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रुक जाओ तुम न जाओ

Posted On: 28 Jul, 2010 में

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कुछ लफ्ज़ नए कह दो ,
कुछ भी न छिपाओ ,
जो किसी ने न कहा हो ,
जो किसी ने न सुना हो ,
ऐसा कुछ कहे हम , तुम ऐसा कुछ सुनाओ ……………..
__________________________________
आँखों में कैद अश्को को ,
बहने का मिले रस्ता,
तुम जखम नए देकर , मुझे आज फिर रुलाओ
___________________________________
मै चाहती हु मुझसे ,
कोई वादा न करो तुम ,
और कहे बिना ही , सब वादों को निबाओ………
_____________________________________
तुम चले जाते हो और ,
मै रोक भी नहीं पाती ,
ख़ामोशी देती है आवाजे , रुक जाओ तुम न जाओ …………..
______________________________________
मेरे साथ चलना उम्र भर,
मेरा हाथ पकडे रहना,
कोई गिला हो गर तो, मुझसे तुम कहना,
मुझे दिल मे अपने रखोगे, तुम मेरी कसम खाओ…………….

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108 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Tangie के द्वारा
July 12, 2016

This artclie went ahead and made my day.

Mildred के द्वारा
June 21, 2011

Wow, your post makes mine look febele. More power to you!

    Kayo के द्वारा
    July 12, 2016

    Ja tydeligvis kan man få kjøpt Hunter støvler på coop obs! Jeg skulle gjerne hatt slike støvler, så jeg krysser fingrene så jeg kan bruke gavekortet på det ;-) mvh ingrid, inoredidalsmg@gmail.com

abodhbaalak के द्वारा
September 15, 2010

रौशनी जी, आजे आपके एक ब्लॉग को बिना इरादा पढ़ा और फिर आपके काफी सारे ब्लोग्स को पढने के लिए विवश हो गया, आप बहुत सुन्दर लिखी हैं और आपके लेखन में बहुत गहराई है. मुझे नहीं लगता की ये बात मै ज्यादा लोगों के बारे में कह सकता हूँ.

    roshni के द्वारा
    September 16, 2010

    अबोध जी बहुत बहुत शुक्रिया…आपने जिस तरह होंसला अफजाई से भरपूर प्रतिक्रिया दी पढ़ कर बहुत अच्छा लगा .. आशा है आपको आगे भी मेरी रचनाये पसंद आयेगी .. धन्यवाद सहित

mansi के द्वारा
July 31, 2010

nice poem roshni ji.. keep it up

    roshni के द्वारा
    August 5, 2010

    मानसी जी lots of thank for ur comment …

bhagwanbabu के द्वारा
July 30, 2010

सच्चे प्रेम की आवाज है खामोशी जिसकी आवाज है चुप रह्कर भी सब कुछ कह जाता है फिर वो कह्ता है मैने तो कुछ नही कहा एहसास के झरोखो से जब आती है मुस्कान ज़ुल्फ ढ्क देता है चेहरा और बन्द हो जाते है लब ये किसी आने वाले तुफान की आवाज है सच्चे प्रेम की आवाज है http://www.bhagwanbabu.jagranjunction.com

    roshni के द्वारा
    July 30, 2010

    भगवन बाबु जी बहुत अच्छी पंक्तिया लिखी अपने प्रतिक्रिया मे … धन्यवाद आभार सहित

    Alexavia के द्वारा
    July 12, 2016

    Hola Marisol gracias por todas las cosas bellas que compartes con todas nosotras…. Por favor enviame nuevamente el paso a paso de la mariposa, que sin querer lo borre y estoy super triste porque yo tengo todos los videos guardados como una co#necióc&l8230;. Besos

anju के द्वारा
July 29, 2010

रौशनी जी मुझे ये लाईन की आँखों में कैद अश्को को , बहने का मिले रस्ता, तुम जखम नए देकर , मुझे आज फिर रुलाओ बहुत पसंद आई कविता तो सारी अच्‍छी है पर ये लाइन मेरे दिल को छु गई

    roshni के द्वारा
    July 30, 2010

    अंजू जी धन्यवाद ………..

anand17 के द्वारा
July 29, 2010

अच्‍छी कविता है

    roshni के द्वारा
    July 30, 2010

    धन्यवाद आनंद जी… आपको कविता अच्छी लगी .

soni garg के द्वारा
July 29, 2010

A wonderfull poetry abt love nd feelings ………

    roshni के द्वारा
    July 30, 2010

    hi soni ji thanks for your precious comments……..

allrounder के द्वारा
July 29, 2010

Roshni Ji, koi agar mujhse poochhe ki Jagranjunction par achchhi kavitaon ka sangra kahan milega to main be jhijhak aapke blog ka pata bataunga ! aapke alag – alag mood ke udgaaron ke baare main kya likhun ? ek taraf Babul ke naam to Doosri taraf ye kavita ! Lajawaw! Jhakkas ! Sorry Net main thodi problem hai isliye hindi main nahin likh paa raha hoon !

    roshni के द्वारा
    July 30, 2010

    allrounder जी इतनी अच्छी टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद……. आप को मेरी रचनाओ में विविधिता नज़र आई शुक्रिया….. आपकी इतना होंसल बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया के लिए तह दिल से धन्यवाद ….

Anita Paul के द्वारा
July 29, 2010

रोशनी जी, क्या रोमांटिक कविता लिखी है आपने. प्रेम की संवेदना को उकेरती कविता. आभार

    roshni के द्वारा
    July 30, 2010

    अनीता जी , प्रेम करने वाला ही प्रेम की संवेदन को जान सकता है … और आप ने सही जाना … दिल से धन्यवाद

prashant jaiswal के द्वारा
July 29, 2010

रौशनी जी काफी अच्छी वियोग पूर्ण रचना है, जिसकी कसक दिल से उठ रही है|

    roshni के द्वारा
    July 30, 2010

    प्रशांत जी आपको कविता अच्छी लगी ये जान कर अच्छा लगा… वियोग किसी भी रचना को अच्छा बना देता है …. धन्यवाद् सहित!

Nikhil के द्वारा
July 29, 2010

बहुत खुबसूरत रचना, एक धागे में पिरोये कुछ मोतियों की तरह. बधाई!

    roshni के द्वारा
    July 30, 2010

    Nikhli ji, इतनी सुन्दर टिप्पणी के लिए धन्यवाद . आभार सहित

chaatak के द्वारा
July 29, 2010

बहुत खूब रौशनी जी, क्या बात है! ‘एक टीस सी दिल में रहती है एक कोना खाली-खाली सा…’ ऐसा लगा कि दिल में फंसी एक फांस पर किसी ने सहला दिया हो|

    roshni के द्वारा
    July 30, 2010

    चातक जी धन्यवाद् ..आप हमेशा होंसल अफजाई करते है .. सच में ये सब अच्छा करने के लिए प्रेरित करता है … इसी तरह राह दिखाते रहिये . धन्यवाद

rajkamal के द्वारा
July 29, 2010

खुदा सभी की जायज और मुमकिन हो सकने वाली चाहते पूरी करे

    roshni के द्वारा
    July 30, 2010

    राजकमल जी खुदा आपकी दुआ कबूल करे……… हमारी यही दुआ है……. आभार सहित




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