते है ! और चातक जी मेरी प्रतिक्रिया को समझने के लिए आभार !

    roshni के द्वारा
    August 3, 2010

    ji Chatak ji सोनी जी नाराज नहीं है मै जानती हूँ उन्होंने तो बस कला के स्टुडेंट्स के लिए अपने विचार जाहिर किये है .. और मेरा आशय उनका मुझसे नाराज होना नहीं था…… और अपने कहा की आप कोई समाधान तलाश करेगे उसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया …. एक बार फिर से आभार सहित

soni garg के द्वारा
August 3, 2010

भाड़ में गयी रूचि, समझ नहीं आता तुम्हे की आर्ट्स के स्टुडेंट को कोई नौकरी नहीं मिलती अरे तुम तो फिर भी लड़की हो एक बार को नहीं भी कमाओगी तो चल जायेगा लड़के से जाकर पूछो नौकरी नहीं मिली तो उस बेचारे को तो कोई अपनी बेटी भी नहीं देगा ! मम्मी की इतनी सी बात समझ नहीं आती तुम्हे, कब सुनोगी रौशनी डियर ! अब बाकी के सभी बच्चे भी कान खोल कर सुन लो अपनी रुचियों को तिलांजली दो और जुट जाओ जिंदगी की रेस में जहां अगर तुम आगे नहीं दौड़े तो कोई तुम्हे कुचल कर आगे चला जायेगा ! समझे और ये सब हमारे पेरेंट्स नहीं देख सकते फिर चाहे तुम बिना रूचि का कोई भी सब्जेक्ट लेकर जिंदगी भर फेल होते रहो तब भी ! अजी फेल हुए तो क्या हुआ आखिर मेडिकल और इंजीनियरिंग में फेल होना कोई आसान काम है ! और रौशनी जाओ जा कर मम्मी की बात सुनो और पढाई करो तो क्या हुआ की तुम इन्टरनेट पर ब्लॉग लिख रही हो तुम्हारे पास कोई पैकेज तो नहीं है ना और न ही इस सब को लिख कर कोई तनख्वा मिल रही ! तुम्हारी ख़ुशी तनख्वा से बढ़ कर नहीं है ! समझी उफ्फफ्फ्फ़ बस इससे ज्यादा भाषण नहीं दे सकती !

    roshni के द्वारा
    August 3, 2010

    सोनी जी आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया और मै आपके विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ .. आपको ब्लॉग संसद जैसे ब्लोग्स का मेंबर बनने ऑफर भी मिला इस के लिए आपको बहुत बहुत बधाई .. लेकिन मै यहाँ अपनी नहीं बहुत सारे दुसरे विधियार्थियों की बात कर रही हूँ … हम लोगो यहाँ पर लिखते है .. हमे को रास्ता मिल गया है … मगर बाकि लोगों का क्या ?? यहाँ पर बस उनके लिए इस समस्या का समधान तलाश करना चाहती हु ….. यु भी किसी ने कहा है अपने से पहले दूसरों के बारे में भी जरुर सोचे …. और ये लाइन की तुम्हारी खुशी तनख्वा से बढ कर है से मै पूरी तरह सहमत हु ……. सच में मै यहाँ पर सिर्फ अपनी खुशी के लिए ही लिखती हूँ… जो मुझे मिलती भी है ……. आभार सहित

    Kevrell के द्वारा
    July 12, 2016

    Just do me a favor and keep writing such trnanhcet analyses, OK?

mansi के द्वारा
August 3, 2010

very true…… यार तुमने सही कहा.. आर्ट्स वालों को नौकरी के लिए बहुत धके खाने पढ़े है…… मै भी इस दुःख से गुजर रही हू..

aakashtiwaary के द्वारा
August 2, 2010

रोशनी जी आप ने खूब लिखा है, मै क्या हर कोई आप की बात से सहमत होगा . अब आप की बात पर विचार कर के कोई तरकीब सोचूँगा और ब्लॉग के माध्यम से आपको बताऊंगा. Aakash

    roshni के द्वारा
    August 3, 2010

    आकाश जी .. शुक्रिया अपने मेरी बात को seriously लिया और आप के विचरों का इंतज़ार रहेगा… आभार सहित


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